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जैसलमेर. नगर निकाय चुनाव में मतदान से पहले अब अंतिम पांच दिन बचे हैं। चुनाव प्रचार का शोर धीरे-धीरे थमने लगा है और प्रत्याशियों की रणनीति भीड़ जुटाने व बड़े आयोजनों से हटकर घर-घर संपर्क और बूथ प्रबंधन पर केंद्रित हो गई है। अंतिम दौर में प्रत्याशी और उनके कार्यकर्ता मतदाताओं से व्यक्तिगत संवाद बढ़ाने के साथ मतदान दिवस की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। अब चुनावी रणनीति में यह जानना अहम हो गया है कि किस परिवार में कितने मतदाता हैं, उनका रुझान किस ओर है और किन मतदाताओं से दोबारा संपर्क की जरूरत है। वार्डों को छोटे हिस्सों में बांटकर कार्यकर्ता परिवारवार संपर्क कर रहे हैं। करीबी मुकाबले वाले क्षेत्रों में प्रत्याशियों का अतिरिक्त समय लग रहा है।
प्रमुख राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के कार्यकर्ता बूथवार समर्थक मतदाताओं की सूची तैयार कर रहे हैं। इन सूचियों के आधार पर मतदान दिवस पर संपर्क की योजना बनाई जा रही है। सुबह मतदान शुरू होने के बाद यह पता लगाने पर जोर रहेगा कि समर्थक मतदाताओं में से कितने मतदान केंद्र तक पहुंच चुके हैं और किन लोगों से संपर्क बाकी है। अंतिम दिनों में नाराज और असमंजस की स्थिति वाले मतदाताओं को साधने पर विशेष जोर है। टिकट वितरण, स्थानीय समस्याओं, व्यक्तिगत समीकरणों और पिछले कार्यकाल से जुड़ी शिकायतों के कारण दूरी बनाने वाले मतदाताओं से प्रत्याशी सीधे संवाद कर रहे हैं। प्रभावशाली मतदाताओं और स्थानीय स्तर पर मजबूत संपर्क रखने वाले लोगों से भी लगातार बातचीत की जा रही है।
प्रचार अभियान का अंतिम दिन आने के बाद भी प्रत्याशियों की असली परीक्षा मतदान दिवस पर होगी। कार्यकर्ताओं को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपने के साथ यह तय किया जा रहा है कि कौन मतदाता कब मतदान केंद्र पहुंचेगा। कम मतदान वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने और वहां संपर्क बढ़ाने की रणनीति बनाई जा रही है। छोटे वार्डों में कुछ दर्जन वोट भी चुनाव परिणाम की दिशा बदल सकते हैं। ऐसे में प्रत्याशी मजबूत इलाकों में संपर्क बनाए रखने के साथ कमजोर माने जा रहे क्षेत्रों में अतिरिक्त समय दे रहे हैं। छोटी बैठकों, व्यक्तिगत मुलाकात और परिचितों के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंच बनाई जा रही है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार निकाय चुनाव में प्रत्याशी और मतदाता के बीच व्यक्तिगत संपर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अंतिम पांच दिन प्रचार से ज्यादा संगठनात्मक क्षमता की परीक्षा बन गए हैं। मजबूत बूथ नेटवर्क वाला प्रत्याशी समर्थक मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने में बढ़त हासिल कर सकता है।
Updated on:
04 Sept 2026 08:50 pm
Published on:
04 Sept 2026 08:50 pm
