जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ क्षेत्र के चक 27 बीडी मेँ तेज गति से निकले भू-जल ने इस स्थान को ही नहीं, बल्कि जैसलमेर जिले को भी सुर्खियों मेँ ला दिया है।
जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ क्षेत्र के चक 27 बीडी मेँ तेज गति से निकले भू-जल ने इस स्थान को ही नहीं, बल्कि जैसलमेर जिले को भी सुर्खियों मेँ ला दिया है। भू-जल दो दिन तक बाहर आता रहा। इस तरह का स्वत: प्रवाह पूर्व मे भी इस इलाके मेँ होता रहा है। इस बात मेँ क़ोई दोराय नहीं है कि उक्त इलाके में भू-जल के अथाह भंडार है, वहीं सरस्वती नदी के इस इलाके मेँ बहने के भी प्रमाण मिल चुके है। इन सबके बीच हकीकत यह भी है कि पानी की इतनी प्रचुर मात्रा होते हुए भी जैसलमेर अभी भी पानी के लिए संघर्ष कर रहा है। एक ओर नहरी पानी की कमी के लिए किसान धरना दे रहे है, वहीं जैसलमेर शहर और गांवों मेँ आए दिन पानी की किल्ल्त बनी रहती है। जल के इन भंडारों के उपयोग से जैसलमेर की जल की समस्या के समाधान के लिए अभी भी सरकार चेत जाये तो बड़ी राहत मिल सकती है।
उक्त भू-जल का उपयोग हो इसके लिए सरकार को कार्ययोजना बनानी पड़ेगी। विस्तृत सर्वे के बाद ऐसे इलाकों को चिन्हित किया जाए कि किस गहराई तक कितना पानी है इसका परीक्षण हो, गहरे परीक्षण नलकूप खोद कर खारे व मीठे पानी को कैसे अलग रखना है, यह तकनीकी विकसित हो, जिससे किसान को फायदा हो। इसके साथ ही सरस्वती नदी के अनुसंधान को भी पुन: शुरू करा उसके मार्ग की पहचान करने की दरकार है। यह कार्य पुरातन महत्व के साथ सीमा पर पहरा दे रहे जवानो की पेयजल समस्या के समाधान के लिए भी मददगार साबित हो सकेगा।
सब कुछ होते हुवे भी भू-जल से इस तरह के विकास नहीं होने का सबसे बड़ा कारण जिले मेँ भू जल विभाग के वरिष्ठ भू जल वैज्ञानिक के कार्यालय का नहीं होना भी है। इस तरह के अनुसंधान का नियंत्रण जोधपुर मेँ बैठे अधिकारियों की ओर से किए जाने से परिणाम सही रूप मेँ सामने नहीं आ पा रहे है। सरस्वती नदी अनुसंधान भी यही हुआ। बाहर से नियंत्रण होने से इसकी खोज के परिणाम बीच मेँ ही रह गए। यहां पूर्व मेँ वरिष्ठ भू-जल वैज्ञानिक का कार्यालय रहा है भी है, जिसके कारण से ही जिले मेँ अस्सी के दशक तक कई जगह भू-जल भंडारों की खोज संभव हुईं थी तथा जिले मेँ पेयजल समस्या का समाधान सम्भव हुआ था।