जैसलमेर शहर से करीब दो किलोमीटर दूर डेडानसर मार्ग स्थित ग्रामीण बस स्टैंड ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा है। निजी बसों का यह प्रमुख पड़ाव अलग-अलग रूटों के माध्यम से दर्जनों गांवों को शहर से जोड़ता है। शिक्षा, चिकित्सा, बाजार और सरकारी कामकाज—हर जरूरत की शुरुआत यहीं से होती है।
जैसलमेर शहर से करीब दो किलोमीटर दूर डेडानसर मार्ग स्थित ग्रामीण बस स्टैंड ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा है। निजी बसों का यह प्रमुख पड़ाव अलग-अलग रूटों के माध्यम से दर्जनों गांवों को शहर से जोड़ता है। शिक्षा, चिकित्सा, बाजार और सरकारी कामकाज—हर जरूरत की शुरुआत यहीं से होती है।
बावजूद इसके जिस स्थान पर रोज विकास की रफ्तार गुजरती है, वहीं बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं। बसें नियमित हैं, भीड़ स्थायी है, जरूरतें स्पष्ट हैं—फिर भी व्यवस्था अधूरी है। बस स्टैंड परिसर में प्रवेश करते ही बदहाल ढांचा नजर आता है।
दोपहर में तापमान बढ़ते ही यह स्थान तपते मैदान में बदल जाता है। महिलाएं बच्चों को दुपट्टे से ढककर खड़ी रहती हैं। बुजुर्ग यात्रियों को सहारा ढूंढना पड़ता है। छात्र-छात्राएं बस की प्रतीक्षा में धूप से जूझते दिखते हैं। अलग-अलग ग्रामीण क्षेत्रों के लिए संचालित दर्जनों निजी बसें यहां से गुजरती हैं। सुबह और शाम के समय भीड़ चरम पर रहती है, लेकिन कोई सुव्यवस्थित प्लेटफॉर्म नहीं, बसों की स्पष्ट पार्किंग लाइन नहीं, संकेतक बोर्ड भी सीमित। उखड़ी सडक़ के कारण बस में चढऩा-उतरना जोखिम भरा हो जाता है। बारिश के मौसम में यही कीचड़ में बदल जाते हैं। सुविधाओं के अभाव में यहां तपन यात्रियों को थका देती है।
किसान रूपाराम कहते हैं कि मंडी के लिए हर सप्ताह आना पड़ता है। आधा घंटा खड़े रहना सामान्य बात है, लेकिन यहां छाया तक नहीं। बस स्टैण्ड पर पहुंची छात्रा ममता ने बताया कि बस देर से आए तो धूप में खड़े रहना मुश्किल हो जाता है। पानी की कोई व्यवस्था नहीं।
मोहनगढ़ क्षेत्र से आए श्रमिक हनुमानाराम बताते हैं, सडक़ टूटी है कि बस से उतरते समय संतुलन बिगड़ जाता है। हादसे का डर रहता है। शहर के निवासी तेजाराम का कहना है बस स्टैंड गांवों की जीवनरेखा है, लेकिन हालत देखकर लगता है, जैसे इसे नजरअंदाज कर दिया गया हो। यात्रियों के अनुसार ग्रामीण बस स्टैंड केवल बसों का ठहराव नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों का केंद्र है। यदि यहां आधारभूत ढांचा सुदृढ़ किया जाए तो हजारों यात्रियों को राहत मिल सकती है।
-मजबूत और समतल सडक़ निर्माण
-स्थायी छायादार शेड व पर्याप्त बेंच
-स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था
-नियमित सफाई अभियान
-बसों की व्यवस्थित पार्किंग और स्पष्ट संकेतक