
जालोर। जालोर की पूर्व विधायक अमृता मेघवाल को उनके चर्चित वैवाहिक विवाद मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। पारिवारिक न्यायालय ने 7 जून 2023 को पारित विवाह विच्छेद की एकतरफा डिक्री को निरस्त करते हुए मामले को दोबारा मूल नंबर पर बहाल कर दिया है। न्यायालय ने माना कि अमृता मेघवाल को विधि के अनुरूप नोटिस की समुचित तामील नहीं हुई थी, इसलिए एकतरफा फैसला कायम रखना उचित नहीं है।
पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीश अमर वर्मा ने आदेश 9 नियम 13 सीपीसी के तहत अमृता मेघवाल की याचिका स्वीकार करते हुए उनके पति बाबूलाल मेघवाल के पक्ष में पारित तलाक की एकतरफा कार्रवाई और डिक्री को रद्द कर पुनः नियमित सुनवाई के आदेश दिए हैं।
अमृता मेघवाल ने अपनी याचिका में कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत दायर तलाक प्रकरण में उन्हें कभी वैधानिक रूप से नोटिस नहीं मिला। उनका आरोप था कि नोटिस गलत पते पर भेजा गया और बाद में समाचार पत्र में प्रकाशन के आधार पर एकतरफा कार्यवाही कर दी गई। इसी आधार पर 7 जून 2023 को विवाह विच्छेद का फैसला सुनाया गया।
उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी मिलने के बाद 13 जून 2023 को निर्णय की प्रमाणित प्रति के लिए आवेदन किया गया। 14 जून को नकल मिलने के बाद 5 जुलाई 2023 को अदालत में एकतरफा डिक्री निरस्त करने की याचिका दायर की गई।
न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें, उपलब्ध रिकॉर्ड और नोटिस की तामील से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण किया। अदालत ने माना कि उचित कानूनी नोटिस के अभाव में पारित एकतरफा निर्णय न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि इसी विवाद से जुड़ी डी.बी. सिविल अपील संख्या 2487/2024 राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित रही, जिसे 7 फरवरी 2025 को दोनों पक्षों के संयुक्त अनुरोध पर मध्यस्थता के लिए भेजा गया था।
फैसले के बाद अमृता मेघवाल ने पूर्व में हुई पूरी कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिना पत्नी को जानकारी दिए पति द्वारा तलाक लेना हैरान करने वाली बात है। समाज में यह प्रचारित किया गया कि उन्होंने स्वयं तलाक लिया, जबकि वह कभी तलाक की इच्छुक नहीं थीं।
उन्होंने अपने पूर्व वकील पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह सात महीने तक उन्हें गुमराह करता रहा क्योंकि उसके उनके पति से दोस्ताना संबंध थे। बाद में अचानक उन्हें पता चला कि उनका तलाक हो चुका है। अमृता ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में किसी महिला को बिना जानकारी के एकतरफा प्रक्रिया का सामना करना पड़े तो यह उसके लिए बड़ा मानसिक आघात है।
'मैं तलाक लेने की इच्छुक नहीं थी। लोगों के सामने ऐसा पेश किया गया कि मैंने तलाक लिया, जबकि बिना मेरी जानकारी के यह तमाम प्रक्रिया अपनाई गई।' -अमृता मेघवाल, पूर्व विधायक, जालोर
'सभी प्रक्रियाएं पूरी की गई, हमारे स्तर पर नोटिस भी सही पते पर ही भेजा गया था। उसी के आधार पर ही तलाक हुआ था।' -बाबूलाल मेघवाल, जिलाध्यक्ष, भाजपा एससी मोर्चा