22 अगस्त 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Jalore Human Story : 70 साल का साथ…अचानक एक ही दिन पति-पत्नी की दुनिया से हुई विदाई, ग्रामीणों की आंखें हुई नम

Jalore Human Story : जालोर के भंवरानी गांव में जीवन के करीब 7 दशक साथ गुजारने के बाद दरगाराम प्रजापत और उनकी पत्नी पुनीदेवी ने अंतिम सफर भी एक साथ ही तय किया। एक ही चिता पर दोनों का अंतिम संस्कार किया गया।
3 min read
Google source verification
jalore human story husband wife death same day villagers sad

Jalore Human Story : दरगाराम प्रजापत और उनकी पत्नी पुनीदेवी। फोटो पत्रिका

Jalore Human Story : जीवनसाथी के साथ सात जन्मों तक साथ निभाने की कसमें और सुख-दुख में साथ रहने के वादे विवाह के समय हर दंपती करता है। लेकिन जीवन की करीब 7 दशक लंबी यात्रा पूरी करने के बाद अंतिम पड़ाव पर भी एक-दूसरे का साथ मिलना विरले में ही देखने को मिलता है। भंवरानी गांव में शुक्रवार को सामने आए एक ऐसे ही संयोग ने हर किसी को भावुक कर दिया। 90 वर्षीय दरगाराम प्रजापत और उनकी 90 वर्षीय पत्नी पुनीदेवी ने जीवनभर साथ निभाने के बाद संसार से विदाई भी एक साथ ली। शनिवार सुबह दोनों की अर्थी एक साथ उठी और गठजोड़ा बांधकर अंतिम यात्रा निकाली गई। बाद में एक ही चिता पर दोनों का अंतिम संस्कार किया गया।

परिजनों के अनुसार दरगाराम और पुनीदेवी दोनों सामान्य रूप से स्वस्थ रहते हुए घर पर ही अपना जीवन बिता रहे थे। जालोर के भंवरानी गांव में शुक्रवार सुबह अचानक पुनीदेवी को चक्कर आया और कुछ ही समय बाद उनका निधन हो गया। पत्नी के निधन की खबर से दरगाराम व्यथित हो गए। कुछ समय बाद उनका स्वास्थ्य भी बिगड़ने लगा और उन्होंने भी घर पर ही अंतिम सांस ले ली। एक ही दिन में पति-पत्नी दोनों की मृत्यु की खबर से परिवार और पूरे गांव में शोक की लहर छा गई।

शनिवार सुबह जब दोनों की अंतिम यात्रा निकली तो दृश्य देखकर हर किसी की आंख नम हो गई। विवाह के समय जिस तरह दूल्हा-दुल्हन को गठजोड़े में बांधकर गृह प्रवेश कराया जाता है, उसी तरह दरगाराम और पुनीदेवी की अर्थियों को भी गठजोड़े से जोड़ा गया। ग्रामीणों और रिश्तेदारों की मौजूदगी में दोनों को अंतिम विदाई दी गई। 4 पुत्रों में ज्येष्ठ पुत्र कालूराम ने माता-पिता को मुखाग्नि दी। एक ही चिता पर दोनों का अंतिम संस्कार किया गया। दोनों अपने पीछे चार बेटों के परिवार में 25 पोते-पोतियों से भरापूरा परिवार छोड़कर गए है।

सादगी और अपनत्व की मिसाल

दरगाराम कुम्हार अपने सरल और सादगीपूर्ण स्वभाव के लिए गांव में पहचाने जाते थे। वे छोटे-बड़े सभी से आत्मीयता से मिलते और राम-राम कहकर अभिवादन करना उनकी सहज आदत थी। ग्रामीण बताते हैं कि उनसे मिलने पर ऐसा लगता था जैसे परिवार के किसी बुजुर्ग से मुलाकात हो रही हो। होली, दीपावली और अन्य अवसरों पर वे परिचितों से मिलना और हालचाल पूछना नहीं भूलते थे।

पुनीदेवी का जन्म निकटवर्ती बाला गांव में हुआ था। ग्रामीणों के अनुसार उनका स्वभाव भी बेहद सरल और शांत था। दोनों ने करीब 7 दशक के जीवन में परिवार को संभाला और सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ निभाया। उनकी जीवन यात्रा केवल पति-पत्नी के रिश्ते की कहानी नहीं, बल्कि लंबे समय तक निभाए गए विश्वास, अपनत्व और पारिवारिक संस्कारों की भी मिसाल रही।

ग्रामीणों के लिए यादगार बना प्रसंग

ग्रामीण गणपतसिंह मंडलावत ने बताया कि करीब 90 वर्ष की उम्र तक पति-पत्नी का साथ रहना और किसी गंभीर बीमारी या दुर्घटना के बिना सामान्य रूप से संसार से विदा होना अपने आप में संयोग है। उन्होंने कहा कि जीवनभर सरलता और सद्भाव से रहने वाले इस दंपती को अंतिम समय में भी ऐसा साथ मिलना गांव के लोगों के लिए भावुक कर देने वाला प्रसंग है।

भंवरानी में दिनभर दोनों की जीवन यात्रा और अंतिम विदाई की चर्चा होती रही। ग्रामीणों का कहना था कि विवाह के समय साथ जीने का संकल्प लेने वाले दरगाराम और पुनीदेवी ने मानो उस संकल्प को जीवन के अंतिम क्षण तक निभाया। जिस घर में कभी गठजोड़े के साथ गृह प्रवेश किया था, उसी रिश्ते का गठजोड़ा अंतिम यात्रा में भी कायम रहा-साथ जिए, साथ चले और साथ ही अंतिम विदाई पाई।