
Rajasthan : राजस्थान का एक मशहूर युवा भावेश मेघवाल। फोटो पत्रिका
Rajasthan : सीमित संसाधन, साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि और रोजगार के अवसरों से दूर एक छोटे गांव से निकले 23 साल के भावेश मेघवाल ने सोशल मीडिया पर अपनी अलग पहचान बना दी है। महज 500 रुपए की पहली कमाई से शुरू हुआ उनका सफर आज लाखों लोगों तक पहुंचने वाली डिजिटल कम्युनिटी में बदल चुका है। भावेश अब अपने प्लेटफॉर्म के जरिए उदयपुर के छोटे-बड़े कारोबारियों को डिजिटल दुनिया से जोड़ने का प्रयास कर रहा है।
राजसमंद जिले के छोटे से गांव मेंगटिया कलां के भावेश मेघवाल की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद कुछ अलग करने का सपना देखते हैं। आज उनके इंस्टाग्राम पेज पर 1.70 लाख से अधिक और फेसबुक पर 66 हजार से अधिक फॉलोअर्स है। व्यक्तिगत और बिजनेस अकाउंट मिलाकर उनकी डिजिटल पहुंच तीन लाख से अधिक लोगों तक है। भावेश के सफर की शुरुआत कॉलेज के दिनों में मिले एक छोटे मौके से हुई। एक दोस्त की दुकान के लिए उसने वीडियो बनाया और कहा कि वीडियो चलने पर एक गिफ्ट दे देना। अगले ही दिन वीडियो 4.5 लाख लोगों तक पहुंचा और दुकान पर ग्राहकों की पहुंच बढ़ गई। दुकानदार ने उसे गिफ्ट के साथ मेहनताना भी दिया। यही उसकी पहली कमाई और सोशल मीडिया कॅरियर का टर्निंग पॉइंट बन गया।
भावेश अपने स्कूल समय के शिक्षक सलमान शेख को जीवन का अहम मार्गदर्शक मानता है। वहीं प्रिया, भैरु, राहुल मेघवाल, महक परमार, सरगम सचदेव, अमित प्रजापत, जयेश बिलोची, रश्मि बिलोची और मनीष मेघवाल सहित टीम के सहयोग को भी वह अपनी यात्रा की अहम ताकत बताता है।
भावेश ने करीब ढाई साल पहले उदयपुर प्रमोशन पेज की शुरुआत की। सीमित संसाधनों के बीच कई दुकानों के लिए मुफ्त में वीडियो बनाए, कंटेंट तैयार किया और शहर की ER डिजिटल ऑडियंस को समझता रहा। धीरे-धीरे प्लेटफॉर्म स्थानीय कारोबारियों के लिए डिजिटल प्रमोशन का जरिया बन गया।
भावेश की लाइफ में मुश्किल दौर भी आया, जब इंस्टाग्राम पेज पर स्ट्राइक से पांच महीने तक पहुंच कम रही। ऐसे में उसने प्रमोशन के लिए फीस लेना बंद कर दिया। सोशल मीडिया के साथ क्लोदिंग बिजनेस भी शुरू किया। सफलता के सफर में परिवार के साथ ही सहयोगी हमेशा जुटे रहे।
भावेश की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल डिजिटल पहचान नहीं, बल्कि स्थानीय कारोबारियों की खुशी है। भावेश का लक्ष्य है कि शहर के अधिकाधिक छोटे व्यवसायियों को डिजिटल पहचान दिलाना है। यह सफर बताता है कि जीवन बदलने के लिए बड़े निवेश की नहीं, सही समय पर मिले छोटे अवसर की जरूरत है।
भावेश का जन्म गांव में हुआ, जबकि बचपन उदयपुर में ही बीता। पिता कैलाश चंद्र मेघवाल और माता सोहनी ने साधारण परिस्थितियों में परिवार को आगे बढ़ाया। आज सवीना में अपना घर बनाना भावेश के लिए केवल उपलब्धि नहीं, बल्कि संघर्ष के लंबे दौर का सकारात्मक परिणाम है।
शुरुआत छोटी हो तो भी सपने छोटे मत रखिए। लगातार सीखते रहिए, मेहनत करते रहिए और जो अवसर मिले, उसे पूरी ईमानदारी से बेहतर बनाने की कोशिश कीजिए। मेरी जिंदगी में 500 रुपए का एक छोटा मौका था, जिसने मुझे मेरी दिशा दिखाई।
Updated on:
22 Aug 2026 06:35 pm
Published on:
22 Aug 2026 06:35 pm
