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आतंकियों से निपटने वाला कश्मीर ऐसे निपटेगा कचरे से

कश्मीर में जैव-चिकित्सा कचरे के निपटान की निगरानी के लिए बार कोड प्रणाली की शुरूआत की गई है। नई प्रणाली के तहत, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जैव-चिकित्सा कचरे के उचित निपटान के लिए कश्मीर में स्वास्थ्य सेवा केंद्रों को बार कोड आवंटित किए हैं।    

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Oct 18, 2019
आतंकियों से निपटने वाला कश्मीर ऐसे निपटेगा कचरे से

श्रीनगर। कश्मीर में स्वास्थ्य सेवा ( Kashmir Health Services ) केंद्रों में जैव-चिकित्सा कचरे ( Bio Medical Waste ) के निपटान की निगरानी के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण के लिए बार कोड ( Bar Code System ) प्रणाली की शुरूआत की गई है। नई प्रणाली के तहत, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जैव-चिकित्सा कचरे के उचित निपटान को सुनिश्चित करने के लिए कश्मीर में स्वास्थ्य सेवा केंद्रों को बार कोड आवंटित किए हैं।

तीन जिलों में शुरूआत
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ सबेना ने कहा कि श्रीनगर, कुलगाम और शोपियां जिलों में अब तक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों के लिए बार कोड आवंटित किए गए हैं। "बाकी स्वास्थ्य केंद्रों के लिए बार कोड का आवंटन जारी है और एक सप्ताह के समय में पूरा किया जाएगा"

कचरे की हो सकेगी ट्रेकिंग
जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 के अनुसार, प्रत्येक स्वास्थ्य सुविधा केन्द्र को जैव-चिकित्सा अपशिष्ट युक्त बैग के लिए एक बार कोड प्रणाली स्थापित करनी होगी जो वैज्ञानिक तरीकों से होनी चाहिए। बार कोड प्रणाली कचरे की ट्रैकिंग और पहचान में मदद करेगी।"कोड कचरे के उत्पादन, संग्रह, परिवहन, उपचार और निपटान की वास्तविक समय ऑनलाइन निगरानी भी बनाएगा। "

संक्रमण से हो सकेगा बचाव
निर्देशक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कश्मीर रफी अहमद ने कहा कि बार कोड प्रणाली का मुख्य उद्देश्य उच्च स्वास्थ्य सूचकांक विकसित करना है। अधिकारियों ने कहा कि बार कोड सिस्टम से रिसाइकिल बायो मेडिकल कचरे के उठाव को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। अधिकारी ने कहा कि सुई, इंजेक्शन, विच्छिन्न शरीर के अंगों और सूती स्वैब सहित जैव चिकित्सा अपशिष्ट में कई संक्रामक बैक्टीरिया होते हैं और उन्हें सावधानीपूर्वक कचरे में फेका जाना चाहिए।

Published on:
18 Oct 2019 08:07 pm
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