जांजगीर चंपा

संभलता नहीं ब्लड बैंक और अब इलेक्ट्रोफोरेसिस टेस्ट की तैयारी

जिला अस्पताल का ब्लड बैंक कर्मचारियों की कमी की वजह से लडखड़़ाते हुए चल रहा है। अब यहां इलेक्ट्रोफोरेसिस टेस्ट की तैयारी चल रही है।

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जिला अस्पताल का ब्लड बैंक
जिला अस्पताल का ब्लड बैंक कर्मचारियों की कमी की वजह से लडखड़़ाते हुए चल रहा है। अब यहां इलेक्ट्रोफोरेसिस टेस्ट की तैयारी चल रही है।

जांजगीर-चांपा. जिला अस्पताल का ब्लड बैंक कर्मचारियों की कमी की वजह से लडखड़़ाते हुए चल रहा है। अब यहां इलेक्ट्रोफोरेसिस टेस्ट की तैयारी चल रही है। सूत्रों के मुताबिक पूरे प्रदेश भर के जिला अस्पतालों में 15 अक्टूबर से इस जांच की शुरूआत करने की योजना है।

दिलचस्प बात यह है कि जिला अस्पतालों में वैसे ही कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। जो चंद कर्मचारी हैं उन्हीं के बूते यह जांच भी कराई जाएगी। इसके लिए जिला अस्पताल में तैयारी की जा रही है।


गौरतलब है कि जिला अस्पताल में इलेक्ट्रोफोरेसिस मशीन पिछले 10 सालों से धूल खाते पड़ी है। कर्मचारियों की कमी व संसाधन के अभाव में जिला अस्पताल के मरीज सिकलिन की जांच के लिए भटकते रहते हैं। जिला अस्पताल में अब तक सिकलिन जांच के शुरू नहीं होने से इसके मरीज को सिम्स या मेकाहारा रेफर किया जाता है। वहीं निजी लैब में इसकी जांच के लिए मरीजों को 700-800 रुपए खर्च करनी पड़ती है।

यदि जिला अस्पताल में इस जांच की सुविधा मिल जाए तो मरीजों का न केवल उद्धार होगा बल्कि उनकी जांच के नाम पर आने वाली मोटी रकम बच जाएगी। ऐसा नहीं है कि यह सुविधा जिला अस्पताल में नहीं है, लेकिन कर्मचारियों की कमी की वजह से यह मशीन कबाड़ का रूप ले रही है।


क्या है इलेक्ट्रोफोरेसिस मशीन- यह टेस्ट सिकलिन के मरीजों के लिए लिखा जाता है। जांच के उपरांत इसकी बीमारी की पहचान होती है। इस टेस्ट की कीमत बाजार में तकरीबन 800 रुपए निर्धारित है। सिकलिन टेस्ट के लिए जिला अस्पताल में हर रोज चार से पांच मरीज पहुंचते हैं।

जिला अस्पताल में मशीन होने के बाद भी इसकी टेस्ट इस नाम से नहीं जा सकती कि यहां कर्मचारियों की कमी है। यदि यह मशीन शुरू हो जाए तो मरीजों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।


वहीं कर्मचारियों को धसीटा जा रहा- जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में सेटअप के मुताबिक एक डॉक्टर, दो लैब टेक्निशियन के अलावा एक दर्जन कर्मचारियों की जरूरत है,

लेकिन यहां केवल तीन कर्मचारी ही सेवा दे रहे हैं। कर्मचारी के नहीं होने से जरूरत के समय मरीजों को ब्लड बैंक सुविधा का लाभ नहीं मिल पाता। यहां खून की कमी से कई मरीजों की जान चली गई है। अब इन्हीं चंद कर्मचारियों के बूते इलेक्ट्रोफोरेसिस जांच की तैयारी चल रही है। यदि स्टॉफ नहीं बढ़ाया गया तो इस जांच में आंच आ सकती है। यदि जांच सुविधा कर दी जाए तो मरीजों को फिर भटकना पड़ेगा।


इलेक्ट्रोफोरेसिस जांच की तैयारी- जिला अस्पताल में इलेक्ट्रोफोरेसिस जांच की तैयारी की जा रही है। यह जांच शुरू हो जाए तो मरीजों के लिए बड़ी सुविधा होगी।
-डॉ. पीसी जैन, सिविल सर्जन

Published on:
14 Oct 2017 06:53 pm