कर्मचारियों के हंगामे को देखते हुए सहायक आयुक्त आबकारी प्रकाश पाल ने प्राइम वन कंपनी के जिला प्रभारी गुलशन बंजारे को तत्काल आफिस तलब किया।
जांजगीर-चांपा. जिले के आबकारी विभाग के दफ्तर में आज उस वक्त हंगामा शुरू हो गया जब सरकारी शराब दुकानों में नियुक्त कर्मचारियों के वेतन से अधिकांश राशि दुकानों में शराब की बोतलों के टूटफूट के एवज में काट ली गई। किसी के वेतन से 5000 काटा गया तो किसी के वेतन से 7000 काटा गया, साथ ही कर्मचारियों को वेतन काटने का कोई मुनासिब जवाब भी नही दिया जा रहा था। जिसकी वजह से वे आक्रोशित हो गये।
दरअसल जांजगीर चंापा जिले के 76 सरकारी शराब दुकानो ंमें 340 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है, इसमें सुपरवाईजर और सेल्समेन शामिल हैं। महीनों इंतजार के बाद आज जब वेतन भुगतान की बारी आई तो उनके वेतन से अधिकांश राशि शराब की बोतलों के टूटफूट के एवज में काट ली गई, वहीं उन्हें कोई वाजिब जवाब भी नही दिया जा रहा था। जिसकी वजह से कर्मचारी आक्रोशित हो गये और सहायक आयुक्त आबकारी कार्यालय के बाहर जमकर हंगामा कर दिया।
कर्मचारी रवि शंकर गबेल ने बताया कि बिना किसी सूचना के उनके वेतन से पांच हजार की कटौती कर दी गई। जिससे उसका परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बताया कि बिना किसी सूचना के वेतन में इतनी बड़ी कटौती उनके साथ नाइंसाफी है। इसी तरह हरीश बैरागी ने बताया कि शराब भ_ी में काम करना बड़ा मुश्किल काम है। इसके बाद वेतन कटौती की जा रही है। ऐसे में भविष्य में काम करना मुश्किल होगा।
कर्मचारियों के हंगामे को देखते हुए सहायक आयुक्त आबकारी प्रकाश पाल ने प्राइम वन कंपनी के जिला प्रभारी गुलशन बंजारे को तत्काल आफिस तलब किया और उनकी समस्या के समधान के उपाय के लिए हल निकालने की बात कही। इस मामले में गुलशन बंजारे ने बताया कि उच्चाधिकारियों के निर्देशन में बहुत जल्द ही वेतन कटौती की समस्या का समाधान निकाल लिया जाएगा। ताकि उनकी समस्या का निराकरण हो सके।
इस तरह काटी गई राशि
आबकारी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक ठेका कंपनी के कर्मचारियों से परिवहन के दौरान हो रही टूट-फूट पर परिवहनकर्ता कर्मचारियों के वेतन से कटौती की जाएगी। वहीं शराब भ_ी में यदि किसी कारणवश शराब की बोतलें टूटती है तो इसकी भरपाई प्राइम वन कंपनी करेगी। आबकारी विभाग के अफसरों की मानें तो सरकार शराब की एक-एक बूंद का पैसा लेगी। ताकि सरकार को किसी तरह का नुकसान न हो।
ऐसे में प्राइम वन कंपनी कटघरे में आ गया है और कंपनी नुकसान की भरपाई कर्मचारियों से करना चाहती है। इसके कारण ठेका कर्मचारी भड़क उठे और सहायक आयुक्त आबकारी कार्यालय बड़ी संख्या में पहुंचे थे। अफसरों ने कर्मचारियों को समझाइश दी और एक सप्ताह के भीतर मामले को सुलझाने का आश्वासन दिया। इसके बाद कर्मचारी शांत होकर घर को चले गए।
कर्मचारियों की वेतन से संबंधित कुछ समस्याएं थी। जिसे लेकर ठेका कंपनी के कर्मचारी नाराज थे। ठेका कंपनी के जिम्मेदार लोगों से इस संबंध में चर्चा की गई। उन्होंने एक सप्ताह के भीतर समस्या को सुलझाने का आश्वासन दिया है- प्रकाश पाल सहायक आयुक्त आबकारी