जांजगीर चंपा

CG Analytical News : सरकार व मौसम ने तोड़ी कमर, 10 साल में हम 20 लाख क्ंिवटल कम उगाए सोना

सरकार यदि समर्थन मूल्य में धान खरीदी की लिमिट की बंदिशें न रखे तो निश्चित ही जिले में धान खरीदी 20 साल पुराना रिकार्ड टूट सकता है।

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CG Analytical News : सरकार व मौसम ने तोड़ी कमर, 10 साल में हम 20 लाख क्ंिवटल कम उगाए सोना

जांजगीर-चांपा. धान उत्पादन के नाम पर प्रदेश में अव्वल जिले में भले ही साल दर साल धान खरीदी कम होते जा रही, इसके बाद भी जिले के किसानों में उत्साह कम होने का नाम नहीं ले रहा है। दस साल पहले जिले में सर्वाधिक 86 लाख क्विंटल धान की खरीदी हुई थी। तो वहीं इस साल मात्र 67 लाख क्ंिवटल धान की खरीदी हुई है। सरकार यदि समर्थन मूल्य में धान खरीदी की लिमिट की बंदिशें न रखे तो निश्चित ही जिले में धान खरीदी 20 साल पुराना रिकार्ड टूट सकता है। वहीं कम खरीदी की दूसरी वजह कीट प्रकोप व मौसक की बेरूखी बताया जा रहा है।

जिले में सिंचाई के साधनों का असर किसानों पर अच्छा खासा पड़ रहा है, लेकिन सरकार यदि किसानों के मेहनत का फल सही सलामत दे तो जिले के किसान धान नहीं सोने की फसल उगाने दुगुनी मेहनत करते। बशर्ते सरकार किसानों की मेहनत की कमाई को खरीदने आनाकानी करता है, जिसके चलते किसान अपना उत्पादन समर्थन मूल्य पर नहीं बेच पाते। पहले जहां धान खरीदी अनलिमिटेड होती थी। वहीं अब प्रति एकड़ मात्र 15 क्विंटल कर दी गई है। जिसके चलते समितियों में सीमित धान जा रहा है। वहीं दूसरा कारण हर साल जिले के अकलतरा, बलौदा, सक्ती सहित कई ब्लाक में कम बारिश की वजह से धान की खरीदी प्रभावित हो रही है। वहीं क्षेत्र में नहर का जाल फैला भी है तो बहुत कम इलाके में। नहर होते हुए भी कई गांव सूखे की चपेट में आ जाता है। जिसके चलते साल दर साल कम खरीदी हो रही है।

क्या कहते हैं किसान
गौरव ग्राम अफरीद के किसान राम शराब राठौर ने बताया कि हर साल कीटप्रकोप के बढ़ते आक्रामकता के चलते धान का उत्पादन कम होते जा रहा है। उसने बताया कि पहले वह अपने आठ एकड़ की फसल में 300 क्ंिवटल तक धान का उत्पादन कर लेता था, लेकिन इस साल कीट प्रकोप के कारण मात्र 250 क्ंिवटल ही धान का उत्पादन कर पाया। इसी तरह अकलतरा क्षेत्र के किसान रामकुमार यादव ने बताया कि क्षेत्र में हर साल सूखे के हालात बनते हैं। जिसके चलते उत्पादन कम हो रहा है। यदि अच्छी बारिश होती तो निश्चित ही उत्पादन पहले की तरह होता।

रायपुर जिले में 38.23 क्ंिवटल धान खरीदी हुई है। वहीं पांचवा स्थान धमतरी जिले का है। जहां 34 लाख क्ंिवटल धान की खरीदी हुई है।
[typography_font:18pt;" >कम खरीदी के यह हैं प्रमुख कारण
01. सरकार द्वारा समर्थम मूल्य में खरीदी की सीमा
02. कीटप्रकोप ने बरपाया कहर
03. तीन ब्लाक में सूखे के आसार
04. नहर की मरम्मत नहीं हो पाना
05. जिले में बढ़ता औद्योगीकरण
06. निरंतर घट रहा धान का रकबा

कब कितनी हुई खरीदी
वर्ष कुल खरीदी दर
2009 86.63 लाख 880
2010 83.36 लाख 980
2011 82.58 लाख 1030
2012 84.37 लाख 1110
2013 85.12 लाख 1280
2014 76.01लाख 1345
2015 70. 69 लाख 1400
2016 76.63 लाख 1450
2017 71.36लाख 1510
2018 66.92लाख 1590

कहां कितनी हुई खरीदी
जांजगीर 66.92 लाख
महासमुंद 55.39 लाख
बालोद 38.42लाख
रायपुर 38.23लाख
धमतरी 34.56 लाख
वर्जन
धान खरीदी पहले की अपेक्षा कम होते जा रही है। इसके कई कारण है। बावजूद प्रदेश में जांजगीर में सबसे अधिक धान खरीदी हुई है- केपी कर्ष डीएमओ

Published on:
12 Feb 2018 02:47 pm