
जांजगीर.चांपा. छत्तीसगढ़ में भाजपा शासन को 1000 दिन से अधिक हो गए हैं, लेकिन हालत यह है कि यह शासन के ऊपर पूरी तरह प्रशासनिक तंत्र हावी हो चुका है। विभागों में कार्य की पारदर्शिता व व्यवस्था बनाए रखते हुए हर तीन साल में अधिकारियों का तबादला आदेश शासन से जारी तो होता है, लेकिन उसका पालन कई अधिकारी नहीं कर रहे हैं। हद तो तब हो गई हैए जब लाखों करोड़ों का गबन कर कई लोग शासकीय पद पर बैठे हैं उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश भी हैं लेकिन उस आदेश की फाइल विभागों में धूल खा रही है।
पुलिस विभागीय अधिकारी के पल्ले में गेंद डाल देती तो विभागीय अधिकारी कहते हैं कि पुलिस मामला दर्ज नहीं कर रही है। सबसे बड़ी बात जिले के सबसे बड़े पद पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी कलेक्टर साहब इस पर लगाम लगाने में असफल साबित हो चुके हैं।
रिलीव लेकिन चेकबुक कैशबुक लेकर एसडीओ गायब
सबसे ताजा उदाहरण जल संसाधन विभाग के हसदेव नहर जल प्रबंध संभाग के उपसंभाग क्रमांक एक का है। यहां एसडीओ रहे डीएल खुंटे का तबादला मंत्रालय के आदेश पर 14 अगस्त 2017 को हो गया है। ईई ने 22 अगस्त को उन्हें उनके पद से रिलीव कर दिया हैए लेकिन खूंटे मंत्रालय में अपनी सेटिंग करके ट्रांसफर रुकवाने में लगे हैं और इसके लिए वह लगभग एक महीने से उपसंभाग क्रमांक एक की चेकबुक और कैशबुक लेकर गायब है। उन्होंने आदेशित स्थान में ज्वाइन भी नहीं किया है। ईई ने खुंटे को कई बार नोटिस भी दियाए जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा है कि उन्होंने सिविल सेवा आचरण नियम 1956 के नियम 3, ग, घ,ड,च का उल्लंघन है और इसके लिए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इतना सब होने के बाद भी उच्च अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे बैठे हैं और कह रहे हैं कि उनकी फाइल सीएम के पास समन्वय के लिए पड़ी है इसलिए वह नवीन पदस्थापना में ज्वाइन नहीं कर रहे हैं।
कृषि विभाग सबसे आगे
शासन के आदेश का उल्लंघन करने में जिला कृषि अधिकारी सबसे आगे हैं। यह अगर ठान लें कि उनके मातहत अधिकारी को वहां रहना है तो शायद सीएम के आदेश का भी पालन न करें। डीडीए एलएम भगत ने ऐसे कई कारनामे किए हैं। पहला कारनामा नवागढ़ में पदस्थ वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी आरएन गांगे का है। शासन ने इनका तबादला महासमुंद जिले में कर दिया था, लेकिन लगभग पांच माह बीत जाने के बाद भी डीडीए ने उन्हें रिलीव नहीं किया। गांगे के खिलाफ डीडीए से मिलीभगत कर कई बड़े मामलों में गड़बड़ी का आरोप है। यही कारण है कि डीडीए उन्हें रिलीव नहीं कर रहे हैं।
दूसरा और सबसे बड़ा मामला कृषि विज्ञान केंद्र जांजगीर में प्रक्षेत्र प्रबंधक के पद पर कार्यरत चंद्रशेखर खरे का है। चंद्रशेखर खरे 3 दिसंबर 2014 से 8 सितंबर 2014 तक कृषि विज्ञान केंद्र दंतेवाड़ा में पदस्थ रहे। इसी दौरान खरे बिना पद से रिजाइन दिए ने कई सौ किलोमीटर दूर डीडीए एलएम भगत के अधीन ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के पद पर ज्वाइन कर लिया। इस तरह खरे एक साथ शासन के दो-दो पदों पर कार्य करके दो-दो वेतन लेता रहा। खरे का आरोप है कि यह तभी संभव हो सका जब डीडीए एमएल भगत ने आधा वेतन लेकर बिना ड्यूटी उसकी उपस्थिति दिखवाई। अब कृषि विभाग से खरे के खिलाफ एफआईआर करने के आदेश हैंए लेकिन डीडीए की मेहबानी से वह फाइल धूल खा रही है। कलेक्टर डॉण् एस भारतीदासन के कहने पर भी भगत ने आज तक इस मामले में एफआईआर नहीं कराया है।
कोर्ट के आदेश पर भी डॉक्टर के खिलाफ नहीं दर्ज हुआ मामला
पामगढ़ सीएचसी में पदस्थ डॉ. केके डाहिरे और उनकी पत्नी डॉ. रश्मी डाहिरे अपने कार्यों में कितने लापरवाह है और उसकी वजह से कितने लोगों की जान जा चुकी है, यह बात किसी से छिपी नहीं है। हालत यह है कि कलेक्टर डॉण् एस भारतीदासन ने इनके खिलाफ लिखित में शासन को प्रस्ताव भेजा है कि इनका तबादला जिले से बाहर किया जाएए लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। हद तो यह है कि यहां पदस्थ डॉ. केके डाहिरे पर वहीं की स्टॉफ नर्स के साथ मिलकर फर्जी संस्थागत प्रसव दिखाकर जननी सुरक्षा योजना से मिलने वाली राशि को हजम करने का आरोप है। इस मामले पर परिवाद दायर होने के बाद कोर्ट ने डॉण् केके डाहिरे सहित नर्स व अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश भी दिया हैए लेकिन पामगढ़ पुलिस कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर रही है।
अन्य विभागों में भी यही हाल
यह तीन केस तो ऐसे हैं जो पूरी तरह से उजागर हैं और जनता इन्हें जानती है, लेकिन इसके साथ जिले में संचालित कई ऐसे विभाग हैए जहां कई लोगों का तबादला हो चुका है, लेकिन अभी तक उन्हें रिलीव नहीं किया गया है। इसमें पुलिस विभागए स्वास्थ्य विभाग, कृषि विभाग सबसे आगे हैं। जिले के लोगों की बात करें तो अब यही चर्चा उठ रही है कि शासन भी इसमें मिला है। वह तबादला व अन्य आदेश करता है, लेकिन संबंधित अधिकारी उच्च अधिकारियों से जैसे ही मिलकर आता है उसकी समस्या का निदान हो जाता है। जनता की इस चर्चा से इशारा साफ है कि वह क्या कहना चाह रही है।