जांजगीर चंपा

बिजली बिल वसूलने में विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों को आया पसीना

- बिजली हाफ योजना के फेर में अटका एक अरब इतने करोड़ का बिल

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बिजली बिल वसूलने में विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों को आया पसीना

जांजगीर-चांपा. सरकार के बिजली हाफ योजना के फेर में उपभोक्ताओं ने इस साल अच्छा खासा बिजली बिल अटका दिया है। दरअसल, सरकार इस वित्तीय वर्ष में बिजली हाफ करने की चुनावी घोषणा की थी, लेकिन इसमें में भी शर्तें लागू कर दी। जिससे उपभोक्ताओं में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है और बिल पटाने में कोताही बरतने लगे। जिसके चलते भारी भरकम बिजली बिल अधर में लटक गया।

एक ओर पारा जहां 43 पार होने की कगार में है तो वहीं इस भीषण गर्मी में विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों को बिजली बिल की वसूली में पसीना आ गया है। विभाग को मार्च अंतिम तक पौने तीन अरब का बिजली बिल वसूल करना था, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने मात्र 33 करोड़ का ही बिजली बिल वसूल पाए। अब भी विभाग को एक अरब 37 करोड़ की बिजली बिल वसूल करनी है, जिसके लिए विभागीय कर्मचारी घर-घर दस्तक देते हुए पसीना बहा रहे हैं, लेकिन उन्हें सरकार की चुनावी घोषणा के तर्कों का जवाब देने में पसीना आ रहा है।

दरअसल सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष में बिजली बिल हाफ करने की घोषणा की थी, लेकिन उपभोक्ता यही सोच रहे थे कि उनका पुराना बिजली बिल हाफ होगा, लेकिन ऐसा नहीं है, लेकिन चुनाव के बाद सरकार यह दलील दी कि आगामी वित्तीय वर्ष में उपभोक्ता जो बिजली उपयोग करेंगे उसमें बिल हाफ होगा। इतना ही नहीं यह बिल उन उपभोक्ताओं का हाफ होगा जो उपभोक्ता पुराना बकाया बिल चुक्ता करेंगे। इसके चलते उपभोक्ताओं ने बिजली बिल लटका दिया।

गौरतलब है कि फरवरी 2019 की तारीख तक विभाग का एक अरब 70 करोड़ 95 लाख 67 हजार का बिल बकाया था। लक्ष्य के मुताबिक विभाग ने मार्च अंतिम तक मात्र 33 करोड़ 53 लाख 67 हजार 967 रुपए का ही बिजली बिल वसूली कर पाई। यानी वित्तीय वर्ष के अंत तक विभाग को 1 अरब 37 करोड़ 41 लाख 99 हजार रुपए का बिजली बिल बकाया है। जिसकी वसूली के लिए विभागीय अधिकारी घर-घर दस्तक दे रहे हैं, लेकिन लक्ष्य के मुताबिक बिजली बिल की वसूली नहीं हो पा रही है।

सबसे अधिक चांपा डिवीजन में बकाया
बिजली बिल का सबसे अधिक इस्तेमाल चांपा डिवीजन में हो रहा है। चांपा डिवीजन में 58 करोड़ 69 लाख 88 हजार 427 रुपए का बिजली बिल बकाया है। इसके अलावा दूसरे क्रम में सक्ती डिवीजन की पेंडेंसी है। यहां 41 करोड़ 87 लाख 72 हजार 826 रुपए का बिजली बिल सक्ती डिवीजन में है। तीसरे क्रम में यानी सबसे कम अकलतरा डिवीजन का नाम शामिल है। यहां 36 करोड़ 84 लाख 37 हजार 829 रुपए का बिजली बिल बकाया है।

Published on:
18 Apr 2019 06:27 pm
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