
Chhattisgarh News: जांजगीर चांपा जिले से लगे पामगढ़ के ढाबाडीह कोसीर स्थित एनीकट पार करते समय लीलागर नदी में बही 40 वर्षीय महिला की लाश चार दिन बाद मिली है। करीब 72 घंटे तक चले खोजबीन के बाद महिला की लाश बिलासपुर जिले के थाना पचपेड़ी के ग्राम पंचायत सोन में सोन बंजर खलखला घाट के पास मिली। बता दें कि महिला पैदल मायके जा रही थी, लेकिन एनीकट पर एक गलती ने मौत ने जिंदगी खत्म कर दी।
जानकारी के अनुसार एसडीआरपी की केवल एक टीम ही तीन दिनों से महिला की तलाश कर रही है। जबकि नदी का एरिया काफी फैला हुआ है और बारिश से नदी का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है। इधर पचपेड़ी थाना पुलिस से संदिग्ध लाश मिलने की सूचना मिली। जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव की पहचान जेवरा निवासी रमाबाई पति अजीत चौहान उम्र 40 वर्ष के रूप में की, जो बीते रविवार 16 अगस्त की सुबह 6 बजे के करीब एनीकट को पैदल पार करते वक्त बह गई थी।
प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के चलते नदी नाले उफान पर है। वहीं जिस जगह महिला नदी में बह गई थी वह नदी का एरिया काफी फैला हुआ है और बारिश से नदी का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है। वहीं पानी के तेज बवाह में महिला का शव बिलासपुर जिले के सोन गांव पहुंच गया। जहां खलखला घाट में पानी का बहाव कम होने पर शव किनारे में अटक गया था।
ढाबाहीह (कोसीर)-टांगर (विद्याडीह) के बीच लीलागर नदी में हाईलेबल ब्रिज का निर्माण दो बार बजट में शामिल किया जा चुका है लेकिन 4 साल बाद भी ब्रिज निर्माण के लिए एक ईंट तक नहीं रखी जा सकी है। पुल नहीं होने के चलते आज भी दर्जनों गांव के लोगों को कई किमी का चक्कर लगाकर आवागमन करना पड़ रहा है या फिर एनीकट का सहारा लेना पड़ता है और जानलेवा साबित हो रहा है।
जिले के ढाबाहीह (कोसीर)-टांगर (विद्याडीह) के बीच लीलागर नदी में हाईलेबल ब्रिज और सडक़ निर्माण कार्य के लिए पहली बार 2021-22 के बजट में 5 करोड़ रुपए की प्रशासकीय मिली थी। दो बार सेतु विभाग की ओर से टेंडर निकाला गया पर नदी पर पुल नहीं बना। प्रदेश में सरकार बदल गई और काम आगे ही नहीं बढ़ा। इस मामले को पिछले साल विस सत्र के दौरान पामगढ़ विधायक शेषराज हरवंश ने ब्रिज निर्माण का मामला भी उठाया था तब विभागीय मंत्री तक यह नहीं बता पाए थे कि यहां पर पुल कब तक बनना शुरू होगा। हालांकि इसके बाद 2026-27 में बजट में पुन: शामिल कर लिया गया है लेकिन अब तक पुल निर्माण का अता-पता नहीं है।
पिछले साल 25 अगस्त को इसी एनीकट से युवक की जान चले जाने से एक घर का चिराग बुझ गया था। धनगांव का रहने वाला 25 वर्षीय युवक पारस कुर्रे पिता बरातू कुर्रे एनीकट से नदी में बह गया था। गोताखोरों की मदद से 27 घंटे बाद जाकर उसकी लाश मिली थी। तब भी ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन के प्रति रोष जताया था लेकिन घटना के बाद भी सिस्टम नहीं जागा और फिर एक महिला हादसे का शिकार हो गया। जिसके बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।