
कीचड़ में सांप की तरह लोटते हुए लोग ( Photo - Patrika )
Chhattisgarh News: आज नाग पंचमी का पर्व देशभर में मनाया जा रहा है, इस दौरान अलग-अलग राज्यों में कई तरह की परंपराएं प्रचलित है। छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा के एक गांव में सांपों के प्रति अपनी भक्ति प्रदर्शित के लिए एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। इस दिन अखाड़ा का भी आयोजन किया जाता है। इसके अलावा नगमत का आयोजन धूमधाम से होता है। इधर अकलतरा के दहला पहाड़ में मेला लगता है। नगमत, कुश्ती, दहिकांदो व कबड्डी प्रतियोगिता को देखने के लिए दूर दूर से लोग पहुंचते हैं।
जांजगीर चांपा के ग्रामीण अंचलों में नाग पंचमी के अवसर पर नगमत का खास आयोजन होता है। परंपराओं के अनुसार नगमत एक तरह का आयोजन है। जिसमें पहले कीचड़ युक्त मैदान बनाया जाता है। फिर मांदर, झांझ की धुन पर बाजा बजाया जाता है। अग्नि में हवन और मंत्रोच्चार का दौर शुरु होता है। इसी के बाद वहां मौजूद कई लोग सांप जैसा व्यवहार करना शुरु कर देते हैं। लोग अपना सुध बुध खोकर सांप की तरह गीली मिट्टी में लोटने लगते हैं। इस तरह नाग देवता के प्रति अपनी भक्ति का प्रदर्शन करते हैं, वहीं उन्हें वापस इंसान के रूप में लाने के लिए बैगाओं द्वारा पूजा पाठ किया जाता है।
नागपंचमी के दिन जिले के गांवों में एक और मान्यता प्रचलित है। इस दिन किसान अपने खेती किसानी के काम को पूरी तरह से रोक देते हैं। इस दौरान किसी भी तरह का औजार या लोहा धरती में नहीं गाड़ा जाता। किसान सुबह ही अपने खेतों में सांपों को दूध पिलाने के लिए निकल पड़ते हैं।
यहां नगमत और दहिकांदो भी हुआ। कीचड़ में लोट कर लोगों ने अपनी भक्ति का परिचय दिया। (Nag panchami 2026) बाद में बैगा द्वारा फुंकने के बाद नागदेव शांत होते है। ऐसी परंपरा नागपंचमी पर वर्षो से चली आ रही है। नागदेव की पूजा के बाद शोभायात्रा निकाली गई। मांदर की थाप के बीच लोग भीमा तालाब पहुंचे, जहां पूजन सामग्री का विसर्जन किया गया।
जैजैपुर से 27 किमी दूर कैथा में बिरतिया बाबा का प्रसिद्ध मंदिर है। यहां हर साल नागपंचमी के दिन दर्शनार्थियों का मेला लगता है। नागपंचमी पर सुबह से ग्रामीणों की भीड़ मंदिर में उमड़ी। शाम तक मंदिर में पूजा-अर्चना का सिलसिला चलता रहा। दर्शनार्थियों ने मेले में लगी दुकानों में जमकर खरीददारी की।
Nag Panchami 2024: नाग पंचमी के मौके पर घर के आंगन व खेतों में दूध-लाई के दोने रखे गए। सपेरों ने नागदेव के दर्शन कराए। लोगों ने सपेरों को पैसे व दूध देकर नागदेव का आशीर्वाद लिया। ऐसी मान्यता है कि नागपंचमी पर सांप के लिए दूध व लाई देने से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं। पुरानी बस्ती कहरापारा में नागदेव की पूजा-अर्चना सार्वजनिक रूप से की गई।
अकलतरा से 5 किलोमीटर दूर स्थित दल्हा पहाड़ में नागपंचमी पर मेला लगा। मेले में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। प्राचीन काल से यहां मेला लगता है। इस मौसम में क्षेत्र का एकमात्र मेला होने से करीब 15 हजार लोग यहां पहुंचे। सुबह से ही नागपूजा कर ग्रामीण मेले में पहुंचने लगे थे। प्रवेश द्वार पर सूर्य कुंड के पानी से शुद्ध होकर भक्त पहाड़ पर चढ़े और पहाड़ के ऊपर मां भगवती मंदिर में पूजा-अर्चना की।
Updated on:
17 Aug 2026 04:37 pm
Published on:
17 Aug 2026 04:37 pm
