
जौनपुर. देवोत्थान एकादशी के साथ ही बैंडबाजा बारात का धूम-धड़ाका शुरू हो गया है। जीएसटी लागू होने के बाद यह पहला सहालग है। इस बार बेटी की विदाई करने वालों की जेब से जीएसटी का भी शगुन वसूल होगा। बाजार पर इसका साफ असर देखने को मिलेगा।
जीएसटी की दरों के चलते शादी में पहले की तुलना में अधिक भुगतान करना पड़ेगा। मध्यम वर्गीय परिवार की शादी में पहले की तुलना में जीएसटी के चलते 50 से 60 हजार रुपये तक अधिक खर्च होंगे, जबकि वीवीआइपी शादी पर यही खर्च डेढ़ से दो लाख रुपये तक बढ़ जाएगा। एक जुलाई से जीएसटी लागू कर दी गई। देवात्थान एकादशी से चार महीने पहले ही विवाह आदि जैसे शुभ कार्य स्थगित कर दिए जाते हैं।
जीएसटी लागू होने के बाद अब 31 अक्टूबर से विवाह समारोह शुरू हो चुके हैं। जिन घरो में विवाह की तैयारियां हो रहीं हैं उन्हें सामान खरीदने और बुकिंग कराने में अधिक खर्च करना पड़ रहा है। मैरिज होम की बुकिंग में 18 फीसद जीएसटी देना पड़ेगा। जीएसटी से पूर्व 15 फीसद सर्विस टैक्स लगता था। यानि प्रति एक लाख रुपये के किराए पर तीन हजार रुपये अतिरिक्त देने पड़ेंगे। शादी को शानदार बनाने में टैंट की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। टैंट भी अब राजसी अंदाज में लगाए जाने लगे हैं।
टेंट पर जीएसटी की दर 12 फीसद है। पहले की तुलना में अब इस पर प्रति लाख आठ हजार रुपये अधिक देने होंगे। वहीं कैट¨रग में पहले कुल बुकिंग के 60 फीसद पर 15 फीसद सर्विस चार्ज लगता था। अब संपूर्ण वैल्यू पर 18 फीसद जीएसटी लगेगा। शादी में वर और वधू दोनों ओर से ज्वैलरी बनवाई जाती है। अब ज्वैलरी पर तीन फीसद का टैक्स देना होगा जो पहले एक फीसद था। इस तरह प्रति लाख दो हजार रुपये अधिक का भुगतान करना पड़ेगा।
बड़े ब्यूटी पार्लर जिनका सालाना टर्नओवर 20 लाख रुपये अधिक है वहां दुल्हन का श्रृंगार कराने पर अब 18 फीसद टैक्स देना होगा। कपड़े पर पांच फीसद जीएसटी लगाई गई है। इससे पहले इस पर टैक्स की दर शून्य थी। शादी में दूल्हे और दुल्हन को अपनी पसंद के कपड़े खरीदने पर 12 फीसद जीएसटी देना होगा, क्योंकि सिंगल पीस जिसकी कीमत एक हजार रुपये से अधिक है उस पर 12 फीसद जीएसटी है।