झालावाड़

अब बर्न के मरीजों को गोल्डन ऑवर में मिल सकेगा इलाज

.जिलेवासियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। झालावाड़ मेडिकल कॉलेज से संबद्धएसआरजी अस्पताल में 12.50 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली यह बर्न यूनिट गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित होगी।
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Updated: 22 Apr 2026, 11:00 AM IST
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झालावाड़.जिलेवासियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। झालावाड़ मेडिकल कॉलेज से संबद्धएसआरजी अस्पताल में 12.50 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली यह बर्न यूनिट गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित होगी। अब तक गंभीर मामलों में मरीजों को कोटा या जयपुर रेफर करना पड़ता था, जिससे इलाज में देरी होने का खतरा बना रहता था। वहीं अन्य जगह इलाज करवाने में मरीजों व परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब यूनिट बनने के बाद उच्च स्तर की सुविधा झालावाड़ में ही मिल पाएगी।

समय पर मिल सकेगा इलाज-

इसमें झुलसे हुए मरीजों के लिए विशेष आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर की सुविधा होगी। बर्न के मरीजों के लिए संक्रमण सबसे बड़ा खतरा होता है, जिसके लिए यहाँ विशेष 'आइसोलेशन' और वेंटिलेशन की व्यवस्था रहेगी। वहीं समय पर इलाज मिलने से स्थानीय स्तर पर यूनिट होने से 'गोल्डनऑवर' (हादसे के तुरंत बाद का समय) में इलाज मिल सकेगा। इससे मरीजों को काफी राहत मिल सकेंगी।

इतना होगा बजट-

एसआरजी चिकित्सालय में बनने वाली बर्न यूनिट के लिए राज्य सरकार ने 12.50 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है। जिसमें बर्न यूनिट और थैलीसीमिया वार्ड का निर्माण होगा। बर्न यूनिट के साथ-साथ एक विशेष थैलीसीमिया वार्ड भी बनाया जाएगा, जिससे इस बीमारी से जूझ रहे बच्चों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। अभी जिले में करीब 200 से अ​धिकथैलीसीमिया के मरीज है, जिन्हे यहां उच्च स्तर की सुविधा मुहैया हो सकेगी।

धर्मशाला का होगा ​निर्माण-

अस्पताल परिसर में धर्मशाला का निर्माण भी किया जाएगा, इससे दूर-दराज से आने वाले मरीजों के परिजनों को रुकने की सस्ती और सुरक्षित सुविधा मिलेगी।

विशेषज्ञ सेवाएं मिलेगी-

सूत्रों ने बताया कि इस नई यूनिट के बनने से गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के लिए आइसोलेशन वार्ड, स्पेशल ड्रेसिंग रूम और प्लास्टिक सर्जरी जैसी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होने की उम्मीद है। झालावाड़ के अलावा पास के क्षेत्रों के मरीजों को अब कोटा या बड़े शहरों में जाने की जरुरत नहीं होगी इससे उनका समय और पैसा दोनों बचेगा। वहीं भारत सरकार के नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड मैनेजमेंट ऑफ बर्न इंजरीज के मानकों के अनुसार इस यूनिट में 12 बेड होते हैं। इसमें 8 बेड जनरल वार्ड और 4 बेड विशेष आईसीयू के लिए आरक्षित होगा। बजट में बर्न यूनिट के साथ थैलीसीमिया वार्ड का भी प्रावधान है, जो विशेष रूप से इस आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित बच्चों के लिए होगा।

बजट घोषणा के अनुसार एसआरजी अस्पताल में एक नई धर्मशाला व बर्न यूनिट का निर्माण होगा। यूनिट में गंभीर संक्रमण से बचाने के लिए वॉक-इन वेंटिलेटर और झुलसी हुई त्वचा के इलाज के लिए अत्याधुनिक प्लास्टिक सर्जरी उपकरणों की सुविधा रहने की उम्मीद है। निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। इसकी नोडल एजेंसी पीडब्ल्यूडी है।

संजय पोरवाल, डीन मेडिकल कॉलेज, झालावाड़।

Updated on:
22 Apr 2026, 11:00 AM IST
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