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सीमित संसाधनों में किए ब्रेकियलप्लेक्सस के ऑपरेशन, स्थाई अपंगता से बचाया

मेडिकल कॉलेज प्रदेश का पहला ऐसा मेडिकल कॉलेज बन गया है, जिसने एक साल में डेढ़ दर्जन ब्रेकियलप्लेक्सस सर्जरी कर मरीजों को स्थाई अपंग होने से बचाया।

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झालावाड़झालावाड़ मेडिकल कॉलेज प्रदेश का पहला ऐसा मेडिकल कॉलेज बन गया है, जिसने एक साल में डेढ़ दर्जन ब्रेकियलप्लेक्सस सर्जरी कर मरीजों को स्थाई अपंग होने से बचाया। यह काम कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभाग द्वारा किया गया। यहां न्यूरो सर्जर विभागाध्यक्ष डाॅ. रामसेवक योगी द्वारा न्यूरो सर्जरी विभाग में एक साल पहले राजस्थान में पहली बार ब्रेकियलप्लेक्सस सर्जरी करना शुरू किया था। जैसे ही ऐसे मरीजों को इस सुविधा का पता चला तो राजस्थान सहित मध्यप्रदेश के भी मरीज झालावाड़ मेडिकल कॉलेज आना शुरू हुए। एक साल में 14 लोगों की ब्रेकियलप्लेक्स सर्जरी कर उनको स्थाईरूप से अपंग होने से बचा लिया। ये सुविधा प्रदेश के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नहीं होने से भरतपुर, झुंझुनू, बारां सहित एमपी के इंदौर व अन्य जिलों से भी मरीज यहां इलाज करवाने आ रहे हैं। ब्रेकियलप्लेक्सस में मरीज का एक हाथ बिल्कुल काम करना बंद कर देता है और मरीज को असहनीय दर्द होता है।

जयपुर से झालावाड़ रैफर-

हाल में एक सड़क हादसे में घायल मरीज विष्णु कुमार (32वर्ष) निवासी भरतपुर का इलाज किया गया। ​विष्णु को सड़क हादसे में ब्रेकियलप्लेक्सस की चोट लगी और पिछले 9 महीने उसके परिजन भरतपुर के साथ-साथ जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में दिखाया तो वहां से उन्हें डॉ.रामसेवक योगी के पास झालावाड़ मेडिकल कॉलेज रैफर किया गया। विष्णु कुमार के परिजनों के अनुसार पहले उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ कि जो ऑपरेशन एसएमएस में नहीं हो सकता था, वो झालावाड़ जैसी छोटी जगह हो सकता है। लेकिन उनके पास कोई रास्ता नहीं था दिल्ली जाकर इलाज करवाने के पैसे नहीं थे क्योंकि इस तरह के ऑपरेशन में 5 से 10 लाख का खर्चा होता है और तीन से चार बार ऑपरेशन करवाना पड़ता है तब कहीं जाकर हाथ काम करने लगता है। 22 मार्च को झालावाड़ मेडिकल कॉलेज ब्रेकियलप्लेक्सस का ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया तो परिजनों ने राहत की सांस ली।

डेढ दर्जन ऑपरेशन किए-

डॉ. रामसेवक योगी ने बताया कि अभी तक एक साल में 15-20 ब्रेकियलप्लेक्सस के साथ-साथ नर्व ट्रांसफर के ऑपरेशन हो चुके हैं जिसमें राजस्थान के साथ-साथ मध्य प्रदेश के भी कई जिलों से मरीज झालावाड़ मेडिकल कॉलेज मैं आकर निशुल्क इलाज करवा चुके हैं। मेडिकल कॉलेज में गुरजीत सिंह निवासी अशोक नगर मध्य प्रदेश, रामदुलारी निवासी कोटा, सोनू निवासी बूंदी, बांरा निवासी भारत, उमाशंकर निवासी ग्वालियर मध्य प्रदेश, विष्णु निवासी भरतपुर,

रघुवीर निवासी इंदौर मध्य प्रदेश, कविंदर निवासी झुंझुनू राजस्थान, सलीम वाशिम महाराष्ट्र, जगदीश निवासी अकलेरा,

महेश निवासी पिड़ावा, विष्णु निवासी भरतपुर ने यहां आकर ऑपरेशन करवाए।

मरीजों की जुबानी

केस-एक

झालावाड़ जिले के खानपुरिया निवासी मरीज मानसिंह ने बताया कि मैं 19 सितंबर 2024 को सड़क हादसे में घायल हो गया था, उसके बाद मैं 15 दिन कोटा मेडिकल कॉलेज में भर्ती रहा। उसके बाद एक माह एसएमएस जयपुर में भर्ती रहा। आखरी में 3 महीने बाद झालावाड़ मेडिकल कॉलेज 31 जनवरी को ऑपरेशन हुआ तो राहत मिली।

केस दो-

बारां निवासी आसाराम ने बताया कि मेरा 21 जुलाई 2025 को एक्सीडेंट हो गया था, मैंने कोटा व अन्य जगह दिखाया। मेरे एक हाथ ने काम करना बंद कर दिया था। इसके बाद मैंने झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में दिखाया तोयहां ऑपरेशन के बाद अब मेरा हाथ अच्छे से काम कर रहा है।

क्या होता है ब्रेकियल प्लेक्सस-

ये गदर्न में नसों का एक नेटवर्क है, जो रीढ़ की हड्डी से कंधे, हाथ तक संकेतों को ले जाने वाली नसें होती है। गदर्न तथा कंधे पर आघात लगने से ब्रेकियलप्लेक्सस की चोट हो सकती है, जिससे हाथ में कमजोरी या लकवाग्रस्त हो सकता है। जिसमें मरीज का एक हाथ काम नहीं करता है। अगर छह माह में इसका इलाज नहीं करवाया जाता है तो हमेशा के लिए मरीज का एक हाथ काम करना बंद कर देता है।

कई सफल ऑपरेशन-

झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभाग में ब्रेकियलप्लेक्सस के कई सफल ऑपरेशन हो रहे हैं। इससे मरीजों को राहत मिल रही।

डॉ. संजय पोरवाल, डीन मेडिकल कॉलेज, झालावाड़।