झालावाड़

खेतों में लहलहाने लगा काला सोना, इस बार 1700 सौ नए पट्टे

खेतों में इन दिनों काला सोना (अफीम) की फसल लहलहाने लगी है। जिले में इस बार 45 सौ अधिक काश्तकारों को अफीम की खेती के लिए पट्टे दिए गए हैं। इसमें इस वर्ष 1700 सौ नए पट्टे जारी हुए

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- जिले में दस व पांच आरी के पट्टे जारी किए

झालावाड़ खेतों में इन दिनों काला सोना (अफीम) की फसल लहलहाने लगी है। जिले में इस बार 45 सौ अधिक काश्तकारों को अफीम की खेती के लिए पट्टे दिए गए हैं। इसमें इस वर्ष 1700 सौ नए पट्टे जारी हुए। इनदिनों केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम खेतों में पट्टों की जांच कर रही है।। खेत में अफीम बोने के दो माह बाद फूल आ जाएंगे। यह फूल 15 से 20 दिन में डोड़े बन जाते हैं। जिले में किसानों ने नवंबर माह के अंत में बुआई कर दी थी। अभी कई किसानों के दो माह की तो कई के डेढ़ माह की फसल हो चुकी है।

फसल की सुरक्षा में जुटे किसान-

अफीम की फसल की सुरक्षा में किसान तरह-तरह के जतन कर रहे हैं। रोजड़ों और जंगली सूअर से फसल बचाने के लिए किसान लोहे की जालियों के साथ ही बाड़ लगाकर फसल को सुरक्षा दे रहे हैं। सुरक्षा के लिए खेतों में ही किसान अपना डेरा जमा लेते हैं। इन दिनों खेतों में काला सोना का पौधा करीब सवा दो माह का हो गया है। अब किसान खेतों की रखवाली के लिए डेरा डाल देंगे। नई अफीम नीति के अनुसार जिले में इसबार किसानों को 5 व 10 आरी के पट्टे मिले हैं। पिछले साल जिन किसानों ने सीपीएस तरीके से अफीम की खेती की थी। उनमें से जिन किसानों ने 90 किलो प्रति 10 आरी के हिसाब से डोडा विभाग को जमा कराया था, ऐसे किसानों को सीपीएस की बजाय परम्परागत (चीरा लगाकर अफीम निकालने) खेती करने का पट्टा दिया गया है।

नई नीति से मिली किसानों को राहत-

केंद्र सरकार ने नई अफीम नीति वर्ष 2025-26 घोषित की है। नई अफीम नीति से किसानों को राहत मिली है। जो किसान सीपीएस पद्धति से खेती कर रहे थे उनमें से एक बड़े किसान वर्ग के लिए नई अफीम नीति आसान रही है। पिछले साल जिन किसानों ने विभाग को 10 आरी के पट्टे में से 90 किलोग्राम तक डोडा चूरा तुलवाया था उन्हें इस बार छप्पर फाड़ इनाम मिला है। ऐसे किसानों को सीपीएस की बजाय परपरागत खेती करने के लाइसेंस की पात्रता मिल गई है। पिछले साल 67.50 किलोग्राम प्रति 10 आरी के मान से किसानों को नारकोटिक्स विभाग को डोडा जमा कराना था। जिन्होंने इससे कम जमा कराया था उनके एक साल के लिए पट्टे होल्ड कर दिए गए थे।इस साल यह मात्र बढ़ाकर 80 किलोग्राम प्रति 10 आरी कर दिया गया है। आशय यह कि 80 किलोग्राम से कम डोडा (सीपीएस पद्धति से) विभाग को जमा कराने वाले किसानों के नई नीति में आगामी अफीम फसल सत्र के लिए लाइसेंस होल्ड कर दिए जाएंगे। ऐसे किसान झालावाड़ जिले में कई थे। ऐसे करीब 1700 सौ पट्टे इस बार दिए गए है।

फैक्ट फाइल- झालावाड़ में काला सोना की बुवाई

जिले में कुल अफीम पट्टे- 4556

- जिले में चीरेवाले 10 आरी के पट्टे- 1990

- जिले में सीपीएस के 5 आरी के पट्टे- 2566

- जिले में इस बार नए पट्टे मिले- 1700

- जिले में पिछले बार कुल पट्टे थे- 2900

- जिले में अभी तक नपाई हो चुकी- 3000 पट्टों की

किसानों को माना पात्र-

ऐसे किसान जो वर्ष 2023-24 प्रति 10 आरी 67.50 किलोग्राम से कम पोस्ता भूसा की उपज देने के कारण फसल वर्ष 2024-25 के लिए निलंबित किए गए थे उन किसानों को राहत प्रदान करते हुए इस वर्ष अफीम खेती करने के लिए पात्रता दी गई है। वर्ष 1995-96 के बाद के वे सभी अफीम किसान जो पिछले वर्ष की नीतियों में अफीम लाइसेंस के लिए पात्र थे परंतु किसी कारण से लाइसेंस जारी नहीं हुए या फिर अफीम खेती नहीं कर पाए ऐसे सभी किसान और उनके वैध वारिस लाइसेंस के लिए पात्र मानकर उन्हे पट्टा दिया गया है।

पचास फीसदी की नपाई हो चुकी है

जिले में अफीम के 4556 पट्टे है, करीब पचास फीसदी की नपाई हो चुकी है, काम चल रहा है, उम्मीद है, इसी सप्ताह पूरी हो जाएगी। जिले में सीपीएस व गम वाले दोनों तरह के पट्टे है।

अरविन्द सक्सेना, जिला अफीम अधिकारी, झालावाड़।

Published on:
09 Jan 2026 10:54 am
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