
ये संपतियां होगी कुर्क (फोटो: पत्रिका)
Action Under Section 107 Of BNSS: झालावाड़ पुलिस ऑपरेशन शटर डाउन के तहत गिरफ्तार साइबर ठग गिरोह के सरगना और 32 सदस्यों की करोड़ों रुपए की संपत्ति कुर्क कराएगी। इसके लिए अनुसंधान अधिकारी ने झालावाड़ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी दाखिल की है।
गिरोह ने केंद्र और राज्य की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के पोर्टल में सेंधमारी कर फर्जीवाड़ा किया और अपात्रों के नाम पर करोड़ों रुपए की राशि जारी करवा ली थी। इस मामले का गत 23 अक्टूबर को झालावाड़ पुलिस ने खुलासा किया था। अब तक इस गिरोह के 51 सदस्य गिरफ्तार हो चुके हैं। इनमें से 48 के खिलाफ पुलिस न्यायालय में आरोप पत्र भी दाखिल कर चुकी है। अब मामले की अग्रिम जांच स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) करेगी।
झालावाड़ एसपी अमित कुमार ने बताया कि इस प्रकरण में गिरोह के सरगना समेत कुल 51 जनों को गिरफ्तार किया गया। इनमें कई सरकारी महकमों में कार्यरत कार्मिक और ऑपरेटर भी शामिल हैं।
मामले में अनुसंधान अधिकारी भवानीमंडी के पुलिस उप अधीक्षक प्रेम कुमार चौधरी ने गिरोह के 33 जनों की चल और अचल संपत्तियों का ब्यौरा जुटाया। सभी के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 107 के तहत उनकी चल-अचल संपत्ति कुर्क करने के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रार्थना पत्र पेश किया गया है।
दौसा निवासी विक्रम सैनी, रामावतार सैनी, भागचंद सैनी, रोहिताश सैनी, राजूलाल सैनी, झालावाड़ निवासी राजूलाल तंवर, बनवारीलाल तंवर, शिवनारायण तंवर, महेंद्र तंवर, रोडूलाल तंवर, धीरप तंवर, रामबाबू तंवर, राजू तंवर, बिहारीलाल रैदास, बालमुकुंद रैदास, मुरली रैदास, छोटूलाल रैदास, सुजान सिंह लोधा, चंद्रप्रकाश सुमन, कुलदीप कारपेंटर, इंदरमल पारेता, राजेंद्र पारेता, आशिक अली, ललित मीणा, सुनील साहू, बंटी मीणा, धनराज मीणा, परमानंद मीणा, रविंद्र कुमार, धनरूप लोधा और मांगीलाल लोधा।
19 मकान, 8 भूखंड, 3 दुकान सहित मकान, 3 आलीशान निर्माणाधीन मकान, एक दुकान, 2 कृषि भूमि, 16 कार, 18 मोटरसाइकिल, एक ट्रैक्टर और एक सीएनसी फैक्ट्री।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 107 मुख्य रूप से अपराध की आय से अर्जित संपत्ति की कुर्की और जब्ती से संबंधित है। यह नए कानून का महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो पुलिस को अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ने का अधिकार देता है। यदि किसी पुलिस अधिकारी को जांच के दौरान यह विश्वास होता है कि कोई संपत्ति आपराधिक गतिविधियों से बनाई गई है तो वह पुलिस अधीक्षक की अनुमति से उसे कुर्क करने के लिए संबंधित न्यायालय में आवेदन कर सकता है।
Published on:
27 Feb 2026 08:02 am
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