
झालावाड़.राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम ने स्थानांतरण नीति में संशोधन करते हुए प्रशासनिक अनुशासन को सख्त और मानवीय पक्ष को मजबूत किया है।
निगम संचालक मंडल के निर्णयों की अनुपालना में नए दिशा- निर्देश और बिन्दुजोड़े गए है। जिनके तहत दागी कंडक्टरों को बाहर भेजा जाएगा, वहीं बीमार और दिव्यांगों को स्थानांतरण में प्राथमिकता दी जाएगी। इस संबंध में निगम, जयपुर के प्रबंध निदेशक पुरूषोत्तम शर्मा ने आदेश जारी किए है।
नई व्यवस्था के तहत किसी भी कार्मिक का एक स्थान से स्थानांतरण होने के बाद दो वर्ष से पहले उसी स्थान पर पुन: पदस्थापन नहीं किया जाएगा। इससे एक ही स्थान पर तैनाती की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा।
रोडवेज के ऐसे कर्मचारी जिनकी सेनानिवृत्ति में 12 माह या उससे कम समय शेष रहने पर परिचालक की प्रार्थना पर गृह जिले या निकटवर्ती आगार में पदस्थापन संभव होगा। बाद में अनियमितता सामने आने पर पुन: अन्य जोन में स्थानांतरण किया जाएगा। निगम प्रबंधन के अनुसार, संशोधित नीति से प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी, अनुशासन सुदृढ़ होगा और वास्तविक जरूरतमंद कार्मिकों को समय पर राहत मिल सकेगी।
दिव्यांगजन कार्मिकों को प्रतिशत के आधार पर प्राथमिकता दी जाएगी। दिव्यांग महिला को सवोच्च प्राथमिकता, उसके बाद पुरूषदिव्यांग कार्मिक को स्थान मिलेगा। यदि परिवार में कोई अन्य सदस्य भी दिव्यांग है तो उसे भी वरीयता में शामिल किया जाएगा। स्थायी मानसिक, बहु- नि: शक्तता, अंधापन और मूक-बधिर श्रेणिया भी इसमें सम्मिलित है। विधवा, एकल महिला परित्यकता तथा अवयस्क संतानों की देखभाल कर रहे विधुर पुरूष को भी प्राथमिकता मिलेगी।
जिले में कुल चालक- 51
जिले में कुल परिचालक- 44
तीन या अधिक बिना टिकट यात्रा प्रकरण, ड्यूटी के दौरान शराब, मादक पदार्थ सेवन, एवजी व्यवस्था में अनियमितता पाए जाने पर, निलंबन के बाद बहाली होने पर संबंधित परिचालक को अन्य जोन में स्थानांतरित किया जाएगा। तीन साल तक उसी जोन में वापसी नहीं होगी। वहीं पांच वर्ष तक संबंधित आगार गृह जिले में पदस्थापन नहीं मिलेगा।
नई नीति के अनुसार रोडवेज के दागी कार्मिक को जोन से बाहर भेजा जाएगा। वहीं रिमार्क लगने वालों को विभागीय जांच में स्पपेंड होने के बाद दूसरे जोन में भेजा जाएगा। जो तीन साल तक अपने जोन से बाहर ही रहेगा।
Published on:
25 Feb 2026 11:23 am
