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Vasundhara Raje: अचानक भावुक हुईं और फिर छलक पड़े आंसू, आखिर सार्वजनिक सभा में ऐसा क्या हुआ?

राजस्थान की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ वाली पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का एक भावुक रूप शनिवार को झालावाड़ में देखने को मिला। मौका था सांसद दुष्यंत सिंह की जनसंवाद पदयात्रा के तीसरे चरण का, जहां एक कविता ने राजे को अपने परिवार की यादों में डुबो दिया और वे मंच पर ही रो पड़ीं।

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झालावाड़/बकानी। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे शनिवार को अपने निर्वाचन क्षेत्र झालावाड़ के दौरे पर थीं। बकानी के खोयरा गांव स्थित मुक्तेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद जब वे सांसद दुष्यंत सिंह की जनसंवाद पदयात्रा के तीसरे चरण के शुभारंभ समारोह के मंच पर पहुँची, तो एक अप्रत्याशित घटनाक्रम ने उन्हें भावुक कर दिया।

कविता सुन मंच पर रो पड़ीं 'महारानी'

समारोह के दौरान बकानी की एक युवती अदिति शर्मा ने वसुंधरा राजे के सम्मान में एक कविता का पाठ किया। इस कविता में राजे के माता-पिता (राजमाता विजयाराजे सिंधिया और जीवाजीराव सिंधिया), उनके दिवंगत भाई (माधवराव सिंधिया), उनके शासन करने के तरीके और उनकी जनकल्याणकारी योजनाओं का मार्मिक उल्लेख था।

अपने माता-पिता और भाई का नाम सुनकर राजे स्वयं को रोक नहीं पाईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

'मैं आंसू रोक नहीं पाई'

कार्यक्रम के बाद राजे ने इस वाकये का ज़िक्र सोशल मीडिया पोस्ट पर भी किया। इसमें उन्होंने लिखा, 'तीसरे चरण की इस पदयात्रा के अवसर पर अदिति शर्मा ने एक कविता पढ़ी, जिसमें मेरे संपूर्ण परिवार, मेरे शासन करने के तरीके और योजनाओं के बारे में उल्लेख था। माँ राजमाता विजय राजे सिंधिया जी, पिता श्रीमंत जीवाजी राव सिंधिया जी और भाई श्रीमंत माधव राव सिंधिया जी पर लिखी कविता सुन अपने आँसू रोक नहीं पाई। मेरे जीवन में इन तीनों के योगदान को मैं कभी नहीं भूल सकती।आज इनके बिना जीवन बहुत सूना लगता है। मेरे माता-पिता और भाई अब इस दुनिया में नहीं है। जब भी उनकी याद आती हैं, तब मैं लोगों से मिल रहे प्यार में उनको खोजने लगती हूँ और अहसास करती हूँ कि इन्हीं में मेरे खोए हुए परिवारजन है।'

'जनता का प्यार मिलेगा तो समय बदलेगा'

भावुकता के बीच वसुंधरा राजे ने जनता को संबोधित करते हुए एक गहरा राजनीतिक संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में कभी बहुत अच्छा समय होता है और कभी बहुत खराब। राजे ने जोर देकर कहा, "धन-दौलत ही सब कुछ नहीं होता, जनता का प्यार सबसे अनमोल है। अगर जनता का प्यार मिलेगा तो समय जरूर बदलेगा।"

राजे का यह बयान उन अटकलों के बीच आया है जिसमें कहा जा रहा था कि चुनाव न होने के बावजूद इस यात्रा का क्या औचित्य है। राजे ने स्पष्ट किया कि वे इस यात्रा के माध्यम से कुछ लेने नहीं, बल्कि केवल जनता का प्यार और आशीर्वाद लेने आई हैं।

किसानों के दर्द पर मरहम: फसल खराबे का मुद्दा

जनसंवाद यात्रा के दौरान केवल भावनाएं ही नहीं, बल्कि किसानों की समस्याएं भी प्रमुखता से उठीं। पिछले दो दिनों में हुई तेज हवाओं और बेमौसम बारिश के कारण अफीम सहित अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुँचा है।

मुआवजे की मांग: किसानों ने राजे और सांसद दुष्यंत सिंह के सामने विशेष गिरदावरी और शीघ्र मुआवजे की मांग रखी।

भरोसा: सांसद दुष्यंत सिंह ने किसानों को आश्वस्त किया कि वे सरकार से बात कर उचित मुआवजा दिलवाने का प्रयास करेंगे।

झालावाड़: राजे का अभेद्य दुर्ग और परिवार

पूर्व सीएम ने एक बार फिर दोहराया कि पूरा झालावाड़ जिला उनका परिवार है। उन्होंने कहा कि इस चार दिवसीय यात्रा के दौरान जो भी समस्याएं सामने आएंगी, उनका त्वरित समाधान किया जाएगा। इस अवसर पर विधायक गोविंद रानीपुरिया, पूर्व विधायक नरेंद्र नागर और जिलाध्यक्ष हर्षवर्धन शर्मा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।