जनवरी में रोडवेज के झालावाड़ डिपो की रोजाना की औसत आय 4.82 लाख रुपए थी। पुलिस के मुखबिर गिरोह के खुलासे के बाद शनिवार को वह आय दोगुना बढ़कर 9.55 लाख रुपए हो गई।
झालावाड़। ‘बाढ़ ही खा रही खेत’ यह कहावत रोडवेज में सटीक बैठ रही है। जनवरी में रोडवेज के झालावाड़ डिपो की रोजाना की औसत आय 4.82 लाख रुपए थी। पुलिस के मुखबिर गिरोह के खुलासे के बाद शनिवार को वह आय दोगुना बढक़र 9.55 लाख रुपए हो गई। यह नकद जमा राशि है। एक दिन में आय में इजाफा देखकर अधिकारी भी हैरान हैं। जनवरी में डिपो की कुल आय करीब एक करोड़ 49 लाख 50 हजार रुपए रही।
पिछले लम्बे समय से रोडवेज घाटे में चल रही है। घाटे का आलम यह है कि कर्मचारियों को समय पर तनख्वाह देना भी मुश्किल हो रहा है। अधिकांश डिपो लक्ष्य से काफी कम आय दे रहे हैं।
झालावाड़ पुलिस ने शनिवार को रोडवेज के कंडक्टरों के मुखबिर एसटीडी गिरोह का भंडाफोड़ किया था। इस गिरोह के लोग विभिन्न जिलों में रोडवेज की फ्लाइंग टीम पर नजर रखते और उसके मूवमेंट के बारे में बसों के कंडक्टरों को सूचना देते। सूचना मिलते ही कंडक्टर बस में बिना टिकट यात्रियों का कम दूरी का टिकट बना देते। इसके बदले में वे कंडक्टर से रोजाना मोटी रकम वसूल रहे थे। इससे रोडवेज को रोजाना 40 से 50 फीसदी तक आय की चपत लग रही थी।
जैसे शुक्रवार को पुलिस ने विभिन्न जिलों से मुखबिर गिरोह के आठ सदस्यों को पकड़ा। पूरे रोडवेज में हडक़म्प मच गया। रोजाना बिना टिकट यात्रा कराने वाले कंडक्टर और बस सारथी शनिवार को सचेत रहे। कब और कहां पुलिस और फ्लाइंग टीम उन्हें दबोच ले, इस डर से उन्होंने बस में ईमानदारी से सभी यात्रियों के टिकट बनाए।
रोडवेज के डिपो में रोजाना का कलेक्शन अगले दिन जमा होता है। जनवरी में झालावाड़ डिपो का मासिक औसत कलेक्शन 4.82 लाख रुपए प्रतिदिन आ रहा था, वह एक ही दिन में शनिवार को बढक़र 9.55 लाख रुपए हो गया। पुलिस कार्रवाई से पहले शुक्रवार को 5 लाख 49 हजार और गुरुवार को 4 लाख 19 हजार रुपए जमा हुए थे। कार्रवाई से पहले पिछले माह सबसे ज्यादा आय 6 जनवरी को करीब 6.99 लाख रुपए और सबसे कम 18 जनवरी को 3.35 लाख रुपए हुई थी।
एसटीडी गिरोह का सरगना झालावाड़ नगर परिषद का निर्दलीय पार्षद नरेन्द्र सिंह राजावत रोडवेज का बर्खास्त कर्मचारी है। नरेन्द्र ने साथियों के साथ 18 नवम्बर 2013 को बस स्टैण्ड सर्कल पर मोहनिश पर फायरिंग कर दी थी। जांच के बाद रोडवेज ने नरेन्द्र को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। उसने रोडवेज में परिवीक्षा काल में 19 माह तक सेवाएं दी थी।
नरेन्द्र की कुछ साल पहले झालावाड़ डिपो के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक के साथ अच्छी सांठगांठ भी रही। यह मुख्य प्रबंधक नरेन्द्र के साथ अक्सर कार में घूमता रहता था। उस दौरान नरेन्द्र का रोडवेज में इतना दबदबा था कि वह बसों में पसंद के कंडक्टरों की ड्यूटी लगवाता था। मुख्य प्रबंधक ने नरेन्द्र के जरिए अच्छी कमाई वाले रूटों पर लगाने के बदले कंडक्टरों से मासिक बंधी के रूप में भारी रकम वसूली। शिकायत के बाद मुख्यालय ने इस मुख्य प्रबंधक को हटाकर अन्य जगह स्थानान्तरित कर दिया।