झालावाड़ झालरापाटन से झालावाड़ लौट रहे पुलिस अधीक्षक अमित कुमार गुरुवार को खुद राहतवीर बन गए। अपनी दो मासूम बेटियों को स्कूल से लेकर लौटते समय एक व्यक्ति मोटरसाइकिल दुर्घटना में घायल हो गया। वहां से गुजर रहे एसपी अमित कुमार की उन पर नजर पड़ी तो तत्काल तीनों को अपनी गाड़ी में बिठाया और […]
झालावाड़ झालरापाटन से झालावाड़ लौट रहे पुलिस अधीक्षक अमित कुमार गुरुवार को खुद राहतवीर बन गए। अपनी दो मासूम बेटियों को स्कूल से लेकर लौटते समय एक व्यक्ति मोटरसाइकिल दुर्घटना में घायल हो गया। वहां से गुजर रहे एसपी अमित कुमार की उन पर नजर पड़ी तो तत्काल तीनों को अपनी गाड़ी में बिठाया और एसआरजी अस्पताल में लाकर उपचार कराया। तीनों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
जानकारी के अनुसार झालरापाटन के गिंदौर निवासी हजारीलाल अपनी बेटी अक्षिता [7] और अक्षिदा [6] को स्कूल से लेकर मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे। झालावाड़ रोड पर एक अन्य मोटरसाइकिल पर आ रहे दो युवकों ने उनकी गाड़ी को टक्कर मार दी। टक्कर से तीनों सडक़ पर गिर गए और लहुलूहान हो गए। उसी समय वहां से गुजर रहे एसपी अमित कुमार की उन पर नजर पड़ी तो उन्होंने अपनी कार रोकी और तीनों घायलों को अपनी गाड़ी में बिठाकर सीधे एसआरजी अस्पताल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अस्पताल में चिकित्सकों को घायलों को लेकर आने की सूचना दे दी। तीनों को इमरजेंसी में ले जाकर उपचार कराया गया।
गौरतलब है कि झालावाड़ में गत सितम्बर में पुलिस, प्रशासन और परिवहन विभाग ने राहतवीर योजना शुरू की है, जिसमें सडक़ हादसे में किसी घायल को तत्काल अस्पताल पहुंचाने पर हर माह ऐसे राहतवीर लोगों को सम्मानित किया जाता है। उन्हें प्रशंसा पत्र के साथ ही कुछ न कुछ उपहार या स्मृति चिंह भेंट किए जाते है। जिले में दिसम्बर तक कुल 41 राहतवीरों का सम्मान किया गया है। सितम्बर में 10,अक्टूबर में 7, नवम्बर में 13 और दिसम्बर में 11 जनों को राहतवीर योजना में सम्मानित किया।
इसके अलावा केन्द्रीय परिवहन मंत्रालय ने राहवीर योजना शुरू कर रखी है, जिसमें सडक़ हादसे में गंभीर घायल को गोल्डन आवर [दुर्घटना के बाद पहले एक घण्टे के भीतर] में अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपए का नकद पुरस्कार दिया जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ख दस राह वीरों को एक लाख रुपए, प्रमाण पत्र और ट्रॉफी से सम्मानित किया जाता है। एक व्यक्ति साल में अधिकतम पांच बार पुरस्कार के पात्र हो सकता है। इस योजना के तहत घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई से मुक्त रखा गया है।