रात के समय खुले आकाश के नीचे सड़क के किनारे स्ट्रीट लाइट के सहारे लगभग 20 से 25 परिवार गुलदस्ते बनाने का काम करते हैं।
झांसी. खुले आकाश के नीचे जिंदगी गुजर करने वाले परिवार के कुछ लोग इस दीपावली पर मिठाइयों और दीयों की व्यवस्था के लिए बेहतरीन गुलदस्ते बनाकर बेचने का काम कर रहे हैं।सड़क के किनारे, खुले आकाश के नीचे, सर्किट हाउस के निकट खाली पड़े प्रदर्शनी मैदान में पन्नी के सहारे घर बनाकर रहने वाले लोग बेहतरीन गुलदस्तों को बनाने और बेचने के काम में जुटे हैं। इस काम में मुख्य भूमिका बच्चों और महिलाओं की है जबकि परिवार के पुरुष सदस्य गुलदस्ता बनाने का सामान मुंबई या गुजरात से मंगाते हैं। दीपावली से पहले इन परिवारों को उम्मीद रहती है कि गुलदस्ते खूब बिकेंगे और उस बिक्री से जुटने वाले रूपये से परिवार के लोग मिलजुलकर दीपावली मनाएंगे।ये लोग पन्नी के घर में दीये जलाएंगे और बच्चों को कुछ मिठाई खिलाएंगे।
खुले आकाश के नीचे रहते हैं लोग
आठ साल की बिंदिया पिछले कई दिनों से गुलदस्ते बनाने और उसे बेचने में अपनी मां का सहयोग कर रही है। बिंदिया की तरह और भी बच्चे हैं जो अपने माता-पिता का सहयोग करते हैं। रात के समय खुले आकाश के नीचे सड़क के किनारे स्ट्रीट लाइट के सहारे लगभग 20 से 25 परिवार इस तरह गुलदस्ते बनाने का काम करते हैं। बिंदिया की तरह गुज्जर, निशा, संध्या, विद्या, मनीषा जैसे कई बच्चे और बच्चियां हैं जो अपने परिवार के सपनों के साथ अपने सपनों को जोड़ते हुए रात में जागकर गुलदस्ते बनाने के काम में जुटे दिखाई देते हैं। सपना भी कोई बहुत बड़ा नहीं। बस एक छोटा सा सपना। दीपावली के दिन कुछ दीये जलाने और मिठाई खरीदने भर के पैसे जमा हो सकें।
गुलदस्ता खरीदने के लिए लोगों को किया जाएगा प्रेरित
सड़क के किनारे रहने वाले इन परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा की मुहिम चला रहे झांसी पुलिस के कांस्टेबल जीतेन्द्र यादव ने बच्चों के बनाये गुलदस्तों की बिक्री के लिए मदद करने का वादा किया है। जीतेन्द्र कहते हैं कि उन्होंने कई सामाजिक संगठनों से बात कर उन्हें इन बच्चों के बनाये गुलदस्तों की जानकारी दी है। वे इन बच्चों के बीच ऐसे सामाजिक संगठनों के लोगों को लेकर आएंगे और अपील करेंगे कि इनके बनाये गुलदस्ते जरूर खरीदें। यह गुलदस्ता न सिर्फ खरीदने वाले लोगों के घर की खूबसूरती बढ़ाएगा, बल्कि इन गरीब परिवारों की दीपावली को भी कुछ रोशन कर सकेगा।