World Polio Day 2018: इस तरह से फैलता है रोग, रखें ये सावधानी
झांसी। दो बूंद जिंदगी की, इस कथन से तो बात पूरी तरह साफ हो जाती है कि बात पोलियो की हो रही है। प्रत्येक वर्ष 24 अक्टूबर को विश्व पोलियो दिवस मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन पोलियो वैक्सीन का अविष्कार करने वाले जोनास सॉक का जन्म इसी महीने में हुआ था। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य पोलियो के प्रति जागरूकता फैलाना है। इस वर्ष विश्व पोलियो दिवस की थीम ‘एंड पोलियो नाउ’ रखी गयी है।
भारत में पोलियो का शुरूआती दौर में बहुत अधिक प्रभाव था परन्तु भारत सरकार द्वारा चलाये गये कई पोलियो मुक्त अभियानों के कारण पोलियो से छुटकारा प्राप्त हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2012 में भारत को पोलियो से ग्रस्त देशों की सूची से हटा दिया था और वर्ष 2014 में भारत को पोलियो मुक्त देश घोषित कर दिया था। भारत के कुछ पड़ोसी देश जैसे अफगानिस्तान, नाइजीरिया और पाकिस्तान अब भी पोलियो से गस्त हैं। पोलियो 200 में से 1 मामले में यह वायरस कभी न ठीक होने वाला पैरालाइसिस (लकवा) कर देता है।
इन देशों को छोड़कर बाकी पोलियो मुक्त
डब्ल्यूएचओ के अनुसार 2017 में, दुनिया भर के 85% शिशुओं ने पोलियो टीका की तीन खुराक प्राप्त की। वैश्विक उन्मूलन के लिए लक्षित अफगानिस्तान, पाकिस्तान और नाइजीरिया को छोड़कर सभी देशों में पोलियो से मुक्त कर दिया गया है। ग्लोबल पोलियो इरेडिकेशन इनीशिएटिव के अनुसार ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) आजीवन पोलियो पक्षाघात (लकवा) के खिलाफ बच्चों की सुरक्षा में बेहद सुरक्षित और प्रभावी है। पिछले दस वर्षों में ओपीवी की 10 अरब से अधिक खुराक दुनिया भर में लगभग तीन अरब बच्चों को दी गई है। पोलियो के 16 मिलियन से अधिक मामलों को रोका गया है, और 2013 तक, जीपीईआई ने दुनिया भर में पोलियो को 99% कम कर दिया था। यह वैश्विक पोलियो उन्मूलन प्राप्त करने के लिए उपयुक्त टीका है।
ये है अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग
एसीएमओ एवं जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा एके त्रिपाठी ने बताया कि पोलियोमाइलाइटिस (पोलियो) अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग है, जो पूरे शरीर को प्रभावित करता है। या संक्रामक मुख्यत: छोटे बच्चों में, जो पांच वर्ष से कम आयु को प्रभावित करता है। विषाणु मुख्यत: मल-मौखिक मार्ग (ओरल-फीकल रूट) के माध्यम से या किसी सामान्य वाहन, उदाहरण के लिए दूषित पानी या भोजन, द्वारा व्यक्ति से व्यक्ति में फैलता है, और आंत में दोगुना, चौगुना आदि रूप बढ़ता जाता है, इसके बाद तंत्रिका तंत्र में पहुंचकर शरीर में कई हिस्सों जैसे हाथों, पैरों आदि में लकवा की स्थिति पैदा करता है। उन्होंने बताया कि इसी को ध्यान में रखते हुये पोलियो मुक्त देश होने के बावजूद पल्स पोलियो कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके अलावा हर साल 4 से 5 चक्रों में घर-घर जाकर, स्वास्थ्य केन्द्रों, बस स्टॉप, रेल्वे स्टेशन आदि जगहों पर पोलियो वैक्सीन पिलाई जा रही है। साथ ही “हर बच्चा-हर बार” और “दो बूंद ज़िंदगी” जैसे स्लोगन के द्वारा लोगों को जागरूक किया जा रहा है, ताकि बच्चों को इस बीमारी से बचाया जा सके क्योंकि जब तक एक भी बच्चा पोलियो से ग्रसित रहेगा, दुनियाभर में इस बीमारी के फैलने का खतरा भी बना रहेगा।
लक्षण
प्रारंभिक लक्षण बुखार, थकान, सिरदर्द, उल्टी, गर्दन की अकड़न और अंगों में दर्द है। दो सौ संक्रमणों में से एक संक्रमण अपरिवर्तनीय लकवा या विकलांगता आमतौर पर पैरों के अलावा शरीर के किसी भी अंगों में उत्पन्न होता है। वहीं श्वास की मांसपेशियों प्रभावी रूप से कार्य नहीं करती हैं जिस वजह से विकलांगता आने लगती है।
रोकथाम
इसका कोई उपचार नहीं है लेकिन सुरक्षित एवं प्रभावी टीके उपलब्ध हैं। प्रतिरक्षण के माध्यम से पोलियो को रोका जा सकता है। पोलियो का टीका कई बार दिया जाता है। यह हमेशा बच्चे के जीवन की सुरक्षा करता है। पोलियो खत्म करने की रणनीति है कि जब तक रोग का संचारण समाप्त न हो जाए तब तक हर बच्चे को टीकाकरण के द्वारा संक्रमित होने से बचाया जाये। ओपीवी यानि ओरल पोलियो वैक्सीन संस्थागत प्रसव के दौरान इसे जन्म के समय मुख से दिया जाता है, फिर प्राथमिक तीन खुराकों को छह, दस और चौदह सप्ताह और एक बूस्टर खुराक सोलह से चौबीस महीने की आयु में दी जाती है। फिर 5 साल की उम्र में दूसरा बूस्टर दिया जाता है।