
झुंझुनूं. नवसंवत्सर का वैशाख दूसरा महीना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख में ही त्रेतायुग का प्रारंभ हुआ था। स्कंद पुराण में इस माह का काफी महत्व है। वैशाख को माधवमास भी कहा जाता है, जिसका मतलब है भगवान श्री कृष्ण का माह। भगवान श्री कृष्ण का दूसरा नाम माधव है। पंडित दिनेश मिश्रा ने बताया कि वैशाख के पावन महीने में जल दान का विशेष महत्व है। पक्षियों के लिए भी परिंडे और शुद्ध पानी की व्यवस्था करनी चाहिए। पशुओं के लिए पानी की खेली बनाकर उसमें ठंडा पानी डालना चाहिए और मनुष्यों के लिए भी जगह जगह पर ,प्याऊ,ठंडे पानी की मशीन आदि अपने पूर्वजों की याद में लगानी चाहिए। वर्तमान में बढ़ते शहरीकरण और सौंदर्यकरण के कारण शहर में मूकप्राणियों के लिए कोई कही भी जल की व्यवस्था नहीं है। इस महीने में गर्मी ज्यादा तेज होती है इसलिए इस माह में जल दान का विशेष महत्व है।
श्रद्धालु अपने पूर्वजों की याद में जल दान करें ठंडे जल की मशीन लगाएं। स्कंद पुराण के अनुसार इस माह में जल दान का सर्वाधिक महत्व है। अर्थात अनेकों तीर्थ करने से जो फल प्राप्त होता है वह केवल वैशाख मास में जलदान करने से प्राप्त हो जाता है। इसके साथ-साथ भगवान विष्णु, परशुराम की पूजा करने के साथ बांके बिहारी जी की दर्शन करने से अनेक कष्टों से छुटकारा मिल जाता है।
कई व्रत व त्योहार आएंगे
मिश्रा ने बताया कि इसी माह में अक्षय तृतीया, बरुथिनी और मोहिनी एकादशी, प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि, वैशाख अमावस्या और वैशाख पूर्णिमा जैसे महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार आएंगे। वैशाख माह में गंगा स्नान के साथ दान करने से कई गुना अधिक फलों की प्राप्ति होती है।