
जोधपुर . पूरे विश्व में महिलाओं के लिए भयावह बनी स्तन कैंसर की बीमारी पुरुषों में भी फैल रही है। जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल स्थित रेडियोथैरेपी विभाग में पुरुष स्तन कैंसर रोगी सामने आ रहे हैं। बड़ी बात यह है कि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के प्रति ५० से ८० फीसदी तक जागरुकता आ चुकी है, लेकिन पुरुषों में जागरुकता नहीं आई है। ये रोगी जोधपुर के साथ ही पाली, सिरोही, जालोर बाड़मेर व जैसलमेर जिले से आ रहे हैं।
ज्यादातर पुरुषों को जानकारी नहीं
ब्रेस्ट कैंसर को ज्यादातर लोग महिलाओं की बीमारी समझते हैं। हालांकि इसकी शुरुआत पुरुषों में ५० वर्ष की उम्र के बाद होती है। ६० और ७० वर्ष की आयु में यह बीमारी होने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो पुरुषों को ज्यादा तकलीफ होने पर ही बीमारी के बारे में पता लगता है।
हर साल पांच रोगी
एक आकलन के अनुसार चार सौ महिलाओं में से महज एक पुरुष को ब्रेस्ट कैंसर का खतरा रहता है। मथुरादास माथुर अस्पताल के रेडियोथैरेपी विभाग में आउटडोर सालाना १५ सौ से दो हजार के बीच रहता है। यहां हर साल पांच पुरुष रोगी ब्रेस्ट कैंसर के सामने आते हैं। यहां गत ३५ सालों में अस्पताल में २०० रोगी सामने आए हैं।
इसलिए होता है पुरुषों को भी ब्रेस्ट कैंसर
एक विशेष प्रकार का जींस ब्राका-२ होता है, जो पुरुषों में कैंसर करता है। इसके होने के मुख्य कारण अब तक स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन संभवत हार्मोंन की गड़बडि़यों के कारण होता है। मौजूदा दौर में कुछ मेल ब्रेस्ट कैंसर के लिए ब्राका-२ में परिवर्तन को ही जिम्मेदार माना गया है।
१९८२ से आ रहे मामले
डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज में रेडियोथैरेपी विभाग १९८२ में शुरू हुआ था। उस समय भी पुरुषों में स्तन कैंसर के मामले सामने आने शुरू हो गए थे। हालांकि यहां रोगी आते हैं, एक बार पूरा ट्रीटमेंट लेते हैं और सही होकर चले जाते है। उसके बाद में उनसे संपर्क नहीं हो पाता। हरेक रोगी को इलाज पूरा होने के बाद भी १२ माह तक चिकित्सक के संपर्क में रहना चाहिए।
डॉ. प्रदीप गौड़, विभागाध्यक्ष, रेडियोथैरेपी विभाग, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज