
जोधपुर। जल प्रबंधन को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है, जो इस साल से नजर आएगा। मानसून पूर्व इसके लिए तैयारियां भी शुरू कर दी गई है। 23 साल बाद बांधों और तालाबों का नियंत्रण अब गांवों की सरकार यानी पंचायतीराज संस्थाओं से हटाकर फिर से जल संसाधन विभाग को सौंप दिया गया है। इसके साथ ही अब इन जलाशयों का पानी वितरण, आय और रखरखाव पूरी तरह विभाग के जिम्मेदार होगा।
गौरतलब है कि वर्ष 2003 में इन बांधों और तालाबों को जल संसाधन विभाग से अलग कर पंचायतीराज विभागों को सौंपा गया था। उस समय उद्देश्य स्थानीय स्तर पर प्रबंधन को मजबूत करना था, लेकिन नियमित बजट के अभाव में कई बांध और तालाब जर्जर हो गए। ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार मरम्मत और संसाधनों की कमी की शिकायतें सामने आती रही है। जोधपुर संभाग में करीब 2000 छोटे-बड़े बांध और तालाब है, जबकि अकेले जोधपुर जिले में 144 जलाशयों का अब विभाग को स्थानांतरण किया गया है।
इन सभी के रखरखाव और जल प्रबंधन की जिम्मेदारी अब केंद्रीकृत रूप से तय होगी। हालांकि, यह प्रक्रिया पूरी तरह आसान नहीं रही। वर्ष 2025 में इन जलाशयों के हस्तांतरण के आदेश जारी कर दिए गए थे और जुलाई-अगस्त तक कागजी कार्रवाई भी पूरी हो गई थी, लेकिन बजट के अभाव में काम अटक गया। विभाग को जलाशयों का कब्जा तो मिल गया, पर रख-रखा के लिए राशि नहीं मिली।
राज्य बजट में इस बार इन बांधों और तालाबों के रखरखाव के लिए 300 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद अभी तक जिला और जलाशयवार बजट का आवंटन नहीं हो पाया है. जिससे जमीनी स्तर पर काम शुरू होने में देरी बनी हुई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इस बार समय पर सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि गर्मी के मौसम में जल संकट से निपटने के लिए इन जल स्रोतों का बेहतर उपयोग हो सके।
-वर्ष 2003 में पंचायतीराज को सौंपे गए थे बांध-तालाब
-जोधपुर संभाग में करीब 2000 जलाशय इस दायरे में
-जोधपुर जिले में 144 बांध व छोटे तालाब स्थानांतरित
-2025 में हस्तांतरण आदेश, बजट में हुई देरी
-2026 के बजट में 300 करोड़ रुपए का प्रावधान
हमारे यहां इन बांधों व जलाशयों की मैपिंग का काम हो चुका है। बजट इस बार बढ़ा हुआ मिल सकता है। इसके बाद रखरखाव व अन्य कार्य किए जाएंगे।
-अरुण कुमार सिडाना, मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग जोधपुर।