
मोबाइल पर धमकी देकर मोटरसाइकिल को आग लगाई
जोधपुर . बासनी थानान्तर्गत मधुबन हाउसिंग बोर्ड में मोबाइल पर धमकियां देने के बाद कुछ युवकों ने घर के बाहर खड़ी बाइक को बुधवार देर रात आग लगा दी। आगजनी करने वालों का सुराग नहीं लग पाया है।पुलिस के अनुसार मधुबन हाउसिंग बोर्ड निवासी वीरेन्द्र पुत्र चूनाराम मेघवाल के मोबाइल में रात ग्यारह बजे किसी व्यक्ति का फोन आया और गाली-गलौच की। फिर वह उसका घर जलाने की धमकी देने लगा। फिर वीरेन्द्र ने फोन काट दिया। कुछ देर बाद फोन करने वालों ने घर के बाहर खड़ी मोटरसाइकिल को आग लगा दी। आवाज होने पर वह बाहर आया, लेकिन तब तक आग लगाने वाले भाग निकले। फिर उसने आग बुझाई। वह थाने पहुंचा और एससी-एसटी एक्ट और जान से मारने की धमकी देने व आगजनी का मामला दर्ज कराया। मामले की जांच सहायक पुलिस आयुक्त को दी गई है। मोबाइल नम्बर के आधार पर पुलिस ने युवकों की पहचान कर पकडऩे के लिए कई जगह तलाशी ली, लेकिन वो हाथ नहीं आए।
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रिश्वत लेने के आरोपी पटवारी को तीन साल कठोर कारावास
भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के विशिष्ट जिला न्यायालय के न्यायाधीश रामसुरेश प्रसाद ने बुधवार को 2012 में बालेसर में पदस्थापित तत्कालीन पटवारी ओमप्रकाश को पांच हजार रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में तीन वर्ष का कठोर कारावास तथा 14 हजार रुपए का जुर्माने की सजा सुनाई। राज्य सरकार की ओर से सहायक निदेशक अभियोजन एनके साखंला ने पैरवी की। बचाव पक्ष ने आरोपी के निर्दोष होने की दलीले दीं। न्यायाधीश ने आरोपी पटवारी ओमप्रकाश को पीसी एक्ट की धारा 7 के तहत 2 वर्ष तथा एक अन्य धारा में तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। आरोपी पर 14 हजार रुपए का जुर्माना जमा करवाने का भी आदेश दिया।
यह था मामला
27 मार्च 2012 को पटवारी ओमप्रकाश ने 15 बीघा खेत की जमीन के नामांतरण के लिए बालेसर निवासी भीखसिंह से पांच हजार रुपए रिश्वत की मांग की। पटवारी ने परिवादी से दो हजार रुपए उसी समय ले लिए। इसके बाद तीन हजार रुपए 9 जुलाई 12 को लेते हुए एसीबी जोधपुर ने ओमप्रकाश को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।
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एक साल सजा व 4.50 लाख जुर्माना
एन आई एक्ट के विशिष्ट महानगर मजिस्ट्रेट संख्या 6 की पीठासीन अधिकारी आरती माहेश्वरी ने एक ही व्यक्ति द्वारा दो चेक के अनादरण मामले में परिवादी को चार लाख पचास हजार रुपए अदा करने तथा एक साल के कारावास की सजा सुनाई। परिवादी मण्डोर रोड निवासी मुकेश चौधरी ने अधिवक्ता नरेश छंगाणी के मार्फत पेश परिवाद में बताया गया कि भदवासिया रोड निवासी मोहम्मद शाहिद पुत्र अब्दुल मजीद ने व्यापारिक जान-पहचान के चलते तीन लाख रुपए उधार लिए। आरोपी ने दो चेक एक लाख तथा दो लाख के चेक दिए। बैंक में दोनों चेक अनादरित हो गए। परिवादी ने कोर्ट में दो अलग-अलग परिवाद पेश किए। न्यायालय ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद आरोपी को सजा सुनाई।
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फर्जी दस्तावेज से लाखों का ऋण लेने का आरोपी गिरफ्तार
फैक्ट्री व भूखण्ड के फर्जी दस्तावेज गिरवी रखकर बैंक ऑफ बड़ौदा से पचास लाख रुपए का ऋण लेने वाले व्यक्ति को शास्त्रीनगर थाना पुलिस ने नौ साल बाद बुधवार को धौलपुर से गिरफ्तार किया। थानाधिकारी अमित सिहाग ने बताया कि प्रकरण में मूलत: आगरा (यूपी) में लोहा मण्डी में जगदीशपुरा रोड हाल जयपुर में सोडाला थानान्तर्गत रामनगर विस्तार योजना निवासी पुष्पेन्द्र भार्गव (४१) पुत्र रामकिशोर जाटव को गिरफ्तार किया गया है। उसकी धरपकड़ के लिए जयपुर के साथ आगरा व यूपी के कई अन्य जिलों में तलाशी ली गई थी। उसके धौलपुर होने की सूचना पर पुलिस ने वहां दबिश दी और स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपी पुष्पेन्द्र को पकड़ लिया। उसे गुरुवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
दूसरे की फैक्ट्री-भूखण्ड के दस्तावेज रखे ऋण
पुलिस का कहना है कि जेएनवीयू के न्यू कैम्पस परिसर में बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा के तत्कालीन प्रबंधक रामलाल यादव ने वर्ष २००९ में फर्जी दस्तावेज से पच्चीस लाख रुपए ऋण लेने के दो मामले दर्ज करवाए थे। आरोपी पुष्पेंद्र ने किसी अन्य की फैक्ट्री व भूखण्ड के दस्तावेज बनाकर पच्चीस लाख का ऋण लिया था। मामला दर्ज होने के बाद जांच में बैंक के तत्कालीन प्रबंधक रामलाल यादव की भूमिका भी सामने आई थी। पुलिस ने मैनेजर यादव सहित तीन-चार को गिरफ्तार किया था, जबकि पुष्पेन्द्र गायब हो गया था।