
धुंधाड़ा. धुंधाड़ा-समूजा मार्ग पर लूणी नदी पर पुरानी रपट की जगह रेंटेड कॉजवे निर्माण का काम अंतिम चरण में चल रहा है। दो वर्ष पूर्व बरसात में रपट कई जगह क्षतिग्रस्त हो गई थी। जोधपुर, बाड़मेर, जालोर व पाली जाने-आने वाले क्षेत्र के सैकड़ों गांवों लोगों को हो रही परेशानी के बाद विधायक जोगाराम पटेल के प्रयास से सरकार ने रेंटेड कॉजवे के लिए सवा सात करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे।
सार्वजनिक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता मोहम्मद शरीफ भाटी के अनुसार रेंटेड कॉजवे के लिए नदी में १२ सौ एमएम (करीब सवा मीटर) व्यास के छह सौ पाइप नदी में डाले गए हैं। इन पाइप को बजरी से पैक किया गया है। भाटी ने कहा कि इस डिजाइन से कॉजवे निर्माण का फायदा यह होगा कि नदी में ज्यादा पानी आने की स्थिति में पानी कॉजवे के ऊपर से निकल जाएगा। इससे कॉजवे को कोई नुकसान नहीं होगा।
ग्रामीणों का कहना है कि पाइप के ऊपर बजरी डालकर सीसी कार्य किया जा रहा है। इससे नदी में अधिक पानी आने की स्थिति में बजरी बहने का अंदेशा है। सहायक अभियंता भाटी का कहना है कि ग्रामीणों की आशंका सही नहीं है। पाइपों को दीवार से पैक कर बजरी डाली गई है। इसके बाद सीसी कार्य किया जा रहा है। इस काम की मजबूती ग्रेवल के काम से ज्यादा होती है।
लाइफ लाइन है यह मार्ग
जोधपुर, बाडमेर, जालोर व पाली जिलों के सैंकड़ों गांवों के लिए यह रपट लाइफ लाइन मानी जाती है। लूणी नदी पर पहली बार सन् १९९४ में तत्कालीन विधायक और अल्पबचत राज्यमंत्री जसवंतसिंह विश्नोई के प्रयास से रपट बनी थी। दो वर्ष पूर्व भीषण बरसात में यह रपट कई जगह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। ‘पत्रिका’ ने रपट क्षतिग्रस्त होने से लोगों को हो रही परेशानी को प्रमुखता से उजागर किया था। इसके बाद विधायक जोगाराम पटेल ने राज्य सरकार से इस रपट के लिए सवा सात करोड़ रुपए मंजूर कराए।
इनका कहना है
‘रेंटेड कॉजवे के लिए डाले गए पाइप को मजबूती देने के लिए दीवार बनाई गई है। दीवार के बीच बजरी डालकर पाइप पैक किए गए हैं। दीवार पर प्लास्टर भी कराया जाएगा। नदी में ज्यादा पानी आने की स्थिति में भी कॉजवे की मजबूती प्रभावित नहीं होगी।
मोहम्मद शरीफ भाटी, सहायक अभिंयता, सार्वजनिक निर्माण विभाग