हाइकोर्ट तो क्या सुप्रीम कोर्ट को भी एक लंबित एक्ट के प्रावधानों की गाइड लाइन जारी करने की शक्ति नहीं है।
RP BOHRA/जोधपुर. धर्मपरिवर्तन कर मुस्लिम से शादी करने के मामले में सुनवाई पूरी। निर्णय सुरक्षित। जस्टिस गोपाल कृष्ण व्यास की खंड पीठ में पहले अप्रार्थी अधिवक्ता महेश बोड़ा ने याची की ओर से गाइड लाइन जारी करने की मांग का विरोध करते हुए कहा की हाइकोर्ट तो क्या सुप्रीम कोर्ट को भी एक लंबित एक्ट के प्रावधानों की गाइड लाइन जारी करने की शक्ति नहीं है। जबकि याचिका कर्ता के अधिवक्ता वरिष्ठ अधिवक्ता मगराज सिंघवी ने रेजॉइंडर पेश करते हुए कहा कि देश की आजादी के बाद से धर्मपरिवर्तन जैसे मुद्दे पर एक्ट बनाने का इंतजार कर रहे है। आखिर कब बनेगा। तब तक क्या न्यायपालिका मूकदर्शक बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी सामाजिक या धार्मिक समस्या के बारे में देश का कोई भी कोर्ट गाइड लाइन जारी करने में सक्षम है।
युवती बोली, अगर हिन्दू धर्म स्वीकारे तो शादी को तैयार
युवक के साथ भागने वाली युवती ने पूछताछ में माना कि वह घरवालों के साथ नहीं रहता चाहती है। वह मोहसिन के साथ रह सकती है, लेकिन उसके लिए मोहसिन को हिन्दू धर्म स्वीकार करना होगा। तब वह उससे शादी कर सकती है और उसके साथ रहने को तैयार होगी।
कल ये हुआ था सुनवाई में
राजस्थान हाईकोर्ट में धर्म परिवर्तन मामले में मंगलवार को बहस पूरी नहीं हो पाई। जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास व जस्टिस विरेन्द्रकुमार माथुर की खंडपीठ में याचिकाकर्ता चिराग सिंघवी की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण के इस मामले में करीब एक घंटे तक अप्रार्थी के अधिवक्ता ने पक्ष रखा। सरकार की ओर से ओर अतिरिक्ता महाधिवक्ता शिवकुमार व्यास ने पूर्व में रखे गए अपने जवाब को ही अंतिम मानते हुए नया जवाब देने से इनकार कर दिया।
धर्म परिवर्तित कर मुस्लिम युवक से शादी करने वाली लड़की पायल उर्फ आरिफा के शौहर (अप्रार्थी संख्या-२) की ओर से जवाब पेश करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता महेश बोड़ा ने कहा कि जब तक राज्य सरकार की ओर से बनाया हुआ किसी तरह का कानून मौजूद नहीं है, तब तक इस तरह की शादी के बारे में किसी तरह का निर्णय नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कल प्रार्थिया के अधिवक्ता की ओर से पेश की गई दलीलों को काटते हुए कहा कि यह आवश्यक नहीं है कि धर्म परिवर्तन करने अथवा नाम या ***** परिवर्तन करने से पहले उस बारे में सूचना प्रकाशित कराई जाए। यह उसकी इच्छा पर निर्भर है।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम शरीयतों के मुताबिक किसी अन्य धर्म की युवती की उनके धर्म में शादी करने से पहले कलमा पढ़ाया जाकर धर्म परिवर्तन किया जाता है, बाद में निकाह किया जाता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हाल ही केरल हाईकोर्ट के इस तरह के मामले किए गए निर्णय को खारिज करने का उदाहरण देते हुए कहा कि जब लड़की बालिग है, तो उसे कहीं भी रहने का संवैधानिक अधिकार मिला हुआ है। समय अभाव के कारण सुनवाई पूरी नहीं हो सकी, अब आगे की सुनवाई बुधवार को दो बजे बाद होगी। अप्रार्थी की बहस पूरी होने के बाद बुधवार को दुबारा प्रार्थी के अधिवक्ता की ओर से रिजोंडर (जवाब का जवाब) पेश किया जाएगा।