28 अप्रैल 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rajasthan: 12 जिलों की प्यास बुझाने की दिशा में बड़ा कदम, उत्तरी नदियों का पानी पश्चिमी राजस्थान लाने की तैयारी तेज

Indus Water Treaty: पश्चिमी राजस्थान के 12 जिलों तक उत्तरी भारत की नदियों का अतिरिक्त पानी पहुंचाने की मांग तेज हो गई है। इससे क्षेत्र में पेयजल संकट और खेती-किसानी की स्थिति में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

2 min read
Google source verification
Indus Water Treaty

एआई तस्वीर

जोधपुर। सिंधु जल समझौते के तहत रोके गए उत्तरी भारत के जल को पश्चिमी राजस्थान तक पहुंचाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। यह पानी जोधपुर सहित 10 जिलों में पेयजल व खेती-किसानी की तस्वीर बदल सकता है। हाल ही में मुख्यमंत्री के ओसियां दौरे पर इसे लेकर एक बार फिर मंथन हुआ। अब जल संसाधन विभाग में डीपीआर तैयार करवाने को लेकर उच्च स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है।

यह वीडियो भी देखें

प्रस्ताव में घग्गर, यमुना, सतलुज, रावी और अन्य नदियों के अतिरिक्त जल को डायवर्ट कर पश्चिमी राजस्थान तक लाने की व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार कराने की मांग की गई है। साथ ही माही नदी को लूणी से जोड़ने और नर्मदा नहर विस्तार का प्रस्ताव है। पूर्वी राजस्थान के लिए ईआरसीपी जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू हो चुकी है, अब पश्चिमी राजस्थान के लिए भी समान दृष्टि से कार्य होना चाहिए। इसको लेकर 60 से ज्यादा विधायकों ने हस्ताक्षर कर अपने पत्र दिए हैं।

एक डब्ल्यूआरसीपी की प्री-फिजिबिलिटी आ चुकी

जालोर के रास्ते पश्चिमी राजस्थान में गुजरात से पानी लाने के लिए पहले से ही एक डब्ल्यूआरसीपी पर काम शुरू हो चुका है। इसके लिए प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, लेकिन इस रिपोर्ट पर जल संसाधन विभाग ने आपत्ति जताई है। ऐसे में डीपीआर पर काम फिलहाल धीमा है। संभावना है कि डब्ल्यूआरसीपी का यह दूसरा फेज भी प्री-फिजिबिलिटी चरण में जा सकता है।

चरणवार यह हो सकता है काम

  • घग्गर, यमुना, जोजरी व लूणी नदियों के संगम की एक परियोजना बनाकर उसका विस्तार साबरमती लिंक नदी तक किया जा सकता है। पहले चरण में घग्गर नहर परियोजना से वर्षा जल को हनुमानगढ़ जिले से कच्ची नहर बनाकर तथा इंदिरा गांधी व राजीव गांधी लिफ्ट केनाल या अन्य माध्यमों से जोधपुर में जोजरी नदी से मिलाया जा सकता है।
  • दूसरे चरण में यमुना नहर परियोजना के जरिए यमुना से हरियाणा स्थित तेजवाला फीडर से छोड़ा गया वर्षा जल सोनीपत के पास कच्ची नहर बनाकर जोजरी (मीटड़ी) नदी में मिलाया जा सकता है, जिससे पश्चिमी राजस्थान के जिलों में खेती के लिए पर्याप्त नहरी पानी उपलब्ध हो सकेगा।
  • माही नदी को लूणी नदी से जोड़ने के लिए डीपीआर बनाने को पर्याप्त बजट प्रावधान की मांग की गई है।
  • नर्मदा नहर परियोजना का विस्तार करते हुए इसे बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर सहित आसपास के अन्य जिलों तक नहरी पानी पहुंचाने की मांग की गई है।
  • डब्ल्यूआरसीपी के सर्वे के लिए कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर व बीकानेर तथा जेएनवीयू जोधपुर के भूगोल व भूगर्भ विभागों को शामिल किया जा सकता है।

इन जिलों को मिलेगा लाभ

जोधपुर, फलोदी, बाड़मेर, जैसलमेर, बालोतरा, जालोर, सिरोही, पाली, नागौर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ जिलों को इसका लाभ मिल सकता है।

हमने मांग रख दी

ओसियां विधायक भैराराम सियोल ने बताया कि प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री से लेकर प्रदेश के मंत्रियों तक मांग रखी गई है। तकनीकी पक्ष भी रखा गया है। हाल ही में मंच से मुख्यमंत्री से इसके लिए आह्वान किया गया।

उच्च स्तर पर मंथन

जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता अरुण कुमार सिडाना ने बताया कि डब्ल्यूआरसीपी की इस मांग पर उच्च स्तर पर मंथन चल रहा है। यह एक से अधिक प्रदेशों से जुड़ा मामला है, ऐसे में निर्णय भी वहीं से होगा।