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जोधपुर डिस्कॉम में 56 करोड़ की स्मार्ट बिलिंग पर सवाल: मोबाइल-प्रिंटर खराब; फिर भी जवाबदेही नहीं

जोधपुर डिस्कॉम में स्मार्ट बिलिंग पर 56 करोड़ रुपए खर्च किए जाने के बावजूद फील्ड स्तर पर तकनीकी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं।

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जोधपुर

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Santosh Trivedi

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अमित दवे

Jun 14, 2026

Rajasthan Electricity Bill

फोटो: AI

जोधपुर। जोधपुर डिस्कॉम में संचालित स्मार्ट बिलिंग परियोजना पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बावजूद फील्ड स्तर पर तकनीकी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं। टेंडर दस्तावेजों के अनुसार परियोजना के अंतर्गत प्रत्येक नए सब-डिवीजन के लिए 33 एंड्रॉइड स्मार्ट मोबाइल फोन, 33 ब्लूटूथ मोबाइल प्रिंटर, 5 डेस्कटॉप कंप्यूटर, एक मल्टीफंक्शन प्रिंटर तथा अन्य उपकरण उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारी मोबाइल एप्लीकेशन, प्रिंटर तथा डेटा अपलोडिंग संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

आइटी सपोर्ट के लिए लाखों का भुगतान

राजस्थान के तीनों डिस्कॉम के लिए करीब 135 करोड़ रुपए के टेंडर में जोधपुर डिस्कॉम के लगभग 25 लाख उपभोक्ताओं के हिस्से की लागत 56 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। टेंडर में प्रत्येक सब-डिवीजन स्तर पर आईटी सपोर्ट स्टाफ के लिए 35,000 रुपए प्रतिमाह (जीएसटी अतिरिक्त) तथा सर्कल स्तर पर 60,000 रुपए प्रतिमाह (जीएसटी अतिरिक्त) भुगतान का प्रावधान है। इसके बावजूद कर्मचारियों का आरोप है कि तकनीकी सहायता समय पर उपलब्ध नहीं होती।

टेंडर में फील्ड कर्मचारियों के लिए स्वीकृत उपकरण

  • 9,500 रुपए प्रति यूनिट एंड्रॉइड स्मार्ट मोबाइल फोन।
  • 9,000 रुपए प्रति यूनिट ब्लूटूथ मोबाइल प्रिंटर।
  • 25,000 रुपए प्रति यूनिट मल्टीफंक्शन प्रिंटर।
  • 28,000 से 38,000 रुपए प्रति यूनिट यूपीएस।
  • 58,000 रुपए प्रति यूनिट डेस्कटॉप कंप्यूटर ।
  • 2,300 रुपए प्रति यूनिट पावर बैंक एवं अन्य एसेसरीज।

खराब मोबाइल और प्रिंटर की जिम्मेदारी किसकी?

टेंडर में एजेंसी को केवल हार्डवेयर उपलब्ध कराने की ही नहीं बल्कि 5 वर्ष तक संचालन व रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी गई है। इसके अतिरिक्त 24×7×365 आधार पर संपूर्ण बिलिंग प्रणाली, मोबाइल एप्लीकेशन और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने का दायित्व भी एजेंसी पर निर्धारित है। श्रमिक प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि मोबाइल, ब्लूटूथ प्रिंटर या बिलिंग सिस्टम में खराबी आती है, तो उसकी मरम्मत और प्रतिस्थापन की जिम्मेदारी सेवा प्रदाता कंपनी की बनती है। इसके बावजूद कई स्थानों पर कर्मचारी एक-दूसरे के प्रिंटर लेकर काम करने को मजबूर हैं।

मोबाइल सॉफ्टवेयर में लगातार शिकायतें

कर्मचारियों के अनुसार मोबाइल एप्लीकेशन में कई महत्वपूर्ण विकल्प ठीक प्रकार से कार्य नहीं कर रहे हैं। डेटा अपलोडिंग में देरी, बार-बार लॉगआउट होना, रिपोर्टिंग मॉड्यूल का सही तरीके से कार्य नहीं करना तथा उपभोक्ता संबंधी सूचनाओं का पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं होना कार्य को प्रभावित कर रहा है।

श्रमिक संगठनों ने की मांग

श्रमिक प्रतिनिधियों ने पूरे प्रोजेक्ट की स्वतंत्र तकनीकी जांच, खराब उपकरणों के तत्काल प्रतिस्थापन, सॉफ्टवेयर की कमियां दूर करने तथा सेवा स्तर समझौते (एसएलए) के उल्लंघन पर एजेंसी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद यदि कर्मचारी तकनीकी अव्यवस्थाओं के बीच काम करने को मजबूर हैं तो परियोजना की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

स्मार्ट बिलिंग व्यवस्था में तकनीकी खामियों और उपकरणों की खराबी को गंभीरता से लिया गया है। संबंधित एजेंसी को सभी शिकायतों का निस्तारण करने के निर्देश देंगे।

  • प्रेमसिंह चौधरी, मुख्य अभियंता जोधपुर जोन, डिस्कॉम