
जोधपुर.
चार साल के प्रयास के बाद गुरुवार का दिन मथुरादास माथुर अस्पताल के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि का रहा। एसएमएस अस्पताल (जयपुर) और एसएन मेडिकल कॉलेज के 18 चिकित्सकों ने जोधपुर में पहला सफल किडनी प्रत्यारोपण किया।
एमडीएम अस्पताल की मोड्यूलर ओटी में छह घंटे तक चले किडनी ट्रांसप्लांट ऑपरेशन के बाद किडनी पीडि़त मरीज व डोनर पूरी तरह स्वस्थ हैं। ट्रांसप्लांट का पूरा खर्च एमडीएम अस्पताल ने वहन किया है। पहले सफल ट्रांसप्लांट के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और अस्पताल नियंत्रक डॉ. एसएस राठौड़ ने कहा कि जोधपुर समेत पूरे पश्चिमी राजस्थान के किडनी मरीजों के लिए यह बड़ी राहत है। अब जयपुर के एसएमएस के बाद किडनी ट्रांसप्लांट का जोधपुर का एमडीएम अस्पताल दूसरा केन्द्र बन गया है। उन्होंने बताया कि नागौर निवासी सद्दाम हुसैन करीब 3 साल से किडनी की बीमारी से परेशान था। उसे 20 दिन पहले एमडीएम में भर्ती किया गया। लम्बे समय तक मरीज को डायलिसिस पर रखा नहीं जा सकता। एेसे में उसकी किडनी ट्रांसप्लांट करने का निर्णय किया गया।
किडनी लेने व देने के लिए पति और पत्नी के क्रॉस मैच की जांच करवा ली गई। रिपोर्ट मैच होने के बाद गुरुवार को एसएसएम अस्पताल के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. विनय तोमर, डॉ. एसएस यादव और एमडीएम अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग के डॉ. प्रदीप शर्मा, डॉ. गोवद्र्धन चौधरी, नेफ्रोलोजी के डॉ. मनीष चतुर्वेदी और डॉ. सुरेन्द्रसिंह राठौड व उनकी टीम ने मरीज का किडनी ट्रांसप्लांट किया।
सात साल पहले तैयार हुआ प्लान-
ट्रांसप्लांट के बाद डॉ. प्रदीप शर्मा ने बताया कि जोधपुर के एमडीएम अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट का प्लान सात साल पहले डॉ. एमके आसेरी ने तैयार किया था। चार साल पहले इस प्लान पर प्रयास तेज किए गए। अगस्त 2015 में तत्कालीन सैद्धांतिक मंजूरी और अगस्त 2016 में ऑफिशियल मंजूरी मिली। इसके बाद कुछ अड़चने आती रही इसलिए ट्रांसप्लांट में देरी होती रही। लेकिन कॉलेज के प्राचार्य व नियंत्रक डॉ. एस.एस. राठौड़ व अस्पताल अधीक्षक एमके आसेरी के निर्देशन में सभी तरह की बाधाएं दूर कर ली गई और आज जोधपुर के लिए उपलब्धि सामने आ गई।
प्रशिक्षण ले चुकी थी टीम-
किडनी ट्रांसप्लांट को लेकर दो बार जोधपुर के चिकित्सकों की ट्रेनिंग हो चुकी है। इस ट्रांसप्लांट के लिए एमडीएम अस्पताल के डॉ. प्रदीप शर्मा को राज्य प्राधिकरण से अनुमति मिल चुकी थी। इससे पूर्व जोधपुर के रेडियोल्ॉजिस्ट, निश्चेतना, नेफ्रोलोजिस्ट, यूरोलोजिस्ट व नर्सिंग स्टाफ ने जयपुर व लखनऊ जाकर गहन प्रशिक्षण भी ले लिया था।
इनका भी रहा सहयोग-
ट्रांसप्लांट में कानूनी अधिवक्ता ज्ञानेश शर्मा ने नि:शुल्क सेवाएं प्रदान की। ट्रांसप्लांट में जयपुर एसएमएस की टीम मेंं डॉ. आरडी शाहू, डॉ. धर्मेन्द्र, डॉ. पंकज बेनीवाल तथा एमडीएम अस्पताल से डॉ. एमके छाबड़ा, डॉ. दिलीप सिंह, डॉ. शोभा उज्जवल, डॉ. ए. आर. कल्ला, डॉ. पीके खत्री, डॉ. रंजना माथुर, डॉ. आर. के. सारण, डॉ. तेजेन्द्र, डॉ. अलकेश, डॉ. वर्षा कोठारी, डॉ. नीलम मीणा, डॉ. पवन, डॉ. रविन्द्र पुरोहित आदि का सहयोग रहा।
दूसरा ट्रांसप्लांट जल्द-
एमडीएम अस्पताल नियंत्रक एवं कॉलेज प्राचार्य डॉ. राठौड़ ने बताया कि ट्रांसप्लांट के लिए मोड्यूलर ओटी में अलग सेक्शन बनाया गया। इसमें पहले डोनर का और बाद में मरीज का ऑपरेशन किया गया। जल्द ही दूसरा ट्रांसप्लांट जोधपुर टीम ही करेगी। इसके लिए मरीज का रजिस्ट्रेशन कर लिया गया है। डॉ. राठौड़ ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए नया सेन्टर निर्माणाधीन है। जिसमें चार ओटी, आईसीयू विंग जल्द तैयार हो जाएगी। भविष्य में किडनी ट्रांसप्लांट नए भवन में ही किया जाएगा।