
जोधपुर। महानगर मजिस्ट्रेट संख्या आठ की पीठासीन अधिकारी वैदेहीसिंह चौहान की अदालत में 14 साल से चल रहे एक मामले में शनिवार को केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत पेश नहीं हुए। शेखावत की ओर से अधिवक्ता नाथुसिंह राठोड़ ने हाजरी माफी की अर्जी पेश की, जिसे मजिस्ट्रेट ने मंजूर करते हुए अगली सुनवाई 30 अगस्त को उपस्थित रहने का आदेश दिया। गत 30 अप्रैल को पहली बार शेखावत कोर्ट में उपस्थित हुए थे। शेखावत फिलहाल दस हजार रुपये के निजी मुचलके तथा इतनी ही राशी पर जमानत पर है।
क्या था मामला
वर्ष 2004 में शेखावत द्वारा शास्त्रीनगर पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर मे शेखावत ने समर्थ तिवारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया था। पुलिस ने घटनास्थल, गवाह तथा सबूत के आधार पर मामला संदिग्ध मानते हुए न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। इसके बाद पुलिस ने झूठी एफआईआर लिखवाने पर शेखावत के खिलाफ न्यायालय में इस्तगासा पेश कर दिया। शेखावत के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 182 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ। विचारण के दौरान शेखावत उपस्थित नहीं हुए,कोर्ट ने कई बार सम्मन जारी किये। फरवरी 2018 में शेखावत की ओर से अधिवक्ता नाथुसिंह राठौड ने सम्मन तामिल किए और जमानत करवाई।
हो सकती है 6 माह की सजा
आईपीसी की धारा 182 के तहत अपराध साबित होने पर आरोपी को 6 माह का साधारण कारावास तथा एक हजार रुपये जुर्माना की सजा हो सकती है । यह एक जमानती, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है। अर्थात शेखावत के खिलाफ इस मामले में किसी प्रकार का राजीनामा या समझोता नहीं हो सकता ।