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निगहबान- जोधपुर शहर अस्मिता, आत्मनिर्भरता और अपणायत का प्रतीक

Jodhpur News: आज भी पानी की किल्लत जोधपुर शहर के लिए बड़ी चुनौती है। हमारे इकोसिस्टम को बनाए रखने के लिए भी हमें विशेष प्रयास करने होंगे।

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जोधपुर

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Sandeep Purohit

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संदीप पुरोहित

May 12, 2026

Jodhpur News

फाइल फोटो- पत्रिका

जोधपुर। जोधपुर 568वें स्थापना दिवस पर अपने गौरवशाली अतीत का उत्सव मना रहा है, पर यह केवल इतिहास को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का भी महत्वपूर्ण दिन है। हमारी पुरानी विरासत, नीली गलियों, किलों, बावड़ियों, लोक संस्कृति और आत्मीय जीवनशैली ने इस शहर को दुनिया में अलग पहचान दी है। यह पहचान केवल स्थापत्य की नहीं, बल्कि उस जीवन दृष्टि की है, जिसने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी आत्मनिर्भरता, सहअस्तित्व और अपणायत को जीवित रखा।

मारवाड़ की रेतीली धरती ने सीमित साधनों का रोना नहीं रोया। यहां के लोगों ने कभी परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी। आजादी से पहले ही हमने अपना रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट बना लिया था। हम आलू-हरी सब्जियां और जरूरत की चीजें मांगने नहीं गए, हमने अपना खान-पान ऐसा बनाया कि जिसकी पूरी दुनिया दीवानी हो गई। केर सांगरी, राबोड़ी की सब्जी, गुलाब जामुन, रस मलाई और चक्की की सब्जी आज पूरी दुनिया में हमारी पहचान है। यह सिर्फ सब्जियां व खान-पान नहीं, बल्कि हमारे आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान का प्रतीक है।

तपती रेत और पानी की कमी के बीच भी हमने जल संरक्षण, तालाबों और पारंपरिक जल संरचनाओं के माध्यम से जीवन को आगे ऐसा बढ़ाया जो पूरी दुनिया के लिए एक सीख बन गया। आज भी पानी की किल्लत इस शहर के लिए बड़ी चुनौती है। हमारे इकोसिस्टम को बनाए रखने के लिए भी हमें विशेष प्रयास करने होंगे। ओरण भूमि बचाने के सभी को संकल्प लेना होगा। मारवाड़ का फ्लोरा और फोना बचा रहे और संरक्षित हो, इसके लिए सामूहिक प्रयास ही एकमात्र मार्ग है।

आज आवश्यकता है शहर के समग्र विकास की इंफ्रास्ट्रक्चर का एक दीर्घकालिक ब्लू प्रिंट बनना चाहिए। विकास संस्थागत हो, बिखरा हुआ न हो, खाली फ्लाईओवर-एलिवेटेड रोड से काम नहीं चलने वाला है। उसके साथ मानव संसाधन का विकास आवश्यक है। तभी शहर का हैप्पीनेस इंडेक्स आगे बढ़ेगा। हमारे कलाकारों, कारीगरों की कला दुनिया के बाजार में अपना मुकाम बनाए, इस ओर भी सरकार को विशेष ध्यान देना होगा। विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास नहीं जो शहर की आत्मा को खत्म कर दे।

भविष्य का जोधपुर केवल ऊंची इमारतों वाला शहर नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा शहर बने जहां संस्कृति सुरक्षित रहे। मेहरानगढ़, जसवंत थड़ा, गुलाब सागर, घंटाघर और ब्लू सिटी केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक अस्मिता है। हमारा प्रयास होना चाहिए कि पर्यटक हमारे यहां रुके, इससे पूरे शहर को रोजगार मिलता है। आज जोधपुर शिक्षा, चिकित्सा, उद्योग और पर्यटन के नए केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। रिफाइनरी परियोजना, एम्स और अन्य संस्थानों ने शहर को नई पहचान दी है। इन विकास कार्यों के पीछे समाज, जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और जागरूक नागरिकों के साथ राजस्थान पत्रिका ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पत्रिका ने अपनी स्थापना से ही केवल समाचार पत्र की भूमिका नहीं निभाई, बल्कि जनसरोकारों के प्रहरी के रूप में काम किया। शहर के विकास, लोक कल्याण, सामाजिक सद्भाव और समस्याओं के समाधान में सक्रिय भागीदारी निभाई। बिना किसी राग-द्वेष के उच्च पत्रकारिता मूल्यों को बनाए रखते हुए हमेशा पाठकों को केंद्र में रखा। नफा-नुकसान से ऊपर उठकर समाजहित के मुद्दों को प्राथमिकता दी। कठिन समय में लोगों को दिशा दिखाई और सकारात्मक पहल के माध्यम से समाज को जोड़ने का कार्य किया।

सीमांत क्षेत्र होने के बावजूद भी अगर आज यहां आतंक ने पांव नहीं पसारे तो उसका श्रेय यहां के वाशिंदों को ही जाता है। जिनकी रगों में राष्ट्रभक्ति बसी हुई है। पाकिस्तान से लड़े गए दोनों युद्ध इस बात के गवाह है। आज रिफाइनरी जिस स्थिति में पहुंची है उसका पूरा श्रेय पत्रिका को ही जाता है। जब लोग इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट पर हंसते थे तब पत्रिका ने राह दिखाई थी। पचपदरा की रिफाइनरी और जोधपुर के बीच रैपिड ट्रैफिक सिस्टम विकसित किया जाए, पेट्रो केमिकल रोजगार में मारवाड़ के वाङ्क्षशदों को प्राथमिकता दी जाए, उद्योग-धंधे लगाने के लिए राज्य सरकार उन्हें हर संभव मदद करे, बाकी सारी दुनिया जानती है कि हम मारवाड़ी अपना रास्ता बना ही लेते हैं।
sandeep.purohit@in.patrika.com