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निगहबान- जन उत्सव में सरकारी एजेंसियां उदासीन क्यों?

धींगा गवर मेला के भव्य आयोजन का एक चिंताजनक पहलू यह भी सामने आता है सरकार और उसकी एजेंसियों की भागीदारी लगभग नगण्य है।
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जोधपुर

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Sandeep Purohit

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Updated: 5 Apr 2026, 8:04 PM IST

संदीप पुरोहित
धींगा गवर मेला जोधपुर की जीवंत परंपरा, आस्था, संस्कृति और संस्कार का प्रतीक है। महिला शक्ति का सशक्त हस्ताक्षर है। यह अनूठा उत्सव है। देश का इकलौता ऐसा आयोजन है, जब पूरी रात महिलाओं का 'राज' होता है। शहर की सांस्कृतिक धड़कन अपने चरम पर होती है। इस मेले से पहले 16 दिनों तक चलने वाला धींगा गणगौर पूजन व दो दिन का मेला मारवाड़ की धार्मिक आस्था की एक बानगी है।

एक दिन पहले होने वाला लोटिया उत्सव की रंगत देखते ही बनती है। महिलाएं स्वांग रच कर आती है। परंपरागत देवी देवताओं के साथ इस बार बॉलीवुड की फिल्म के नायक ट्रेंड में है। सालभर इस मेले का इंतजार करने वाली महिलाओं का उत्साह देखते ही बनता है। पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत, और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के बीच यह मेला अब जोधपुर की पहचान बनकर देश-विदेश तक अपनी छाप छोड़ रहा है। यह पूर्ण रूप से श्रद्धा और परंपरा का प्रतीक है, लेकिन दशकों से 'बेंतमार' जैसे शब्दों के जरिए इसे प्रचारित करना इसकी मूल भावना के साथ अन्याय भी है।

हालांकि, इस भव्य आयोजन का एक चिंताजनक पहलू यह भी सामने आता है सरकार और उसकी एजेंसियों की भागीदारी लगभग नगण्य है। नगर निगम की ओर से कुछ स्थानों पर लाइटिंग कर देना और पुलिस की ओर से दो चार जवान जलाशयों पर खड़े कर देना भर ही काफी नहीं है। जिस मेले में हजारों लोग जुटते हैं, वहां ट्रैफिक नियंत्रण, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ नजर आता है। स्थिति यह है कि शहर की पहचान बन चुके इस आयोजन में व्यवस्थाएं खुद अपनी राह तलाशती दिखती है। राज्य के पर्यटन विभाग की उपिस्थति तो शून्य दिखाई देती है। केंद्रीय स्तर पर भी, जबकि देश के पर्यटन और संस्कृति से जुड़े मंत्रालय का प्रतिनिधित्व इसी शहर से है, कोई पहल नजर नहीं आती।

धींगा गवर मेला सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि जोधपुर की सांस्कृतिक विरासत का गौरव है। इसे अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और वैश्विक पहचान देने के लिए प्रशासन और सरकार को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। यदि सही दिशा में प्रयास किए जाएं, तो यह मेला राजस्थान ही नहीं, पूरे देश के सांस्कृतिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है।
sandeep.purohit@in.patrika.com