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Ex CM अशोक गहलोत ने फिर उठाए ‘डबल इंजन’ सरकार पर सवाल, महंगाई और रिफाइनरी सहित कई मुद्दों पर साधा निशाना 

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की भजनलाल सरकार से लेकर केंद्र की मोदी सरकार तक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना, रिफाइनरी ट्रायल, कानून व्यवस्था और बजट संकट पर रखी बेबाक राय। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

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Ashok Gehlot Criticizes Bhajan Lal and Modi Government

Ashok Gehlot - File PIC

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक बार फिर 'डबल इंजन' सरकार पर बरसते नज़र आए। मंगलवार को जोधपुर प्रवास के दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में महंगाई और रिफाइनरी सहित कई मुद्दों पर राज्य की भजनलाल सरकार से लेकर केंद्र की मोदी सरकार तक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। पूर्व सीएम ने राज्य की मौजूदा कानून व्यवस्था, विभिन्न जनहितकारी योजनाओं की स्थिति और वित्तीय प्रबंधन को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रशासनिक और वित्तीय तालमेल की कमी के कारण धरातल पर कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। गहलोत ने विभिन्न विभागों में लंबित पड़े पेमेंट्स और विकास योजनाओं की धीमी गति का जिक्र करते हुए सरकार को जनकल्याण की दिशा में अधिक सक्रिय होने की नसीहत दी है। गहलोत ने कहा कि सरकार की ओर से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए क्योंकि वर्तमान में आम जनता के बीच प्रशासनिक शिथिलता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों को जिलों के दौरों के साथ-साथ सचिवालय स्तर पर फाइलों के त्वरित निस्तारण और योजनाओं की सख्त मॉनिटरिंग पर ध्यान केंद्रित करने को कहा।

'लंबित भुगतानों के कारण आमजन परेशान'

पूर्व मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में चल रही पूर्ववर्ती कल्याणकारी योजनाओं की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से बात की। उन्होंने दावा किया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में लागू की गई बड़ी बीमा योजनाओं के अंतर्गत निजी अस्पतालों को समय पर भुगतान न होने के कारण व्यवस्थाएं लड़खड़ा रही हैं। कई निजी चिकित्सा संस्थानों ने कथित तौर पर इलाज करने से हाथ खड़े कर दिए हैं, जिससे गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को अपनी जेब से भारी रकम खर्च करनी पड़ रही है।

इसके साथ ही उन्होंने सहकारी दवा दुकानों और जनऔषधि केंद्रों के संचालन को लेकर मिल रही शिकायतों का भी हवाला दिया। गहलोत ने कहा कि ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में इन दुकानों के जरिए गरीबों को सस्ती दवाइयां मिलती थीं, लेकिन भुगतानों की कमी से इनका अस्तित्व खतरे में है। वहीं शिक्षा विभाग का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश के हजारों जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को समय पर छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) नहीं मिल पा रही है, जिससे उनकी आगे की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

बाड़मेर रिफाइनरी : निष्पक्ष जांच की मांग

बाड़मेर में स्थापित हो रही देश की अत्याधुनिक रिफाइनरी के प्रोजेक्ट को लेकर अशोक गहलोत ने सरकार के रुख पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि रिफाइनरी का कार्य पूर्ण हुए बिना ही राजनीतिक लाभ के लिए शीर्ष नेतृत्व के दौरों और लोकार्पण की जल्दबाजी की गई। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से ठीक 24 से 36 घंटे पहले किए गए तकनीकी ट्रायल्स के दौरान जो अप्रिय घटनाएं और सुरक्षा चूक सामने आईं, वे बेहद चिंताजनक हैं।

गहलोत ने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "हमारे कार्यकाल के दौरान हमने दिसंबर 2024 तक रिफाइनरी को चालू करने का एक व्यावहारिक लक्ष्य निर्धारित किया था। लेकिन सरकार बदलने के बाद अधिकारियों और मंत्रियों ने धरातल की हकीकत जाने बिना दबाव में कार्यक्रम तय कर लिए। मुख्य सचिव और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को वीवीआईपी दौरों के प्रबंधन में व्यस्त रहने के बजाय पहले स्वयं रिफाइनरी साइट पर जाकर सुरक्षा और ट्रायल की पूर्णता सुनिश्चित करनी चाहिए थी।"

जोधपुर : विकास कार्यों की उपेक्षा का आरोप

जोधपुर के विकास और वहां के बुनियादी ढांचे के मुद्दों पर बोलते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने स्थानीय उपेक्षा का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि जोधपुर और आसपास के सूखाग्रस्त गांवों की प्यास बुझाने के लिए उनके कार्यकाल में इंदिरा गांधी नहर परियोजना के तीसरे चरण के लिए करीब 1400 करोड़ रुपये का बजट राज्य कोष से स्वीकृत किया गया था। विदेशी वित्तीय संस्थानों से ऋण मिलने में हो रही देरी को देखते हुए यह कदम उठाया गया था ताकि काम न रुके।

परंतु, सरकार बदलने के बाद इस महत्वपूर्ण पेयजल परियोजना की उचित मॉनिटरिंग नहीं की जा रही है, जिससे काम की गति अत्यंत धीमी हो गई है। उन्होंने जोधपुर में बनकर तैयार हो चुकी सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी, 90 करोड़ रुपये के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, फिनटेक इंस्टीट्यूट और विभिन्न सैटेलाइट अस्पतालों (जैसे प्रताप नगर, मंडोर और दिगाड़ी) का उदाहरण देते हुए कहा कि शानदार इमारतें खड़ी होने के बावजूद वहां आवश्यक चिकित्सा उपकरण और डॉक्टरों की तैनाती नहीं की जा रही है, जिससे जनता को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

बढ़ती महंगाई और ईंधन कीमतें : श्वेत पत्र जारी करने की आवश्यकता

देश और प्रदेश में ईंधन की कीमतों, विशेषकर पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी के साथ-साथ हाल ही में सीएनजी (CNG) गैस की दरों में हुई बढ़ोतरी पर भी गहलोत ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि चुनाव खत्म होते ही तेल कंपनियों और सरकारों द्वारा रोज-रोज आंशिक बढ़ोतरी करके जनता पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है, जिससे ट्रांसपोर्ट सेक्टर, ऑटो-टैक्सी चालक और आम उपभोक्ता बुरी तरह प्रभावित हैं।

गहलोत ने कहा कि सरकार को देशवासियों के सामने वास्तविक आर्थिक स्थिति को स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण कीमतें बढ़ाना सरकार की मजबूरी है, तो इसके बारे में भ्रामक प्रचार करने के बजाय देश के सामने सच्चाई का श्वेत पत्र रखा जाना चाहिए ताकि लोग मानसिक रूप से तैयार रह सकें। उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा देश की नाजुक आर्थिक स्थिति को लेकर समय-समय पर दी जा रही चेतावनियों को गंभीरता से लेने की सलाह भी सरकार को दी।

जिला अध्यक्षों के प्रशिक्षण शिविर की सराहना

पार्टी के आंतरिक मामलों और संगठन की मजबूती पर चर्चा करते हुए अशोक गहलोत ने अजमेर के पुष्कर में आयोजित किए जा रहे कांग्रेस जिला अध्यक्षों के 10 दिवसीय विशेष आवासीय प्रशिक्षण शिविर को बेहद सफल और ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के विजन के अनुरूप यह एक बिल्कुल नया और अनूठा प्रयोग है, जिससे पार्टी संगठन में जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।

इस प्रशिक्षण शिविर की उपयोगिता स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से अलग-अलग जिलों के पदाधिकारियों को एक-दूसरे के साथ लंबा समय बिताने, विभिन्न क्षेत्रों की स्थानीय समस्याओं को गहराई से समझने और राष्ट्रीय स्तर की फैकल्टी से सांगठनिक प्रबंधन सीखने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के गंभीर और दीर्घकालिक प्रशिक्षणों से निकलने वाले ऊर्जावान नेता भविष्य में केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) के निर्णयों और स्थानीय टिकट वितरण की प्रक्रियाओं में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।