जोधपुर

Jodhpur: 49 साल का अटूट साथ छूटा… पत्नी की मौत के 24 घंटे में पति ने भी तोड़ा दम, अधूरा रह गया सपना

Husband Wife Emotional Story: जोधपुर में एक पति-पत्नी के दांपत्य जीवन की भावुक प्रेम कहानी का दुखद अंत हर शख्स को रुला गया। पति-पत्नी के बीच 7 जन्मों का बंधन यानि साथ साथ सुख-दुख और एक साथ जीने-मरने का एक अटूट बंधन होता है।

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मृतक दंपती किशन सिंह राठौड़ और राधा कंवर राठौड़, फोटो सोशल मीडिया

Husband Wife Emotional Story: जोधपुर में एक पति-पत्नी के दांपत्य जीवन की भावुक प्रेम कहानी का दुखद अंत हर शख्स को रुला गया। पति-पत्नी के बीच 7 जन्मों का बंधन यानि साथ साथ सुख-दुख और एक साथ जीने-मरने का एक अटूट बंधन होता है। शहर की इस घटना ने इन दावों को सच साबित कर दिखाया।

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यह है पूरा घटनाक्रम

जानकारी के अनुसार जोधपुर के कुड़ी की रहने वाली राधा कंवर राठौड़ (60) का हार्टअटैक से 26 अप्रैल 2026 को निधन हो गया था। राधा की मौत के अगले ही दिन (27 अप्रैल) उनके पति किशन सिंह राठौड़ (कृष्ण) (70) की भी मौत हो गई।
महज 24 घंटे के अंदर दोनों की मौत ने परिवार को झकझोर दिया। परिजनों के अनुसार दोनों दिनभर ठाकुरजी की सेवा में लगे रहते थे। हमेशा एक साथ रहते थे। एक कहीं बाहर चला जाता था, तो दूसरा बेचैन हो जाता था।

24 घंटे में ही दोनों की मौत

कृष्ण सिंह की बेटी ममता ने बताया- पापा पिछले करीब पांच साल से बीमार थे। मां बिल्कुल स्वस्थ थीं। मां ने पापा की खूब सेवा की। 26 अप्रैल को मां को हार्ट अटैक आ गया। अस्पताल ले जाने के बाद उन्हें वहां दूसरा अटैक आया और चंद मिनटों में ही उनकी मौत हो गई। मां के निधन के अगले दिन पापा की भी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें एम्स में एडिमट कराया था। जहां कुछ घंटे बाद उन्होने भी दम तोड़ दिया।

एक दूसरे के बिना हो जाते बैचेन

ममता ने बताया कि दोनों के बीच अटूट प्रेम था। मां यदि 10 मिनट भी कहीं चली जाती थी तो वो बेचैन होकर मां को ही ढूंढते रहते। उन्हें याद नहीं कि पापा ने खुद को कभी मां से 10 मिनट भी अलग किया हो। पापा हर समय राधा-राधा नाम ही पुकारते रहते थे।
पुत्रवधु रितिका का कहना है कि उनके ससुर को पैदल चलने में तकलीफ थी, लेकिन सासू मां कभी इधर-उधर होतीं तो वो उनके पीछे उन्हें ढूंढते हुए आ जाते थे। अब सासू मां चली गईं, तो उन्हें भी ढूंढते हुए खुद उनके पास पहुंच गए।

मौत के बाद भी रहेगा साथ

राधा की बहन गायत्री ने बताया कि उनकी दीदी का नाम राधा था। जिस प्रकार से राधा-कृष्ण के बगैर अधूरी थी। उसी प्रकार उनके जीजा और जीजी एक दूसरे के बगैर अधूरे थे। दोनों के बीच इतना प्रेम था कि मरने के बाद भी राधा और कृष्ण एक साथ ही रहेंगे। जीवित रहते हुए मेरी बहन ने एक दिन पिताजी को अकेला नहीं छोड़ा। मेरी बहन ने मौत के बाद भी उन्हें अकेला नहीं छोड़ा। एक दिन बाद ही उन्हें भी अपने पास बुला दिया।

50वीं एनीवर्सिरी मनाने का अधूरा रहा सपना

किशन सिंह सेंट्रल वाटर डिपार्टमेंट से ड्राइवर पोस्ट से रिटायर थे। राधा और कृष्ण की शादी 21 अप्रैल 1977 को बीकानेर में हुई थी। परिवार ने हाल ही में उनकी 49वीं मैरिज एनिवर्सिरी मनाई थी। ममता ने बताया कि हम अगले साल धूमधाम से उनकी 50वीं सालगिरह सेलिब्रेट करने की सोच रहे थे, लेकिन सब सिर्फ सपना ही रह गया।

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