जोधपुर

होम आइसोलेशन मरीजों के लिए अब Covid Care, कलाई पर घड़ी की तरह बंधा रहेगा

iit jodhpur news - आइआइटी जोधपुर, ट्रिपल आइटी नागपुर व एम्स नागपुर ने मिलकर तैयार किया डिवाइस- प्लस रेट, ऑक्सीजन सेचुरेशन व तापमान की सूचना स्वत: दर्ज होकर अस्पताल पहुंचेगी- जियो फैंसिंग भी, घर से बाहर नहीं निकल सकेगा मरीज
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होम आइसोलेशन मरीजों के लिए अब Covid Care, कलाई पर घड़ी की तरह बंधा रहेगा
होम आइसोलेशन मरीजों के लिए अब Covid Care, कलाई पर घड़ी की तरह बंधा रहेगा

जोधपुर. देश में अधिकांश कोरोना मरीजों के अलाक्षणिक प्रकृति के कारण उन्हें होम आइसोलेशन किया जा रहा है। इन मरीजों की देखभाल सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रही है। इस समस्या के समाधान के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर, भारतीय सूचना तकनीकी संस्थान (आइआइआइटी) नागपुर और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नागपुर ने मिलकर कोरोना मरीजों की ट्रेकिंग के लिए नया डिवाइस विकसित किया है। ‘कोविड केयर’ नामक यह डिवाइस मरीज की कलाई में घड़ी की तरह बंधा रहेगा जो निश्चित समयांतराल से मरीज के स्वास्थ्य का डाटा स्वत: ऑनलाइन अस्पताल भेज देगा। यह जियो फैंसिंग का काम भी करेगा। घर से बाहर जाने पर यह सेटेलाइट के जरिए डाटा भेजेगा। मरीज अगर इसे कलाई से उतारकर रख देता है तो भी इसकी सूचना तुरंत प्रशासन तक पहुंच जाएगी।

इन्होंने तैयार किया कोविड केयर
कोविड केयर को आइआइटी जोधपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो कौशल देसाई, आइआइआइटी नागपुर के मयूर पराटे, एम्स नागपुर के डॉ. प्रथमेश काम्बले ने मिलकर विकसित किया है। डॉ काम्बले पहले जोधपुर एम्स में ही थे। प्रो देसाई ने डिवाइस का ढांचा, पराटे ने इलेक्ट्रोनिक्स सर्किट और डॉ. काम्बले ने अस्पताल में मरीजों पर टेस्ट किया है।

केवल तीन पैरामीटर लेगा
1 प्लस रेट- मरीजों की कम या अधिक प्लस रेट की जांच के लिए।
2 ऑक्सीजन सेचुरेशन- सामान्य इंसान में 95 से 100 तक ऑक्सीजन सेचुरेशन रहता है। 90 से नीचे जाने पर अस्पताल में बैठी टीम को सूचना मिल जाएगी और वह होम आइसोलेशन के रोगी को लेने घर पहुंच जाएगी। अभी 70 से 80 ऑक्सीजन सेचुरेशन वाले मरीजों की मौत हो रही है।
3 तापमान- मरीज का तापमान अधिक या कम होने की जांच।

बाजार में नहीं मिलेगा, अस्पताल में मिलेगा
‘कोविड केयर’ बाजार में नहीं मिलेगा, केवल अस्पताल से ही कोरोना मरीजों को इश्यू होगा। इसमें 25 से 30 दिन चलने वाली बैटरी होगी। मरीजों को केवल कलाई पर बांधकर रखना है। सूचनाएं स्वत: अस्पताल पहुंचती रहेगी। ठीक होने पर मरीज को अस्पताल में जाकर जमा करवाना होगा। अस्पताल प्रशासन फिर से इसकी बैटरी चार्ज करके दूसरे मरीजों को दे देगा।

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‘होम आइसोलेशन को बेहतर मैनेज करने और जियो फैसिंग के उद्देश्य के लिए यह डिवाइस तैयार किया गया है।’
- प्रो कौशल देसाई, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग, आइआइटी जोधपुर

Published on:
24 Jul 2020 11:59 pm