जोधपुर

प्रदेश के 5 जिलों में जीवन स्तर सुधारने का जिम्मा आइआइटी को

jodhpur news iit jodhpur news - केंद्र सरकार ने चिन्हित किए देश के 117 पिछड़े जिले, वैज्ञानिक संस्थान करेंगे विकास- राजस्थान में जैसलमेर, धौलपुर, सिरोही, बारां व करौली सहित 5 जिलों में निम्न जीवन स्तर- आइआइटी जोधपुर के नेतृत्व में 8 संस्थान करेंगे विकास- बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित आधुनिक सुविधाओं पर होगा काम

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प्रदेश के 5 जिलों में जीवन स्तर सुधारने का जिम्मा आइआइटी को

जोधपुर. केंद्र सरकार ने अब देश में विज्ञान की मदद से विकास करने का निर्णय लिया है। प्राथमिक तौर पर इसके लिए पूरे देश में 117 पिछड़े जिले चिन्हित किए गए हैं। जिनका विकास स्थानीय प्रशासन के सहयोग से केंद्र सरकार के वैज्ञानिक संस्थान करेंगे। राजस्थान में सिरोही, जैसलमेर, करौली, बारां और धौलपुर को पिछड़ा जिला माना गया है। इसके विकास की जिम्मेदारी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर के नेतृत्व में 8 संस्थानों को दी गई है। इसमें आईजीआईबी नई दिल्ली, सीरी पिलानी, एम्स जोधपुर, डीएमआरसी जोधपुर, काजरी, अटारी जोधपुर और कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर शामिल है। सभी संस्थान अपने द्वारा विकसित की गई तकनीक व अनुसंधान की मदद से इन जिलों में स्वास्थ्य, कृषि, सौर ऊर्जा, पीने का पानी, संचार की व्यवस्था में सुधार और अन्य समस्याओं का समाधान करेंगे। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, बिग डाटा, एनालिटिक्स, सेंसर, ड्रोन जैसी तकनीकों का प्रयोग किया जाएगा।

पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सिरोही
आइआइटी जोधपुर के नेतृत्व में सभी 8 संस्थानों ने इस पर काम शुरू कर दिया है। सर्वप्रथम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सिरोही को चुना गया है। वहां तकनीक और अनुसंधान के अच्छे परिणाम मिलने के बाद अन्य 4 जिलों में भी अगले साल से इसे लागू किए जाने की संभावना है।

सिरोही में तकनीक से क्या-क्या सुधार
- सिरोही जिले के पिंडवाड़ा तहसील में पत्थर के काम के कारण सिलिकोसिस बीमारी भयंकर रूप से फैली हुई है। तीन साल में वहां 1300 लोग मारे जा चुके हैं। सरकार करीब 24 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। आइआइटी ने अपने सुपर कंप्यूटर की मदद से स्वस्थ, सिलिकोसिस बीमारी और टीबी से पीडि़त मरीजों के एक्स-रे उसमें डालकर कंप्यूटर को बीमारी का पूर्वानुमान लगाने के लिए प्रशिक्षित किया है। ताकि बीमारी होने से पहले ही पता लगाकर उसको रोका जा सके। एम्स जोधपुर नई दवाई इजाद कर रहा है। आईजीबीआई नई दिल्ली ने लंग फंक्शन टेस्ट का नया डिवाइस तैयार किया है। जिसमें मरीजों के फेफड़े की जांच के लिए उसे अधिक फूंक नहीं मारनी पड़ेगी।
- पहाड़ी क्षेत्रों पर कृषि के विकास में किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए काजरी की सहायता से नई कृषि तकनीक विकसित की जा रही है।
- सिंचाई की व्यवस्था के लिए सोलर लाइट और सोलर ट्री लगाए जा रहे हैं।
- पीने के पानी की दिक्कत दूर करने के लिए हवा में उपस्थित नमी को पानी में बदलने की तकनीक पर प्रयोग चल रहा है।
- प्रशासनिक सुधार करने के लिए नया ऐप तैयार किया जा रहा है। जिसमें त्वरित गति से सभी तरह के डाटा एंट्री होगी और जरूरत के समय सभी डाटा एक ही जगह एक क्लिक पर उपलब्ध हो सकेंगे।
- केंद्र सरकार ने इसके लिए किसी भी संस्थान को अतिरिक्त धन मुहैया नहीं कराया है। इसमें सिरोही का जिला प्रशासन इन संस्थानों की मदद कर रहा है।


विज्ञान की मदद से जीवन स्तर में सुधार
हम विज्ञान और तकनीक की मदद से जीवन को बेहतर बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। इसी के अंतर्गत सिरोही को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है।
-डॉ शांतनु चौधरी, निदेशक, आइआइटी जोधपुर

Published on:
06 Aug 2019 11:59 pm
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