बेमतलब की मुकदमेबाजी को लेकर अदालतों में बढ़ते मामलों के बोझ का दर्द सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट परिसर में नवनिर्मित महाधिवक्ता कार्यालय के उद्घाटन समारोह में झलका
जोधपुर। बेमतलब की मुकदमेबाजी को लेकर अदालतों में बढ़ते मामलों के बोझ का दर्द सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट परिसर में नवनिर्मित महाधिवक्ता कार्यालय के उद्घाटन समारोह में झलका, जब मुख्य न्यायाधीश ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मौजूदगी में कहना पड़ा कि राज्य में लिटिगेशन पॉलिसी लागू होने के बावजूद इस पर अमल नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। सीएम गहलोत ने जवाब में कहा कि सीजे ने मार्मिक बात कही है, वे यकीन दिलाते हैं कि इसे लागू करवाएंगे और यह उनका फर्ज भी है।
सीजे ने कहा, एक लिटिगेशन पॉलिसी होने के बावजूद सरकार उसे लेकर सख्त नहीं है। हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष अमूमन एकल पीठ के आदेश के खिलाफ सरकार ऐसी अपील दाखिल कर रही हैं, जो मेरी और मेरे साथी जजों की राय में मोटे तौर पर अनावश्यक और अनपेक्षित है। मसीह ने कहा कि सीएम और महाधिवक्ता महेंद्र सिंह सिंघवी की मौजूदगी में मैं कहना चाहता हूं कि पॉलिसी को कागज का टुकड़ा नहीं बनने देना चाहिए, नहीं तो कोर्ट का समय, ऊर्जा तथा अन्य संसाधनों का दुरुपयोग होने पर मजबूरन हमें भारी कॉस्ट लगानी पड़ती है। ऐसे अनावश्यक मामलों से सरकार को बचना चाहिए, जिससे समान मामलों में सुप्रीम कोर्ट तक निर्णय हो चुका हो। सीएम गहलोत ने अपने उद्बोधन में सीजे की चिंता से सरोकार जताते हुए पॉलिसी को अमल में लाने का यकीन दिलाया। उन्होंने कहा कि बढ़ते मामलों का निस्तारण संभव है या नहीं, लेकिन यह सवाल उठता है कि जरूरत के बावजूद हाईकोर्ट में जजों के पद खाली क्यों हैं।
समारोह में न्यायाधीश विजय बिश्नोई ने कहा कि अदालतों में लंबित मुकदमों के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन हमको यह प्रयास करना चाहिए कि यह भार कैसे कम किया जा सकता है। हम काम करेंगे तो उसकी आलोचना भी होगी, लेकिन इसकी परवाह नहीं करनी चाहिए और न्याय सुलभ करवाने पर जोर देना चाहिए। इससे पूर्व गहलोत ने सीजे मसीह और न्यायाधीश बिश्नोई के साथ लोकार्पण पट्टिका का अनावरण किया। साथ ही, महाधिवक्ता चैम्बर तथा भवन में सुविधाओं का अवलोकन किया। यह भवन 22.55 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ है।