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Jodhpur News : जोधपुर से बेंगलुरु जा रही प्राइवेट बस आग का गोला बनी, सवारियों की बची जान, सामान हुआ खाक

Jodhpur News : जोधपुर से बेंगलूरु जा रही एक प्राइवेट बस मंगलवार रात शताब्दी सर्कल से आगे डीमार्ट के निकट अचानक आग का गोला बन गई। थोड़ी देर में बस जलकर पूरी तरह से ढांचा बन गई।

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Rajasthan Jodhpur-Bengaluru private bus caught fire passengers escape goods destroyed

Jodhpur Bus Fire : आग से जलती प्राइवेट बस। फोटो पत्रिका

Jodhpur News : जोधपुर से बेंगलूरु जा रही एक प्राइवेट बस शताब्दी सर्कल से आगे अचानक आग का गोला बन गई। शॉर्ट सर्किट से बस ने आग पकड़ ली। कुछ ही देर में आग की लपटें तेज हो गई। गनीमत रही कि जनहानि नहीं हुई। आनन-फानन में सवारियों को नीचे उतार दिया गया। दमकल विभाग को मौजूदा लोगों ने आग की सूचना दी। तीन दमकल मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। बस जलकर पूरी तरह से ढांचा बन गई।

प्रत्यक्षदर्शियाें के अनुसार मंगलवार रात करीब 10.50 बजे बस डीमार्ट के निकट पहुंची ही थी कि बस के आगे के हिस्से में अचानक लपटें उठनी लगी। ड्राइवर ने बस को तत्काल रोका और सवारियों को नीचे उतारना शुरू किया। आग ने विकराल रूप लिया, तब तक सवारियाें को नीचे उतार लिया गया था। देखते ही देखते बस आग का गोला बन गई। इसकी सूचना दमकल को दी। तीन दकमलों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। बस अंदर से पूरी तरह जल गई। एसीपी बोरानाडा आनंदसिंह राजपुरोहित समेत पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।

सवारियों का सामान हुआ राख

आनन-फानन में कई सवारियां अपना सामान बस में छोड़कर नीचे उतरी। बस में सवार बीकानेर निवासी स्वरूप ने बताया कि वह जोधपुर से बेंगलूरु जा रहा था। बस में अचानक आग की लपटें उठने लगी तो चीख-पुकार मच गई। ड्राइवर ने बस को रोका। आस-पास के लोग दौड़कर आए और सवारियों को नीचे उतारा।

बताया जा रहा है कि बस का कंडक्टर गाड़ी रुकते ही भाग गया, लेकिन आस-पास के लोगों ने सवारियों को नीचे उतारने में मदद की। हादसे के बाद सवारियों को दूसरी बस से रवाना किया गया।

प्रशासन बोला- कमी नहीं, जमाखोरी-अफवाह से बिगड़े हालात

वहीं एम दूसरी न्यूज के अनुसार जोधपुर शहर और संभाग में पेट्रोल-डीजल को लेकर बने संकट के बीच बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सालावास स्थित तीनों तेल कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के डिपो से जहां सामान्य दिनों में करीब 550 टैंकर रोजाना निकलते थे, वहीं इन दिनों यह संख्या बढ़कर करीब 900 तक पहुंच गई है। इसके बावजूद शहर के कई पेट्रोल पंप ड्राई होने लगे हैं। प्रशासन और तेल कंपनियां इसे वास्तविक कमी नहीं बल्कि अफवाह, पैनिक खरीदारी और बड़े स्तर पर स्टोरेज का असर मान रही है।

मंगलवार को जिला प्रशासन की टीम ने सालावास स्थित तीनों डिपो का निरीक्षण किया। जांच में सामने आया कि पिछले साल की तुलना में इस बार पेट्रोल और डीजल की बिक्री औसतन 25 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है। इसके बावजूद कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म होने से कृत्रिम संकट जैसे हालात बन गए। अधिकारियों का मानना है कि आम लोगों के साथ कुछ बड़े उपभोक्ताओं द्वारा अतिरिक्त भंडारण किए जाने से सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है।