- बिलाड़ा के खेजड़ला गांव का मामला- दोनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होने तक शव न उठाने पर अड़े परिजन
जोधपुर.
जिले के बिलाड़ा थानान्तर्गत खेजड़ला गांव में गत माह लाठियों से हमले के बाद जान-बूझकर कार ऊपर चढ़ाने से घायल छात्र का मथुरादास माथुर अस्पताल के आईसीयू में रविवार को दम टूट गया। एक पखवाड़े बाद भी आरोपियों के पकड़ में न आने से आक्रोशित परिजन व समाज के लोगों ने शव उठाने से इनकार कर दिया।
खेजड़ला गांव निवासी बालाराम मेघवाल का कहना है कि गत १९ अगस्त की शाम जानलेवा हमले में पुत्र सुनील (१६) गंभीर घायल हो गया था। जिसका मथुरादास माथुर अस्पताल के आईसीयू में इलाज चल रहा था। जिन्दगी व मौत से संघर्ष करने के बाद आखिरकार रविवार को उसकी मृत्यु हो गई। स्थानीय पुलिस ने बिलाड़ा थाना पुलिस को सूचित कर शव मोर्चरी में रखवा दिया। मृत्यु का पता लगने पर परिजन के साथ समाज के लोग मोर्चरी पहुंचे। एक पखवाड़े से अधिक समय होने के बावजूद अभी तक एक भी आरोपी के पकड़ में न आने के प्रति रोष जताया। उन्होंने कार्रवाई न होने तक शव उठाने से इनकार कर दिया। देर शाम पुलिस अधिकारी अस्पताल पहुंचे व समझाइश की। फिलहाल शव मोर्चरी में रखा है। जानलेवा हमले के मामले को अब हत्या में तब्दील कर जांच की जाएगी।
यह है मामला
गत १९ अगस्त की शाम पांच बजे कार में सवार कमलेश सैनी व पंकज देवासी ने सुनील पर लाठियों से हमला किया था। परिजन के बीच-बचाव करने पर दोनों आरोपी कार में बैठकर भाग निकले थे। करीब एक घंटे बाद जब सुनील अपने मित्र बबूल व महेन्द्र के साथ गांव में टोल नाके पास खड़ा था। तब दोनों आरोपी फिर कार लेकर वहां आए और तीनों पर जानबूझकर कार चढ़ा दी। तीनों घायल हो गए। वहां खड़े विक्रमदास ने उन्हें टोका तो आरोपियों ने उस पर भी कार चढ़ा दी थी। फिर कार के कंटीली झाडि़यों में फंसने पर वहीं छोडक़र दोनों भाग निकले थे। चारों को एमडीएम अस्पताल लाया गया, जहां हालत गम्भीर होने पर सुनील को आईसीयू में रैफर कर दिया गया था। जबकि अन्य को उपचार के बाद घर भेज दिया गया था। दीपाराम की तरफ से जानलेवा हमले व एससी/एसटी एक्ट का मामला दर्ज किया गया था।