
राजस्थान के नागौर जिले के छोटे से गांव पाबुथल सथरेण की एक साधारण झोंपड़ी से निकलकर आदेश विश्नोई ने वह मुकाम हासिल किया है, जिसका सपना लाखों विद्यार्थी देखते हैं। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद आदेश ने जेईई एडवांस्ड-2026 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1783 तथा जनरल ईडब्ल्यूएस वर्ग में 200वीं रैंक हासिल कर आईआईटी कानपुर में प्रवेश का रास्ता बनाया है। उसकी सफलता आज ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
आदेश के पिता शिशुपाल एक निजी स्कूल में टैक्सी ड्राइवर के रूप में कार्य करते हैं और उसकी मां सुखी देवी मनरेगा में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करती हैं। सीमित आय के बावजूद माता-पिता ने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। आदेश ने अपनी शुरुआती शिक्षा जहां उसके पिता वाहन चलाते हैं उसी निजी स्कूल से पूरी की। पढ़ाई में लगातार अच्छे प्रदर्शन के कारण उसे आगे बढ़ने का अवसर मिलता गया।
इसके बाद आदेश ने जोधपुर में रहकर जेईई की तैयारी की। उसने राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं परीक्षा में 95% और 12वीं बोर्ड परीक्षा में 94.60% अंक प्राप्त किए। मेहनत और लगन के दम पर उसने जेईई एडवांस्ड-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए आईआईटी कानपुर तक का सफर तय कर लिया।
आदेश का परिवार BPL श्रेणी में आता है और आज भी घास-फूस की झोंपड़ी में रहता है। घर में मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। पीने के पानी के लिए परिवार को प्रतिदिन करीब 1 किलोमीटर दूर स्थित सरकारी टांके तक जाना पड़ता है। माता-पिता की रोज की मेहनत से ही घर का खर्च चलता है लेकिन इन कठिन परिस्थितियों ने आदेश के इरादों को कभी कमजोर नहीं होने दिया।
ग्रामीणों के अनुसार भीषण गर्मी के दिनों में आदेश अक्सर गांव के नीम के पेड़ की छांव में बैठकर घंटों पढ़ाई करता था। संसाधनों की कमी के बावजूद उसने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया। आज उसकी सफलता यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियां प्रतिभा और मेहनत के सामने बाधा नहीं बन सकतीं। आदेश विश्नोई की उपलब्धि न केवल उसके परिवार बल्कि पूरे नागौर जिले के लिए गर्व का विषय बन गई है। उसकी कहानी उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं।