जोधपुर

Jodhpur News: रजिस्ट्रार ऑफिस पर दिनभर पेंशनर्स का कब्जा, विवि का कोई अधिकारी नहीं आया

8 दिन बाद भी जेएनवीयू पेंशनर्स का डाटा सरकार को नहीं भेज पाई, 50 करोड खाते में होने के बावजूद पेंशन नहीं ले पा रहे पेंशनर्स

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Aug 06, 2025
विवि के रजिस्ट्रार ऑफिस में कब्जा करके बैठे पेंशनर्स। फोटो- पत्रिका

जोधपुर के जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय (जेएनवीयू) के पेंशनर्स को पिछले आठ माह से पेंशन का भुगतान नहीं हुआ है। वे 84 दिन से धरने पर बैठे हैं। धरना-प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने 30 जुलाई को विवि के पीडी खाते में 50 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर विवि को पेंशनर्स की जानकारी ट्रेजरी को देने को कहा, ताकि सरकार खुद पेंशनर्स के बैंक खाते में पेंशन डाल सके लेकिन विवि प्रशासन आठ दिन बीतने के बावजूद पेंशनर्स का डाटा तक तैयार नहीं कर पाया।

गुस्साए पेंशनर्स ने बुधवार को रजिस्ट्रार ऑफिस पर कब्जा कर लिया। सुबह 11 बजे से लेकर शाम 6 बजे रजिस्ट्रार ऑफिस पेंशनर्स के कब्जे में रहा। इस दौरान विवि का कोई भी अधिकारी नहीं आया। कार्यवाहक कुलपति प्रो. अजीत कुमार कर्नाटक उदयपुर बैठे हैं। पेंशनर्स के अनुसार रजिस्ट्रार हरितिमा विवि आती ही नहीं है। पेंशनर्स ने उनकी कुर्सी पर लापता का टैग लगा दिया। तीसरा अधिकारी वित्त नियंत्रक का पद खाली पड़ा है। ऐसे में दिनभर पेंशनर्स परेशान होकर शाम को वापस अपने अपने घरों में चले गए।

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डबल डाटा तैयार किया, एनआईसी ने सहयोग किया

विवि ने सरकार को पेंशनर्स का डाटा उपलब्ध कराने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी बनाई थी, लेकिन कमेटी ढंग से काम नहीं कर रही है। पेंशनर्स के प्रदर्शन के कारण बुधवार को कमेटी सदस्यों ने एनआईसी के तकनीशिन को बुलाया तब पता चला कि विवि की कमेटी ने 2200 से अधिक पेंशनर्स का डाटा फीड कर रखा है, जबकि पेंशनर्स करीब 1450 है। एनआईसी ने डबल डाटा को हटाकर उसको दुरुस्त किया।

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जानबूझकर कर रहे देरी, खुद के खाते में चाहते हैं पैसा

पेंशन देने के लिए आया 50 करोड़ का टर्म लोन विवि प्रशासन खुद के खाते में डालना चाहता है, इसलिए पैसा आने के बावजूद आठ दिन बाद भी पेंशन नहीं मिल सकी है। दरअसल विवि के अधिकारी सरकार के आए फण्ड को अन्य कार्यों में उपयोग कर लेते हैं। पिछली बार केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रयासों से आया 30 करोड़ रुपए में से 20 करोड़ रुपए ही पेंशनर्स को पेंशन के दिए। करीब 10 करोड़ रुपए दूसरे मद में खर्च कर दिए, इसलिए सरकार ने इस बार पेंशन का जिम्मा अपने हाथ में ले लिया।

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