
RP BOHRA/जोधपुर.
जस्टिस गोविन्द माथुर ने कहा कि जोधपुर में हाईकोर्ट मुख्यपीठ की स्थापना करना कोई एहसान नहीं था। यह अधिकार से मिली है। राजस्थान के पुनर्गठन के बाद प्रदेश में हाईकोर्ट की स्थापना का सवाल आया, तो हर दृष्टि से हर सुझाव से और हर रायशुमारी से जोधपुर ही उपयुक्त लगा। मैंने इस बारे में एक-एक दस्तावेज देखा है।
जस्टिस माथुर गुरुवार शाम हाईकोर्ट परिसर में अपने स्थानांतरण पर राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन की ओर से आयोजित अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह को राजस्थानी भाषा में संबोधित करते हुए जस्टिस माथुर ने कहा-'म्हारी मायड़ मेवाड़ है मासी मारवाड़ है। उन्होंने कहा कि जीवन के 42 साल इसी मारवाड़ में गुजरे हैं। यहीं से शिक्षा पूरी की और यहीं से पत्रकारिता शुरू की। वकालात करते हुए न्यायाधीश के पद तक पहुंचे। इस भूमि का अहसान कभी नहीं भूल पाएंगे। उन्होंने फैसलों की याद दिलाते हुए कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट का अपना गौरव है। जस्टिस माथुन ने कहा- जिनको भी संवैधानिक पद मिला है, उनको गरीब आदमी की पुकार को सुनना होगा। थोड़े समय के लिए बाहर जा रहा हंू। केवल देह बाहर जा रही है, लेकिन मेरी आत्मा आपके साथ ही है।
समारोह में जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास कहा कि वो हमारे से दूर नहीं जा रहे हैं। गोविन्द तो हर दिल में रहता है। ये तो केवल जस्टिस गोविन्द माथुर जा रहे हैं। समारोह को वरिष्ठ अधिवक्ता महेश बोडा, एमआर सिंघवी, आनंद पुरोहित सहित एसोसिएशन अध्यक्ष रणजीत जोशी ने भी संबोधित किया। समारोह में जस्टिस संगीत लोढ़ा, जस्टिस निर्मलजीत कौर, जस्टिस संदीप मेहता, जस्टिस अरुण भंसाली, जस्टिस पुष्पेन्द्रसिंह भाटी, जस्टिस दिनेश मेहता, जस्टिस मनोज गर्ग सहित राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार सतीशकुमार शर्मा, जोधपुर महानगर के डीजे अतुलकुमार चटर्जी सहित कई न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे। वरिष्ठ अधिवक्ता एमआर सिंघवी, आनन्द पुरोहित, एसपी शर्मा सहित कई अधिवक्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने जस्टिस माथुर के संस्मरण सुनाए और उनके फैसलों से राजस्थान के विकास की याद दिलाई। एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।