रेलवे प्रशासन के दबाव के चलते रनिंग स्टाफ (लोको पायलट, सहायक लोको पायलट व लोको इंस्पेक्टर) को ड्यूटी करनी पड़ रही है।
अमित दवे/जोधपुर. रेलवे प्रशासन की मनमानी रेलवे सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। रेलवे प्रशासन के तुगलकी फ रमान के चलते रेल लोको पायलट व सहायक लोको पायलट आराम को तरस गए हैं। हालात यह है कि, इन कर्मचारियों से नियम विरुद्ध 14 से 16 घंटे तक रेल संचालन करवाया जा रहा है। ऐसे में यदि कोई रेल हादसा हो जाए तो कोई आश्चर्य की बात नहीं। उच्च अधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) की सिफारिशों के आधार पर रेलवे बोर्ड ने 28 नवम्बर 2016 को निर्णय लिया था कि रनिंग स्टाफ की निरन्तर ड्यूटी 9 घंटे से अधिक नहीं होनी चाहिए। रनिंग स्टाफ की ड्यूटी में वृद्धि के लिए रेल प्रशासन को 9 घंटे समाप्त होने के कम से कम 2 घंटे पहले अधिक ड्यूटी की सूचना देने का प्रावधान है। इसमें भी यह ड्यूटी 11 घंटे से अधिक नहीं होनी चाहिए। जबकि सामान्य स्थितियों में ही इसके उलट हो रहा है। स्टाफ की कमी के चलते लोको पायलट को मेमो देकर ज्यादा समय तक ड्यूटी कराई जा रही है। रेलवे प्रशासन के दबाव के चलते रनिंग स्टाफ (लोको पायलट, सहायक लोको पायलट व लोको इंस्पेक्टर) को ड्यूटी करनी पड़ रही है। इस कारण उन्हें पर्याप्त आराम नहीं मिल रहा है।
हादसे का डर
लोको पायलट व सहायक लोको पायलट को आराम नहीं मिलने की वजह से हर वक्त ट्रेन हादसे का डर बना रहता है। रनिंग स्टाफ के शारीरिक व मानसिक रूप से थक जाने के कारण स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा, कई मामलों में लोको पायलट की ड्यूटी समाप्त हो जाने पर बीच रास्ते ट्रेन छोडकऱ चले जाने के मामले भी सामने आए है। हाल ही में, गत रविवार को रात में करीब ढाई बजे जोधपुर से फलोदी की ओर एक मालगाड़ी लोहावट रेलवे स्टेशन पर पहुंचने के दौरान मालगाड़ी के लोको पायलट व गार्ड की ड्यूटी पूरी होने पर मालगाड़ी को स्टेशन पर मुख्य लाइन पर खड़ी कर चले गए। बाद में, दूसरे दिन सोमवार को दूसरे स्टाफ के लोहावट पहुंचने पर मालगाड़ी को दोपहर करीब दो बजे आगे के लिए रवाना किया गया।
करीब 150 पद रिक्त
जोधपुर रेल मंडल में एक्सप्रेस, पैसेंजर और मालगाड़ी ट्रेन में लोको पायलट के स्वीकृत पद करीब 800 हैं। इनमें करीब 150 पद रिक्त हंै।
- एक्सप्रेस सुपरफास्ट के करीब 9
- पैसेंजर के करीब 13
- मालगाड़ी के करीब 35
- सहायक लोको पायलट के करीब 93
इनका कहना है
ये सुरक्षा से जुड़े पद हैं। रिक्त पदों के अभाव में कार्यरत् कर्मचारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऑवर्स ऑफ एम्प्लॉयमेंट एण्ड पीरियड ऑफ रेस्ट रूल्स (एचओइआर) के अनुसार कार्य करवाना चाहिए। कर्मचारियों को समय पर आराम मिलना चाहिए। यूनियन की ओर से रिक्त पदों को भरने व कार्यरत कर्मचारियों के एचओइआर के अनुसार कार्य व आराम की मांग की गई है।
मनोजकुमार परिहार, मण्डल सचिव, नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्प्लॉयज यूनियन
रेलवे में कई पदों के साथ लोको पायलट के पद भी रिक्त हैं। रेलवे बोर्ड की ओर से आयोजित परीक्षाओं में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रियाएं चल रही है।
गोपाल शर्मा, वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर पश्चिम रेलवे, जोधपुर