जज ने कहा सोमवार को पद्मावत की स्क्रीनिंग होगी, पुलिस कमिश्नर ने कहा दो सप्ताह का समय दीजिए
राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के बाद जोधपुर पुलिस कंटोल रूम के पास स्थित आईनॉक्स मल्टीप्लेक्स सिनेमा हॉल सत्यम में सोमवार पांच फरवरी को विवादित फिल्म पदमावत की स्क्रीनिंग की जायेगी। राजस्थान का पहला सिनेमा हॉल बनेगा जिसमें फिल्म पदमावत का एक शो दिखाया जाएगा। जस्टिस संदीप मेहता ने यह आदेश याचिकाकर्ताओं फिल्म पद्मावत के निर्माता निर्देशक संजय लीला भंसाली, फिल्म की हीरोईन दीपिका पादुकोण व एक्टर रणवीर सिंह की ओर से दायर विविध अपराधिक याचिका के निस्तारण के लिए फिल्म का अवलोकन करने के मद्देनजर दिए। इसके बाद में 6 फरवरी को पुन: सुनवाई होगी।
इससे पहले जस्टिस संदीप मेहता की अदालत में सुबह डीसीपी ने पेश हो कर फिल्म पद्मावत फिल्म की स्क्रीनिंग किए जाने पर पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने के लिए कोर्ट की ओर से 23 जनवरी 2018 को जारी आदेश के जवाब में पुलिस अधिकारियों ने सरकारी अधिवक्ता के साथ पेश हो कर फिल्म का प्रदर्शन किए जाने पर पूर्ण रूप से सुरक्षा प्रदान करने का शपथ पत्र पेश किया। कोर्ट ने इस पर याचिकाकर्ता की ओर से उपस्थित हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रवि भंसाली व निशांत बोड़ा से 9 फरवरी तक फिल्म के प्रदर्शन का स्थान व तिथि बताने तथा मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी को करने के आदेश जारी कर दिए।
एएजी व्यास पुलिस कमिश्नर के साथ हुए पेश
इस आदेश के बाद अतिरिक्त महाअधिवक्ता एसके व्यास के साथ पुलिस कमिश्नर अशोक राठौड अदालत में पेश हुए तथा लंच के बाद याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं से फिल्म की स्क्रीनिंग के लिए प्लान मांगा। इस पर रवि भंसाली ने कहा कि वे आज ही दिखाने को तैयार है। वैसे पुराने दर्पण सिनेमा के स्थान पर बने माल में आइनॉक्स द्वारा संचालि सत्यम मल्टीप्लेक्स में सोमवार 5 फरवरी को स्क्रीनिंग की जा सकती है। इस पर जस्टिस मेहता ने पुलिस कमिश्नर से सोमवार को स्क्रीनिंग के समय पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने का कहा तो उन्होंने दो सप्ताह का समय दिए जाने का कहा। इस पर जस्टिस मेहता ने नाराजगी जताते हुए कहा मिस्टर राठौड आप क्या कह रहे हैं, फिल्म सेंसर से पास हो चुकी है और सुप्रीम कोर्ट ने इसके प्रदर्शन के लिए सुरक्षित इंतजाम करने के आदेश बहुत पहले दिए हुए हैं, और आप अभी भी दो सप्ताह का समय मांग रहे हैं, यह कोर्ट की अवमानना है, क्या आपके बयान रिकॉर्ड किए जाए। इस पर कमिश्नर राठौड ने कहा उनकी अवमानन करने की कतई इच्छा नहीं है जो आदेश कोर्ट देगा उसकी पालना करेंगे। इस पर कोर्ट ने कडाई के साथ आदेश जारी करते हुए कहा कि सोमवार 5 फरवरी को फिल्म का प्रदर्शन होगा, आप इसके लिए इंतजाम करें। फिर 6 फरवरी को मामले की पुन: सुनवाई होगी ।
दरअसल विवादित फिल्म पद्मावत के निर्माता निदेशक संजय लीला भंसाली, फिल्म अभिनेता रणवीर सिंह व अभिनेत्री दीपिका पादुकोण पर नागौर जिले के डीडवाणा थाने में फरवरी 2017 में दर्ज एक एफआईआर को चुनौती देते हुए सीआरपीसी की धारा 482 के तहत विविध अपराधिक याचिका दायर की गई थी। जिसमें एफआईआर को रद्द करवाने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में दायर याचिका पर जस्टिस संदीप मेहता की कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान संजय लीला भंसाली के अधिवक्ता रवि भंसाली ने कोर्ट में जवाब पेश करते हुए कहां कि वह फिल्म को कोर्ट के समक्ष कल ही प्रदर्शित करने को तैयार है। पुलिस कमिश्नर अशोक राठौड़ व डीसीपी पूर्व डॉ अमनदीप कपूर कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट में कमिश्नर राठौड़ ने फिल्म प्रदर्शन को लेकर दो सप्ताह का समय मांगा। जिस पर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताते हुए तल्ख टिप्पणी करते हुए कहां कि जब सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया कि इस फिल्म को त्वरित प्रदर्शन की व्यवस्था करें ऐसे में आप दो सप्ताह का समय मांग कर क्या कोर्ट की अवहेलना नही कर रहे। जिसके बाद कोर्ट ने आगामी सोमवार यानी 5 फरवरी को फिल्म दिखाने के आदेश दिए है। कोर्ट के समक्ष फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली के अधिवक्ता ने यह तर्क रखा कि क्योंकि फिल्म हाई रैज्यूलेशन में बनी है तो न्यायिक अकादमी के हॉल में इसका प्रसारण संभव नहीं हैं। जिस पर कोर्ट ने अधिवक्ता की रॉय ली और पूछा कि आप किस सिनेमा हॉल में फिल्म प्रदर्शन करना चाहते है। जिस पर भंसाली के अधिवक्ता ने कहां कि वे सत्यम सिनेमा हॉल में फिल्म प्रदर्शन करना चाहते है। जिस पर कोर्ट ने आगामी पांच फरवरी को इस फिल्म के प्रदर्शन के आदेश दिए है। अब आगामी पांच फरवरी को फिल्म देखने के बाद कोर्ट में इस मामले आगामी 6 फरवरी को फिर सुनवाई होगी।
यह था मामला
फिल्म निर्माता व निर्देशक संजय लीला भंसाली, फिल्म अभिनेता रणवीरसिंह व अभिनेत्री दीपिका पादूकोण पर नागौर के डीडवाणा के थाने में एक एफआईआर आईपीसी की धारा 153 ए व 295 ए में दर्ज की गई थी। इस एफआईआर को रद्द करवाने के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय में 482 की एक याचिका पेश की थी। फिल्म को प्रदर्शन करने से पूर्व सिनेमाटोग्राफी अधिनियम 1952 के तहत बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन सेक्शन 5 ए के तहत सर्टिफिकेट लेना पड़ता है। जिस पर कोर्ट के कहां कि चूंकि एफआईआर में फिल्म में भद्दे सीन और इतिहास के साथ छेड़छाड़ व धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप है इसलिए कोर्ट इस एफआईआर को निरस्त फिल्म को देखे बगैर कैसे कर सकती है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रवि भंसाली ने पैरवी करते हुए पूर्व में कोर्ट में जवाब पेश कर बताया कि निदेशक भंसाली कोर्ट के समक्ष फिल्म प्रदर्शित करने को तैयार है लेकिन उन्हें फिल्म राजस्थान में लाए जाने के दौरान किसी अनहोनी होने की आशंका है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में यह बात तय हो गई कि अब पदमावत फिल्म की स्क्रिनिंग आगामी पांच फरवरी को होगी।