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Monsoon 2026 Prediction: राजस्थान में इस साल अकाल या सुकाल, मानसून को लेकर बड़ी भविष्यवाणी, अप्रत्याशित घटना के भी संकेत

Rajasthan Monsoon 2026 Prediction: अक्षय तृतीया पर जोधपुर में हुए पारंपरिक ‘धणी’ अनुष्ठान ने इस बार अकाल और सुकाल के मिश्रित संकेत दिए हैं। अनुष्ठान में दोनों पक्षों के बीच बराबरी की टक्कर को इस वर्ष कहीं सूखा तो कहीं अच्छी वर्षा की संभावना से जोड़ा जा रहा है।

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'धणी' अनुष्ठान में अकाल-सुकाल की प्रतिकात्मक खप​च्चियां थामें बालक। फोटो- पत्रिका

जोधपुर। अक्षय तृतीया के अवसर पर सोजतिया बास घांची समाज विकास समिति की ओर से बाईजी का तालाब स्थित घांचियों की बगेची में पारंपरिक 'धणी' अनुष्ठान का आयोजन किया गया। करीब पांच घंटे तक चले इस धार्मिक आयोजन में हवन-यज्ञ के माध्यम से भविष्य के मानसून आदि के संकेत प्राप्त किए गए।

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बालकों की जोड़ी बदली गई

अनुष्ठान के प्रारंभिक चरण में स्पष्ट संकेत नहीं मिलने पर अबोध बालकों की जोड़ी बदली गई। दूसरी जोड़ी ने बांस की खपच्चियों के माध्यम से अकाल और सुकाल के प्रतीक शूलों के बीच लगातार टक्कर देखी गई। शुरुआत में शांति और स्थिरता के संकेत मिले, लेकिन बाद में दोनों पक्षों के बीच कांटे की टक्कर बनी रही। कभी अकाल तो कभी सुकाल का पलड़ा भारी नजर आया।

अप्रत्याशित घटना का संकेत

कार्यक्रम के अंतिम चरण में पहली बार दोनों खपच्चियों का थंब से ऊपर उठ जाना किसी अप्रत्याशित घटना का संकेत माना गया। शाम पांच बजे तक चले दूसरे चरण में भी अकाल और सुकाल के बीच उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रही। समिति अध्यक्ष गंगाराम सोलंकी ने बताया कि दोनों शूलों का नहीं टूटना और बराबरी की टक्कर अकाल-सुकाल के समान रहने का संकेत है। इसका अर्थ है कि इस वर्ष राजस्थान में कहीं सूखा तो कहीं अच्छी वर्षा हो सकती है।

अनुष्ठान की विशेषता

अनुष्ठान में कुल आठ अबोध बालकों को शामिल किया गया। स्नान के बाद गीले वस्त्रों में बालकों को आमने-सामने खड़ा कर बांस की खपच्चियां थमाई गईं। कुमकुम लगी खपची सुकाल और काजल लगी खपची अकाल का प्रतीक मानी गई। मिट्टी की वेदी पर सात प्रकार के खाद्यान्न, गुड़ और पताशों की ढेरी पर लकड़ी का थंब स्थापित किया गया। इस दौरान समाज के लोगों ने जयकारों के साथ अनुष्ठान में भाग लिया। धार्मिक आयोजन में जागेश्वर महाराज के साथ भागवत नंदन और सचिन महाराज का सहयोग रहा।

तीन सदियों पुरानी परंपरा

घांची समाज की ओर से यह ‘धणी’ अनुष्ठान पिछले 300 साल से लगातार अक्षय तृतीया पर आयोजित किया जा रहा है। इस अनुष्ठान के माध्यम से अकाल-सुकाल, बीमारी, समय और राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़े संकेत प्राप्त किए जाते हैं।

समाज के राधेश्याम भाटी के अनुसार, इस अनुष्ठान से मिलने वाले संकेत कई बार सटीक साबित हुए हैं, जिससे लोगों की आस्था जुड़ी रहती है। कार्यक्रम में घांची महासभा अध्यक्ष राजेंद्र कुमार सोलंकी, कोषाध्यक्ष अचलूराम सोलंकी, श्रीकिशन भाटी, राजेश सोलंकी, कैलाश परिहार, गौरीशंकर बोराणा, अशोक बोराणा, श्याम भाटी, राजेंद्र भेरावत सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।